&format=webp&quality=medium)
Representative Image
दिवालिया हो चुके रियल एस्टेट डेवलपर सुपरटेक के घर खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) को निर्देश दिया है कि वह सुपरटेक के बचे हुए 14 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के भविष्य पर जल्द से जल्द फैसला लें. बेंच के निर्णय का मकसद है कि कोर्ट अपनी निगरानी में इन रुके हुए प्रोजेक्ट्स का काम पूरा करवा सके, जिससे कई साल से परेशान होम बायर्स की तकलीफें खत्म हो सके.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा है कि NCLAT सुपरटेक मामले की तुरंत सुनवाई करें. इसमें ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और किसान समेत हर एक पक्ष की राय सुनें.
सुप्रीम कोर्ट के नए एक्सपर्ट कमेटी बनाने के सुझाव का फाइनेंशियल क्रेडिटर्स, जमीन का मालिकाना हक रखने वाले अथॉरिटीज और खुद सुपरटेक ने कोर्ट के इस सुझाव का विरोध किया.
NBCC को दी थी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्य बाग्ची ने इससे पहले फरवरी 2026 में अपना फैसला सुनाते हुए सुपरटेक के 16 प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी NBCC को दी थी. साल 2010 से लेकर 2012 के दौरान लगभग 51000 रेजिडेंशियल यूनिट्स की बुकिंग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्रेडिटर्स के पैसों का निपटारा तब होगा जब खरीदारों को पूरी तरह से घर सौंप दिया जाएगा.
16 रुके हुए सुपरटेक प्रोजेक्ट्स
| प्रोजेक्ट | जगह |
| इको-विलेज -2 | सेक्टर-168, ग्रेटर नोएडा (यूपी) |
| रोमानो | सेक्टर-118, नोएडा (यूपी) |
| केपटाउन | सेक्टर-74, नोएडा (यूपी) |
| जार सुइट्स | ग्रेटर नोएडा (यूपी) |
| इको-विलेज 3 | सेक्टर-16बी, ग्रेटर नोएडा (यूपी) |
| स्पोर्ट्स विलेज | सेक्टर-10, ग्रेटर नोएडा (यूपी) |
| इको-सिटी | सेक्टर-137, नोएडा (यूपी) |
| नॉर्थ आई | सेक्टर-74, नोएडा (यूपी) |
| अपकंट्री | सेक्टर-17ए, यमुना एक्सप्रेसवे (यूपी) |
| इको-विलेज 1 | सेक्टर-1, ग्रेटर नोएडा (यूपी) |
| मेरठ स्पोर्ट्स सिटी | मेरठ (यूपी) |
| ग्रीन विलेज मेरठ | मेरठ (यूपी) |
| हिलटाउन | गुरुग्राम (हरियाणा) |
| अरावेल | गुरुग्राम (हरियाणा) |
| रिवरक्रेस्ट | रुद्रपुर (उत्तराखंड) |
| मिकासा | बैंगलोर (कर्नाटक) |
सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट को NBCC के निर्माण काम के बाधा डालने या कोई स्टे ऑर्डर देने से रोक दिया था. सुपरटेक के इन अटके हुए प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाने के लिए बिना बिके हुए फ्लैट्स को बेचकर और खरीदारों से मिलने वाली बकाया राशि और NBCC की फंडिंग से किया जाएगा. NCLAT ने निर्देश दिया था कि सभी प्रोजेक्ट्स के निर्माण को 12 से 36 महीने के अंदर पूरा किया जाना चाहिए. निर्माण के बाद घरों का थर्ड पार्टी ऑडिट भी किया जाना चाहिए.