होमबायर्स से बड़ा धोखा! TDI इंफ्रास्ट्रक्चर पर ED का शिकंजा, 206 करोड़ की संपत्ति कुर्क!

ईडी ने टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर की 206 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं. 14,000 होमबायर्स से धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े मामले की पूरी जानकारी यहां पढ़ें.
होमबायर्स से बड़ा धोखा! TDI इंफ्रास्ट्रक्चर पर ED का शिकंजा, 206 करोड़ की संपत्ति कुर्क!

TDI इंफ्रास्ट्रक्चर पर ED का शिकंजा. (Representative Image)

अपना घर होने का सपना हर इंसान देखता है, लेकिन जब यह सपना किसी धोखाधड़ी की भेंट चढ़ जाए तो दर्द बयां करना मुश्किल होता है. दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर में एक बार फिर हड़कंप मच गया है. प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (TDI Infrastructure Ltd.) के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक को अंजाम दिया है.

मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए एजेंसी ने कंपनी की 206 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त (Attach) कर लिया है. यह मामला सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, बल्कि उन 14,000 से ज्यादा परिवारों का है जिन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई इस उम्मीद में लगा दी थी कि उन्हें सिर छुपाने के लिए छत मिलेगी. लेकिन बदले में उन्हें मिले सिर्फ लंबे इंतजार और अधूरे वादे.

कहां और क्या हुई कार्रवाई

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ईडी की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के सख्त प्रावधानों के तहत की गई है. अटैच की गई संपत्तियों में हरियाणा के कमसपुर और सोनीपत की बेशकीमती जमीनें और कमर्शियल यूनिट्स शामिल हैं.

  • जब्त जमीन का रकबा: करीब 8.3 एकड़.
  • संपत्ति की लोकेशन: सोनीपत और कमसपुर (हरियाणा).
  • कुल जब्त वैल्यू: नई कार्रवाई के बाद अब तक कुल 251.88 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच हो चुकी है.

26 FIR और 14,000 शिकार

इस पूरी जांच की नींव दिल्ली पुलिस और उसकी आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई 26 एफआईआर पर टिकी है. जांच में जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला है. कंपनी ने साल 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में 23 अलग-अलग रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए.

इन प्रोजेक्ट्स के नाम पर कंपनी ने 14,105 ग्राहकों से बुकिंग के तौर पर 4619 करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी-भरकम राशि वसूली. इनमें से कई खरीदार ऐसे हैं जो पिछले 18 साल से अपने घर की चाबी मिलने का इंतजार कर रहे हैं. हालात ये हैं कि चार प्रोजेक्ट्स को तो अब तक ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) तक नहीं मिला है, जबकि "पार्क स्ट्रीट" जैसा बड़ा प्रोजेक्ट आज भी अधूरा पड़ा है.

फंड का हेरफेर

ईडी की जांच में सबसे बड़ा खुलासा फंड के इस्तेमाल को लेकर हुआ है. नियमानुसार, होमबायर्स से लिया गया पैसा उसी प्रोजेक्ट को पूरा करने में लगाया जाना चाहिए, लेकिन टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर ने कुछ और ही खेल रचा.

  • पैसों का ट्रांसफर: कंपनी ने खरीदारों से मिले करोड़ों रुपये अपनी सब्सिडियरी और जमीन मालिक कंपनियों को 'एडवांस' के तौर पर भेज दिए.
  • कर्ज से मुक्ति: इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी ने प्रोजेक्ट बनाने के बजाय अपने पुराने लोन चुकाने के लिए किया.
  • गलत निवेश: फंड को दूसरे निवेशों में डाइवर्ट कर दिया गया, जिससे प्रोजेक्ट्स का काम लटक गया.

अब आगे क्या होगा

यह ईडी की दूसरी बड़ी कार्रवाई है. इससे पहले भी एजेंसी ने 45.48 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी. अब इस प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर को PMLA की विशेष अदालत के सामने पेश किया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है. दिल्ली-एनसीआर के कई और बड़े डेवलपर्स भी अब जांच एजेंसी के रडार पर हैं. आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर गाज गिर सकती है.