Rent Vs Buying: घर खरीदें या फिर किराये पर रहें. यह सवाल अक्सर सामने घर खरीदारों और निवेशकों के मन में यह सवाल अक्सर उठता है. जानिए क्या कहती है रिपोर्ट.
1/8घर खरीदें या फिर किराये पर रहें. यह सवाल बार-बार घर खरीदारों और निवेशकों को परेशान करता है. अब यह सवाल एक बार फिर सामने आ खड़ा हुआ है.
2/8नुवामा की रिपोर्ट ने रियल एस्टेट मार्केट की ऐसी तस्वीर पेश की है जो बताती है कि प्रॉपर्टी की कीमते और रेंटल यील्ड (किराए से होने वाली कमाई) दोनों अलग-अलग दिशा में जा रही है.
3/8नुवामा के आंकड़ों के मुताबिक देश के अहम शहरों में घरों की कीमत में बड़ा उछाल आया है. अक्टूबर 2025 में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में घरों की कीमतों में सालाना आधार पर 22 फीसदी बढ़ोतरी हुई है.
4/8दिल्ली एनसीआर में यह बढ़ोत्तरी 8 फीसदी और बेंगलुरु में 9 फीसदी दर्ज की गई है. इसके अलावा पुणे और चेन्नई में 7 से 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. कीमतों में उछाल का कारण लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट का शानदार प्रदर्शन है.
5/8रेंटल यील्ड की बात करें तो प्रॉपर्टी की कीमतों के मुकाबले किराये में उतनी तेजी नहीं आई है. कुशमैन एंड वेकफील्ड के मुताबिक मुंबई में किराये में अक्टूबर तक सालाना बढ़ोतरी केवल 2 से 3 फीसदी वृद्धि रही है.
6/8प्रॉपटाइगर की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में किराये में सालाना 4-6 फीसदी वृद्धि हुई है. हालांकि, कुशमैन की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम में लग्जरी सेगमेंट के किराये में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
7/8पुणे में किराये में 1 से 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और चेन्नई में तिमाही आधार पर 2-3 फीसदी की वृद्धि हुई. ऐसे में प्रॉपर्टी की कीमतें किराये की तुलना में बहुत तेजी से भाग रही है. यानी रेंटल यील्ड ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर हो सकती है.
8/8नुवामा ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि अफोर्डेबिलिटी एक अहम चिंता बनकर उभरी है. बढ़ती कीमतों और मिड इनकम वाले घरं की अपर्याप्त उपलब्धता ने आम आदमी के लिए घर खरीदना मुश्किल बना दिया है.