भारत में संपत्ति का बंटवारा हिंदू उत्तराधिकार नियम 1956 के मुताबिक होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि मां का बिना निधन बिना वसीयत लिखे होता है तो किसके पास होगा प्रॉपर्टी का अधिकार.
1/6भारत में संपत्ति बंटवारों के कई नियम है. हालांकि, कई बार संपत्ति के बंटवारे के दौरान कई विवाद सामने आए हैं, उस वक्त इन्हीं कानूनों के जरिए इनका सामाधान निकाला जाता है.
2/6भारत में मां के निधन के बाद प्रॉपर्टी में किसका अधिकार है-बेटे, बेटी, पति या बहू का. हिंदू उत्तराधिकार एक्ट 1956 में इस संबंध में भी साफ नियम बनाए हैं.
3/6किसी हिंदू महिला का बिना वसियत लिखे निधन हो जाता है तो पहली श्रेणी के वारिस बेटे, बेटियां (2005 ), पति होते हैं. इन्हें बराबर का हिस्सा मिल सकता है. यानी सभी को 1/3 हिस्सा मिलेगा.
4/6मां की संपत्ति का कैसे बंटवारा होगा ये इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वह संपत्ति कैसी है. यदि वह मां की स्व अर्जित संपत्ति है तो ऊपर बाताए गए नियम से बंटवारा होगा.
5/6ससुर से विरासत में संपत्ति मिली है और महिला के कोई बेटा या बेटी नहीं है तो ये संपत्ति महिला के पति के वारिसों को जाएगी.
6/6महिला को यदि अपने पिता या माता से संपत्ति विरासत में मिली है और उनकी संतान न हो तो ऐसी संपत्ति उनके पति के बजाए पिता के वारिसों के पास जाएगी.