Rental Income, Income Tax Notice: किराये की इनकम यदि आप अपने पत्नी, बच्चे या फिर दूसरे रिश्तेदारों के अकाउंट में ट्रांसफर करवाते हैं तो आयकर विभाग की नजर आप पर है. जानिए क्या है इससे जुड़े नियम.
1/10इनकम टैक्स बचाने के लिए कई मकान मालिक किरायेदार से किराया अपने बैंक खाते के बजाए अपने बेटे, पत्नी या किसी दूसरे रिश्तेदार के अकाउंट में ट्रांसफर करवा लेते हैं.
2/10आप सोच रहे हैं कि ऐसा करके आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर से बच जाएंगे तो ये सबसे बड़ी भूल है. ये गलती आपको भारी मुसीबत में डाल सकती है.
3/10इनकम टैक्स कानून के मुताबिक इनकम उस व्यक्ति के हाथ में टैक्सेबल होती है, जिसने उसे कमाया है न कि जिसे वह मिला है. ऐसे में यदि प्रॉपर्टी आपके नाम में रजिस्टर है तो किराये से होने वाली इनकम कानूनी रूप से आपकी ही मानी जाएगी.
4/10कई मामलों में यदि आपने अपनी प्रॉपर्टी बिना किसी सही दाम के अपनी पत्नी या दूसरे रिश्तेदार के नाम कर दी जाती है, तो भी उससे होने वाली इनकम आपकी इनकम से जोड़कर टैक्स लगाया जा सकता है.
5/10इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कई दस्तावेजों के जरिए किराये से होने वाली टैक्स चोरी को पकड़ा है. इसमें आपका एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) सबसे पहला हतियार है. इसमें आपके लेन-देन का पूरा कच्चा चिट्ठा होता है.
6/10किरायेदार यदि टैक्स छूट के लिए HRA क्लेम (1 लाख रुपए से अधिक) करता है उसे आपके पैन कार्ड की डीटेल देनी होगी. आपके पैन की जानकारी मिलते ही फॉर्म 26AS और AIS के जरिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास पहुंच जाएगी.
7/10आपका किरायेदार आपको 50,000 रुपए से अधिक किराया देता है तो उस पर पांच फीसदी TDS काटना जरूरी है. ये आपके पैन कार्ड में दर्ज होगा. इससे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सीधा संकेत मिल जाता है कि किराये से आपको इनकम हुई है.
8/10आपके पत्नी, बेटे या दूसरे रिश्तेदार के खाते में हर महीने बिना किसी नौकरी या बिजनेस के एक निश्चित राशि आ रही है तो भी इनकम टैक्स की नजर में आ सकते हैं. खास हाई वैल्यू वाले सौदों पर आयकर विभाग की पैनी नजर होती है.
9/10इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास सब-रजिस्टर ऑफिस से संपत्ति के स्वामित्व का भी डेटा होता है. इस डेटा का दाखिल किए गए ITR से मिलान किया जाता है. यदि आपके पास संपत्तियां है और किराया नहीं दिखा रहे हैं तो आयकर विभाग इससे पकड़ सकता है.
10/10आयकर विभाग आपको इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 139 (9), 143 (2) और 148 के तहत नोटिस भेज सकता है. पकड़े जाने पर न सिर्फ आपको टैक्स भरना होगा बल्कि धारा 234A, 234B, 234C के तहत ब्याज देना होगा. धारा 270A के तहत 50 फीसदी से 200 फीसदी तक जुर्माना लगा सकता है.