पहली बार घर खरीदते वक्त कई ऐसे डीटेल्स होती है, जिसे आपको अच्छी तरह से समझना जरूरी है. इनकी समझ न होने के कारण आपको बिल्डर चूना भी लगा सकता है.
1/6पहली बार घर खरीदते वक्त कई ऐसे डीटेल्स होती है, जिसे आपको अच्छी तरह से समझना जरूरी है. इनकी समझ न होने के कारण आपको बिल्डर चूना भी लगा सकता है. इसमें सबसे जरूरी है कार्पेट एरिया और सुपर एरिया.
2/6कार्पेट एरिया फ्लैट के अंदर की वो असली जगह होती है जिसे आप रोजाना इस्तेमाल कर सकते हैं. इनमें अंदर की दीवारों की मोटाई शामिल हो सकती है.
3/6सुपर बिल्ट-अप एरिया , बालकनी/छत के साथ-साथ बिल्डिंग की कॉमन जगहें जैसे लॉबी, लिफ्ट, सीढ़ियां, क्लब हाउस, स्विमिंग पूल आदि होता है. ये कार्पेट एरिया से 25 से 50 फीसदी ज्यादा होता है.
4/6बिल्डर कई बार फ्लैट का रेट सुपर बिल्ड अप के हिसाब से बताते हैं. वहीं,RERA के मुताबिक बिल्डरों को फ्लैट केवला रेरा कारपेट एरिया के आधार पर बेचना जरूरी है. सोसाइटी के ब्रोशर और एग्रीमेंट में कार्पेट एयरिया के बारे में साफ तौर पर बताना होगा.
5/6कई बार बिल्डर कार्पेट एरिया में कॉमन एरिया का हिस्सा जोड़ने के लिए लोडिंग फैक्टर का इस्तेमाल करते हैं. दरअसल जितनी सुविधाएं जैसे स्विमिंग पूल, जिम आदि होगी. लोडिंग भी ज्यादा होगी. बिल्डर लोडिंग लगाकर सुपर एरिया को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं.
6/6घर खरीदते वक्त बिल्डर से RERA कार्पेट एरिया जरूर पूछें. बिल्ड अप एरिया के हिसाब से प्रॉपर्टी की तुलना न करें. कार्पेट एरिया के आधार पर प्रति स्क्वायर फुट रेट की तुलना करें. साथ ही बिल्डर-बायर एग्रीमेंट गौर से पढ़ें. RERA कार्पेट एरिया साफ तौर से देखा.