Rental Property: प्रॉपर्टी में पैसा लगाना फायदे का सौदा है. क्या जो किराया आपको हर महीने मिल रहा है वह उसका सही मूल्य है? इन सभी बातों को जानने के लिए एक खास फॉर्मूला है. जानिए क्या है ये फॉर्मूला.
1/6घर खरीदना न सिर्फ एक लंबा निवेश होता है बल्कि उसे किराये पर लगाकर आप हर महीने एक फिक्स्ड इनकम पा सकते हैं. लेकिन, घर खरीदना कई बार बोझ बन जाता है जब किराये से ज्यादा पैसा प्रॉपर्टी के मेंटेनेंस और दूसरे खर्चों में निकल जाता है.
2/6आपको भी यदि हर महीने जेब से पैसा लगाना पड़ रहा है तो समझिए आपकी प्रॉपर्टी निगेटिव कैश फ्लो में हैं. दरअसल कैश फ्लो एक फॉर्मूला है जिसके तहत आप पता लगा सकते हैं कि प्रॉपर्टी में पैसा लगाना फायदा का सौदा है या घाटे का.
3/6कैश फ्लो का मतलब होता है कि प्रॉपर्टी से आने वाले किराये में सभी खर्च निकालने के बाद आपके हाथ में कितना पैसा बचता है. कैश फ्लो का फॉर्मूला है: कुल किराया - सभी खर्चे = कैश फ्लो.
4/6फॉर्मूले में सभी खर्च का मतलब केवल होम लोन की EMI नहीं है, इसमें सोसाइटी मेंटनेंस चार्ज, प्रॉपर्टी टैक्स (सालाना), प्रॉपर्टी का बीमा (यदि है), छोटे-मोटे रिपेयर का अनुमानित खर्च आदि.
5/6पॉजिटिव कैश फ्लो वह स्थिति होती है जब आपका कुल किराया सभी खर्चों से ज्यादा होता है. जो पैसा आखिरी में बचता है, ये आपका मुनाफा है. मान लें आपका किराया ₹25,000 है, EMI, मेंटनेंस, टैक्स मिलाकर कुल खर्च ₹21000 है, तो पॉजीटिव कैश फ्लो ₹4000 है.
6/6निगेटिव कैश फ्लो वह स्थिति होती है जब सभी खर्चे आपके कुल किराये से अधिक है. मान लें आपका किराया ₹25000 है, लेकिन कुल खर्चा ₹28000 है, तो निगेटिव कैश फ्लो ₹3,000 हुआ. इसका मतलब है कि प्रॉपर्टी आपकी जेब खाली कर रही है.