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हर इंसान को अपनी लाइफ में यह पहले ही फिक्स कर लेना चाहिए कि उसके जाने के बाद उसकी प्रॉपर्टी का बंटवारा कैसे हो. इसके लिए वसीयत (Will) बनाना सबसे अहम कदम होता है. जी हां वसीयत एक कानूनी डाक्यूमेंट्स होता है, लेकिन अक्सर लोग इसे बनाते समय कुछ अहम बातें नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बाद में परिवार में विवाद और कोर्ट-कचहरी के झंझट शुरू हो जाते हैं. तो अब अगर वसीयत साफ, सटीक और कानूनी रूप से मान्य नहीं होती, तो आपकी करोड़ों की संपत्ति बेकार भी हो सकती है. इसलिए एक सही वसीयत बनाना परिवार की सेफ्टी के लिए बेहद जरूरी है.
वसीयत बनाना सिर्फ बड़े या अमीर लोगों के लिए नहीं है,यह हर किसी के लिए जरूरी होता है. फिर संपत्ति छोटी हो या बड़ी.असल में वसीयत ना होने पर, संपत्ति का बंटवारा 'उत्तराधिकार कानूनों' के अनुसार होता है, जो शायद आपकी इच्छाओं के अनुरूप न हो और परिवार में विवादों का कारण बन सकता है.
1. वसीयत न बनाना या इसे टालना :वसीयत ना बनाना आपकी सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है. अक्सर लोग इसे यह सोचकर टालते रहते हैं कि कि अभी बहुत समय है या सब कुछ अपने आप सुलझ जाएगा. लेकिन अगर आपके जाने के बाद वसीयत नहीं होती, तो आपकी संपत्ति उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार बांटी जाती है, जिसे 'इंटस्टेट सक्सेशन' कहते हैं. इसका परिणाम ये होता है कि संपत्ति का बटबांरा आपकी मर्जी के बजाय कानून के अनुसार होता है, जिससे परिवार में विवाद और कोर्ट-कचहरी के चक्कर लग सकते हैं.
2. वसीयत को अपडेट न करना: लाइफ में समय-समय पर बदलाव आते रहते हैं,विवाह, तलाक, बच्चे का जन्म, मृत्यु, नई प्रॉपर्टी की खरीद या किसी संपत्ति की बिक्री जैसे बड़े बदलाव आपकी वसीयत को बदल सकते हैं.तो अगर वसीयत को समय पर अपडेट ना किया जाए, तो इससे कई तरह की परेशानी हो सकती हैं, जैसे पुराने लाभार्थियों का बने रहना या नए पात्र लोगों को संपत्ति से वंचित कर देना. तो फिर जरूरी है कि आप हर दो से तीन साल में अपनी वसीयत की समीक्षा करें.
3. अस्पष्ट भाषा और अस्पष्ट शर्तें : वसीयत में अस्पष्ट या भ्रमित करने वाली भाषा का यूज फ्यूचर में बड़े विवादों की वजह बन सकता है. जैसे "मेरी सारी संपत्ति" या "महत्वपूर्ण हिस्सा" जैसे शब्दों से लाभार्थियों के बीच गलतफहमी और कानूनी लड़ाई की संभावना बढ़ सकती है. ऐसे मामलों में अदालत को हस्तक्षेप करेगा. तो हमेशा इससे बचने के लिए जरूरी है कि वसीयत में हर संपत्ति की पूरी जानकारी जैसे बैंक खाता संख्या, संपत्ति का पता, निवेश विवरण और लाभार्थी के पूरे नाम और रिश्ते साफ रूप से लिखी जाए, ताकि कोई परेशानी ना हो.
4. गवाहों के हस्ताक्षर की कमी या अनुचित गवाह : वसीयत को कानूनी मान्यता तभी मिलती है जब इसे वसीयतकर्ता (Testator) द्वारा दो गवाहों की मौजूदगी में हस्ताक्षरित किया जाए, और वो दोनों गवाह भी उसी टाइम वसीयत के डाक्यूमेंट्स पर साइन करें. अगर यह प्रक्रिया ठीक से नहीं अपनाई जाती है, तो वसीयत को चुनौती दी जा सकती है. अक्सर लोग गवाहों के चयन में गलती कर बैठते हैं, जिससे बाद में परेशानी होती है तो इसलिए हमेशा ऐसे गवाह चुनें जो न सिर्फ वयस्क और समझदार हों, बल्कि वसीयत में किसी प्रकार के लाभार्थी न हों.
5. डिजिटल संपत्ति की अनदेखी: आज के डिजिटल युग में, आपकी प्रॉपर्टी सिर्फ जमीन-जायदाद या बैंक खातों तक सीमित नहीं है,अब डिजिटल संपत्तियां भी उतनी ही अहम हो गई हैं. जिनमें ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया प्रोफाइल, ईमेल, डिजिटल वॉलेट्स, क्रिप्टोकरेंसी और सब्सक्रिप्शन जैसी चीजें शामिल हैं.अगर इनका जिक्र वसीयत में नहीं किया गया, तो आपके जाने के बाद आपके अपनों को इन्हें एक्सेस करना मुश्किल हो सकता है, तो इसलिए, इन संपत्तियों की सूची बनाएं, उनके लॉगिन डिटेल्स सुरक्षित जगह पर रखें और अपनी वसीयत या अलग दस्तावेज़ में स्पष्ट करें कि आप इनके साथ क्या करना चाहते हैं.
6. कर निहितार्थों पर विचार न करना: वसीयत बनाते समय अक्सर लोग यह सोचकर गलती कर बैठते हैं कि सिर्फ संपत्ति का बंटवारा तय कर देना ही काफी है, लेकिन Tax के पहलुओं की अनदेखी गंभीर परिणाम दे सकती है.अगर संभावित टैक्स इंपैक्ट का आकलन नहीं किया गया, तो आपके उत्तराधिकारियों को भारी टैक्स बोझ उठाना पड़ सकता है, जिससे उनकी वास्तविक प्राप्ति घट जाती है. तो हमेशा वसीयत तैयार करते समय किसी अनुभवी वित्तीय सलाहकार या टैक्स एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें.
वसीयत को वैध और विवादरहित बनाने के साथ सेफ रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद अहम है. सबसे पहले, केवल ऑनलाइन टेम्पलेट्स या खुद से लिखी गई वसीयत के भरोसे ना रहें, बल्कि किसी अनुभवी संपत्ति नियोजन वकील से सलाह से इसको कानूनी रूप दें और उसे अपनी स्थिति के अनुसार कस्टमाइज करें. साथ ही इसकी मूल प्रति को सेफ स्थान पर रखें, जैसे घर की लॉकर में रखें. इसके साथ ही वसीयत का पंजीकरण करवाएं जिससे धोखाधड़ी और कानूनी अड़चनों से बचा जा सकता है.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अपनी वसीयत बनाते समय किसी जानकार से सारी सलाह लें)