Home Loan EMI: घर खरीदना मिडिल क्लास और EWS के लिए चुनौती से भर गया है. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक EWS की सैलरी का 60 फीसदी हिस्सा और मिडिल क्लास का 40% हिस्सा घर की EMI चुकाने में चला जाता है.
1/6अपने घर का सपना पिछले पांच साल से आम आदमी खासकर EWS वर्ग के लिए काफी मुश्किल हो गया है. नाइट फ्रैंक और NAREDCO की रिपोर्ट के मुताबिक EWS परिवारों की सैलरी का 60% हिस्सा EMI चुकाने में जा रहा है.
2/6नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में EWS परिवारों के लिए EMI टू इनकम रेश्यो 43 फीसदी था, जो 2025 में बढ़कर 60 फीसदी हो गया है.
3/6मिडिल क्लास के लिए ये अनुपात 28 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी हो गया है. इससे साफ झलकता है कि घर खरीदने की क्षमता में तेजी से गिरावट आई है.
4/6रिपोर्ट के मुताबिक ब्याज दरों में बढ़ोतरी और घरों की कीमत में लगातार इजाफा हुआ है. वहीं, सस्ते घरों की सप्लाई में काफी गिरावट आई है.
5/6साल 2018 में देश के टॉप 8 शहरों में लॉन्च हुए कुल घरों में से 52.4 फीसदी सस्ते घर (50 लाख रुपए से कम) थे. साल 2025 में ये आंकड़ा घटकर केवल 17 फीसदी रह गया है.
6/6रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 में ब्याज सब्सिडी को भी पहले के मुकाबले कम कर दिया गया है. PMAY में पहले 2.67 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिलती थी, जो अब 1.8 लाख रुपए हो गई है. ऐसे में निजी डेवलपर्स सस्ता घर बनाने से कतरा रहे क्योंकि उन्हें कम मुनाफा मिल रहा है.