Pre EMI Option: घर खरीदते वक्त कई बार बिल्डर्स प्री ईएमआई का ऑप्शन देते हैं. ये कैलकुलेशन खोल देगी आपकी आंखें.
1/7नया मकान या अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदते वक्त कई बिल्डर्स और बैंक प्री EMI का एक विकल्प देते हैं. इसके तहत आपको पजेशन मिलने तक काफी कम किश्त देने का लालच दिया जाता है.
2/7आसान विकल्प दिखने वाले प्री ईएमआई ऑप्शन कई बार महंगा जाल साबित हो सकता है. इसमें आप लाखों रुपए अतिरिक्त चुका देते हैं. हालांकि, मूल धन यानी प्रिंसिपल एक रुपए भी कम नहीं होता है.
3/7मान लें, आपने अपने एक अंडर कंस्ट्रक्शन फ्लैट के लिए 80 लाख रुपए का होम लोन लिया है. बैंक 80 लाख रुपए की राशि बिल्डर को एक साथ नहीं देता. कंस्ट्रक्शन जैसे-जैसे पूरा होता है, किश्तें बिल्डर को मिलने लगती है.
4/7प्री ईएमआई में बैंक ने बिल्डर को जितनी रकम दी है, आप सिर्फ उस रकम पर लगने वाले ब्याज ही हर महीने चुकाते हैं. असली EMI, जिसमें ब्याज और मूलधन दोनों शामिल होता है, तब शुरू होती है जब बैंक बिल्डर को पूरी रकम देता है या आपको कब्जा मिलता है.
5/7अब इसे कैलकुलेशन से समझें. मान लें कि लोन की राशि है 80 लाख रुपए और आपको तीन साल बाद पजेशन मिलेगा. तीन साल में आप प्री EMI के तौर पर 50,000 रुपए प्रति माह चुकाते हैं. यह राशि धीरे-धीरे बढ़ती है जैसे बैंक बिल्डर को पैसे देता है.
6/7तीन साल में आपके द्वारा चुकाया कुल पैसा= ₹50,000 (प्रति माह) x 36 महीने= ₹18,00,000. तीन साल तक 18 लाख चुकाने के बाद भले ही आपको लगे कि लोन कम हो गया है लेकिन बकाया लोन अभी भी 80 लाख रुपए पर खड़ा है.
7/7आपने 18 लाख रुपए सिर्फ बैंक का ब्याज चुका था. 80 लाख का मूल कर्ज वैसा ही है. अब असली ईएमआई शुरू होगी. ऐसे में घर में रहने से पहले ही 18 लाख रुपए अतिरिक्त चुका दिए हैं. इससे घर की लागत बढ़ गई है.