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साल 2025 की तीसरी तिमाही देश के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए ऐतिहासिक रही. ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान भारत में 42 डील्स के जरिए 2.9 अरब डॉलर (करीब 24 हजार करोड़ रुपये) का निवेश हुआ, जो महामारी के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इनमें से 33 प्राइवेट डील्स की कुल वैल्यू 1.8 अरब डॉलर रही, जो बताती है कि निवेशकों का भरोसा एक बार फिर कमर्शियल और रिटेल रियल एस्टेट पर लौट आया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह उछाल सिर्फ बाजार सुधार का संकेत नहीं, बल्कि भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों के विश्वास की वापसी को भी दर्शाता है. खास बात यह है कि कमर्शियल सेक्टर ने सबसे ज्यादा हिस्सेदारी दर्ज की ,डील वॉल्यूम में 70 फीसदी और वैल्यू में 91 फीसदी, जबकि शीर्ष 10 डील्स में से चार इसी सेगमेंट से जुड़ी रहीं.
तीसरी तिमाही में प्राइवेट इक्विटी (PE) के क्षेत्र में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. कुल 12 सौदे 859 मिलियन डॉलर के हुए, जो पिछली तिमाही की तुलना में वॉल्यूम में 71 फीसदी और वैल्यू में 48 फीसदी की वृद्धि है. रिपोर्ट के अनुसार, यह निवेश सिर्फ अल्पकालिक रुझान नहीं, बल्कि मजबूत बाजार नींव, संस्थागत भागीदारी और परिपक्व होते निवेश ढांचे का संकेत है.
निंबस रियल्टी के सीईओ,साहिल अग्रवाल ने कहा इस तिमाही में रियल एस्टेट डील्स में आई बढ़ोतरी से साफ पता चलता है कि निवेशकों का भरोसा नोएडा जैसे उभरते इलाकों में लगातार बढ़ रहा है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और मेट्रो के विस्तार जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने इस इलाके को एक बेहतरीन निवेश जगह बना दिया है. यहां अब प्रीमियम घरों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, क्योंकि लोग बेहतर लाइफस्टाइल और लंबे समय के फायदे को ध्यान में रखकर निवेश कर रहे हैं.
एसएस ग्रुप के एमडी और सीईओ अशोक सिंह जौनापुरिया ने कहा, यह आंकड़े बताते हैं कि भारत का रियल एस्टेट मार्केट अब एक परिपक्व और निवेशक-प्रेरित इकोसिस्टम बन चुका है. गुरुग्राम में रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों सेगमेंट्स में मजबूत मांग देखने को मिल रही है, खासकर द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे क्षेत्रों में.
एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा ने कहा, इस तिमाही में हुए 2.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड सौदे बताते हैं कि निवेशक अब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल-ड्रिवन एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लग्जरी हाउसिंग तेजी से बढ़ रही है. डिजाइन, सस्टेनेबिलिटी और लोकेशन अब खरीदारों की प्राथमिकता बन गए हैं. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और मेट्रो विस्तार परियोजनाओं ने बाजार में भरोसे का माहौल बनाया है, जिससे डेवलपर्स के लिए यह समय प्रीमियम प्रोजेक्ट्स को विस्तार देने का सुनहरा अवसर है.
नॉर्थविंड एस्टेट्स के डायरेक्टर – मार्केटिंग एंड सेल्स,शौर्य गर्ग ने कहा Q3 2025 में हुई 2.9 अरब डॉलर की रिकॉर्ड डील्स दिखाती हैं कि निवेशकों का भरोसा नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे इलाकों में लगातार बढ़ रहा है. अब यहां लग्जरी और लाइफस्टाइल वाले घरों की मांग बढ़ रही है, जिसे मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर का सपोर्ट मिल रहा है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नए एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी और भी बेहतर हो रही है, जिससे यह इलाका बड़े निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है.
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का ने कहा, भारत में रियल एस्टेट अब सिर्फ निवेश नहीं बल्कि एक भरोसेमंद संपत्ति वर्ग बन चुका है. दिल्ली-एनसीआर में खासकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे इलाकों में मिड-सेगमेंट और लग्जरी दोनों तरह के प्रोजेक्ट्स में खरीदारों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. निवेशकों का नजरिया भी अब ‘स्पेकुलेशन’ से हटकर ‘सस्टेनेबल रिटर्न’ पर केंद्रित है.
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल ने कहा, भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में जो निवेश बढ़ोतरी दिख रही है, वह केवल एक तात्कालिक उछाल नहीं बल्कि लंबे समय के भरोसे का संकेत है. निवेशक अब ऐसे प्रोजेक्ट्स की तलाश में हैं जो बेहतर लोकेशन, टिकाऊ निर्माण और आधुनिक सुविधाओं से लैस हों. खासकर दिल्ली-एनसीआर में इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और नीतिगत स्थिरता ने मार्केट को मजबूती दी है.
रिपोर्ट में कहा गया कि हालिया तिमाही में M&A (मर्जर एंड एक्विजिशन) डील्स ने रियल एस्टेट सेक्टर की संरचना को नया रूप दिया है. इससे डेवलपर्स को तेजी से विस्तार करने और पूंजी प्रवाह मजबूत करने में मदद मिली है. वहीं, विदेशी निवेश के साथ-साथ घरेलू पूंजी की भागीदारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जो भारतीय निवेशकों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है.
निवेशकों का रुझान अब शॉर्ट टर्म मुनाफे से हटकर लॉन्ग टर्म स्टेबिलिटी पर केंद्रित है. संस्थागत निवेशक फिर से भारतीय बाजार में लौट रहे हैं, जबकि स्थानीय निवेशक भी अब रियल एस्टेट को मंदी और महंगाई से सुरक्षा देने वाला भरोसेमंद साधन मान रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी तिमाही में रियल एस्टेट में हुआ यह रिकॉर्ड निवेश आने वाले महीनों में भी जारी रह सकता है. साल 2025 की चौथी तिमाही (Q4) में और अधिक रणनीतिक M&A सौदे, स्थायी पूंजी प्रवाह और सस्टेनेबल, क्वालिटी-आधारित प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित रहने की संभावना है.