मकान मालिक अक्सर इस बात से परेशान रहते हैं कि किराएदार उनको समय से रेंट नहीं देते हैं तो फिर आखिर वो ऐसे में क्या करें. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर कोई किराएदार समय से किराया नहीं देता तो मकान मालिक कानूनी एक्शन ले सकता है. जी हां मकान मालिक के लिए कानूनी नियम भी है जिसकी मदद से वो किराएदार से रेंट ले सकते हैं, तो चलिए जानेंगे मकान मालिक के कानूनी रूल क्या हो सकता है?
1/5किराएदार और मकान मालिक के बीच एक आम लड़ाई अक्सर रहती है, वो है किराया समय से ना देना. हो सकता है आपमें से कुछ लोगों ने भी ये झेला हो. पर सोचिए जरा, अगर कोई किराएदार घर भी खाली न करे और फिर किराया भी न दे, तो ऐसे में मकान मालिक क्या क्या कर सकता है. वो भी कानून की हद में रहकर ही.
2/51. कानूनी नोटिस भेजना (Legal Notice): घर खाली कराने या किराए लेने के लिए सबसे पहले मकान मालिक को किराएदार को लिखित कानूनी नोटिस भेजना चाहिए. भेजे गए नोटिस में बताया जाना चाहिए कि कितना किराया बकाया है और कितने दिन में चुकाना है. आमतौर पर नोटिस में 15 से 30 दिन का समय दिया जाता है.
3/52. मकान खाली करने का नोटिस देना: अगर किराएदार तय समय पर किराया नहीं देता है, तो मकान मालिक किराएदार को घर खाली करने का नोटिस दे सकता है. इस नोटिस में लिखा होता है कि किराया नहीं देने के कारण किराएदार को अब उस मकान को खाली करना होगा.
4/53. कोर्ट में केस दायर करना: अगर किराएदार अपने मकान मालिक के नोटिस का जवाब नहीं देता है या मकान खाली नहीं करता है, तो मकान मालिक सिविल कोर्ट में बेदखली का केस दर्ज कर सकता है.साथ ही वह बकाया किराया वसूलने के लिए भी उसके खिलाफ केस कर सकता है.
5/54. Rent Control Act का सहारा लेना: यदि राज्य में यानी जिस स्टेट में आपका घर है, वहीं Rent Control Act लागू है, तो मकान मालिक इसके तहत बड़ी ही आसानी से केस दायर कर सकता है. आमतौर पर कई राज्यों में Rent Control Act काम करता है, ये एक्टर किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवादों को सुलझाता है.