हॉर्मुज संकट से घर खरीदारों को पड़ी चौतरफा मार, 20% उछला स्टील का भाव, साउथ मुंबई-वर्ली का सबसे बुरा हाल

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के कारण उपजे संकट से रियल एस्टेट सेक्टर भी अछूता नहीं है. हॉर्मुज संकट के कारण स्टील और एल्यूमिनियम के दाम में उछाल आया है.
हॉर्मुज संकट से घर खरीदारों को पड़ी चौतरफा मार, 20% उछला स्टील का भाव, साउथ मुंबई-वर्ली का सबसे बुरा हाल

Representative Image (Credit: Pexels)

मिडिल ईस्ट में चल रही भीषण जंग और खासतौर से हॉर्मुज संकट ने भारतीय रियल एस्टेट को भी बुरी तरह झकझोर दिया है. रियल एस्टेट एनालिटिक्स फर्म Anarock की ताजा रिपोर्ट के मुतबिक संकट का सीधा और सबसे बुरा असर उन घर खरीदारों पर पड़ा है जो ऊंची EMI से जूझ रहे हैं. मौजूदा वक्त में अफोर्डेबल और मिड रेंज घर खरीदार पहले से ही 7.35 फीसदी से 13.20 फीसदी तक की भारी होम लोन ब्याज दरों का सामना कर रहे हैं. गल्फ संकट के कारण तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई कम होने और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई है, इससे EMI का बोझ बना रहेगा.

कंस्ट्रक्शन मटेरियल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी

Anarock के मुताबिक हॉर्मुज ब्लॉकेड के कारण स्टील, सीमेंट और एल्युमीनियम जैसे कंस्ट्रक्शन मटेरियल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, इससे घरों की कीमतें बढ़ना और प्रोजेक्ट्स के पजेशन में देरी होना लगभग तय है.

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10 से 20 दिन क अतिरिक्त समय

  • एनारॉक के मुताबिक, हॉर्मुज संकट के कारण जहाजों को केप ऑफ गुड होप से होकर आने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
  • लंबे रस्ते के कारण न केवल 10 से 20 दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है, बल्कि प्रति कंटेनर शिपिंग लागत में 1.5 से 3.5 लाख रुपए तक का इजाफा हुआ है.
  • स्टील की कीमतें 62 हजार रुपए प्रति टन से करीब 20 फीसदी उछलकर 72 हजार रुपए प्रति टन हो गई है.
  • एल्युमीनियम की कीमतें भी बढ़कर लगभग 3.5 लाख रुपए प्रति टन हो गई हैं.
  • एनारॉक के मुताबिक अकेले स्टील की कीमत बढ़ने से मुंबई जैसे शहरों में हाई राइज इमारतों की कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में में लगभग 50 रुपए प्रति स्क्वायर फीट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है.

संकट से वर्तमान स्थिति

डीटेलपुरानी कीमत / स्थितिमौजूदा कीमत / स्थिति
शिपिंग में देरीसामान्य समय10-20 दिन अतिरिक्त
कंटेनर शिपिंग लागतसामान्य लागत₹1.5 - ₹3.5 लाख प्रति कंटेनर (बढ़ोतरी)
स्टील की कीमत₹62,000 / टन₹72,000 / टन (20% वृद्धि)
एल्युमीनियमसामान्य₹3.5 लाख / टन
समुद्री ईंधनसामान्य₹1 लाख / टन

हाई राइज केंद्रित शहरों में सबसे ज्यादा असर

मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद जैसे हाई राइज केंद्रित शहरों में इस प्राइस राइज का सबसे अधिक असर देखने को मिलेगा. साउथ मुंबई, BKC, वर्ली और लोअर परेल जैसे लग्जरी बाजारों में इसका प्रभाव सबसे तेज होगा.

इन प्रोजेक्ट्स के लागत में भारी बढ़ोतरी

  • विदेशी फिटिंग, इटेलियन मार्बल जैसे Statuario और Calacatta और एल्यूमीनियम-ग्लास के इस्तेमाल वाले प्रोजेक्ट्स में भारी लागत बढ़ोतरी देखी जा रही है.
  • NRI खरीदार जो मुंबई और दिल्ली में प्रीमियम और लग्जरी प्रोजेक्ट्स की कुल बिक्री मूल्य में 15 से 22 फीसदी और कभी-कभी 30 फीसदी से ज्यादा योगदान देते हैं.
  • युद्ध के कारण यात्रा में व्यवधान पड़ रहा है और फ्लाइट में देरी का सामना कर रहे हैं, जिससे डील्स अंतिम रूप लेने में देरी हो रही है.

हॉर्मुज संकट का रियल एस्टेट पर प्रभाव

Hormuz Crisis

सोर्स: Anarock

2026 में हो चुका ज्यादातर नुकसान

Anarock के मुताबिक भले ही खाड़ी युद्ध कल ही खत्म हो गए हैं, फिर भी सप्लाई चेन को नॉर्मल होने में 1 से 3 महीने तक लग सकते हैं. निर्माण सामग्री की सप्लाई में देरी के कारण प्रोजेक्ट्स के तय समय खासकर मानसून से पहले के टारगेट पर पूरे होने में भारी कठिनाई आएगी, जिससे खरीदारों का अपने घर के पजेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. ऐसे में 2026 में होने वाला ज्यादातर नुकसान अब तय हो चुका है. एनारॉक के मुताबिक यह संकट भारतीय रियल एस्टेट डेवलपर्स को आत्मनिर्भर बनने का सबसे साफ संकेत है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज संकट का भारतीय रियल एस्टेट मार्केट पर क्या असर पड़ा है?

जवाब:
हॉर्मुज संकट से शिपिंग रूट बदला गया है. इससे निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की लागत बढ़ गई है.

सवाल: हॉर्मुज संकट से स्टील की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है?

जवाब:
हॉर्मुज संकट से स्टील की कीमतों में 20 फीसदी बढ़कर 72,000 रुपए प्रति टन हो गई है.

सवाल: मुंबई में प्रति वर्ग फुट निर्माण लागत कितनी ज्यादा बढ़ेगी?

जवाब:
मुंबई में हाई राइज निर्माण की लागत लगभग 50 रुपए प्रति वर्ग फुट हो जाएगी.

सवाल: घर की EMI पर संकट का कितना असर पड़ेगा?

जवाब: तेल संकट के कारण महंगाई बढ़ने से केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें घटाने की उम्मीद बेहद कम है. इससे EMI का बोझ बना रहेगा.

सवाल: किस हाउसिंग सेगमेंट पर सबसे ज्यादा असर होगा?

जवाब: मुंबई में साउथ मुंबई, वर्ली, BKC जैसे एरिया में सबसे ज्यादा असर हो सकता है.

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