Property Rules: सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़े नियमों पर नजरिया ही बदल दिया है. जानिए केवल रजिस्ट्री क्यों नहीं है अब काफी.
1/6घर, दुकान या जमीन खरीदते वक्त रजिस्ट्री होते ही लोग ये मान लेते हैं कि वह उसके मालिक हो गए हैं. लेकिन, ऐसा नहीं है. केवल रजिस्ट्री से आपको मालिकाना हक नहीं मिलता है.
2/6प्रॉपर्टी आपके नाम रजिस्टर्ड है, कागज पर आपका नाम हो लेकिन, इसका मतलब नहीं कि आप मालिक हो गए हैं. सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने भारत में प्रॉपर्टी के अधिकारों को देखने का नजरिया बदल दिया.
3/6आप किसी फ्लैट या जमीन की रजिस्ट्री करवाते हैं, तो यह बात पक्का करते हैं कि सौदा हुआ है. लेकिन मालिकाना हक टाइटल डीड से होता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रेशन औपचारिकता है. टाइटल डीड सबूतों, दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड्स पर निर्भर करता है.
4/6मालिकाना हक साबित करने के लिए आपके सेल डीड की पूरी चेन यानी पिछले मालिकों से लेकर अब तक के सारे सौदों के डॉक्यूमेंट्स, दाखिल-खारिज यानी सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम हो. इसके अलावा बिजली-पानी के बिल, टैक्स की रसीदें होने चाहिए.
5/6आपको अपना फ्लैट बेचना है? बैंक आपसे साफ-सुथरा टाइटल डीड मांगेगा. वहीं, आप अपनी जमीन पर कुछ बनाना चाहते हैं तो नगर पालिका की मंजूरी के लिए दाखिल खारिज जरूरी है. वहीं, घर को झूठे दावों से बचना है तो ये डॉक्यूमेंट चाहिए होंगे.
6/6भारत में मालिकाना हर घर में रहने से नहीं बल्कि साबित करने से मिलता है. ऐसे में अपनी प्रॉपर्टी का म्यूटेशन कराएं, सेल डीड इक्ट्ठा करें. टैक्स की रसीदें और बिजल के बिल संभालकर रखें. विरासत में मिली प्रॉपर्टी के लिए कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करें.