Mumbai Rental Yield: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में किराये से होने वाली कमाई एफडी के ब्याज दरों से भी कम है. जानिए क्या कहती है ताजा रिपोर्ट.
1/8देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अपना घर सपने के साथ-साथ एक उपलब्धि भी मानी जाती है. कई लोग यहां पर घर रहने के लिए भी नहीं निवेश का एक बड़ा जरिया है.
2/8फाइनेंस कंपनी फिलिप कैपिटल की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदकर उसे किराये पर देना अब फायदे नहीं घाटे का सौदा साबित हो रहा है. इससे मिलने वाला रिटर्न सामान्य फिक्सिड डिपॉजिट से भी कम है.
3/8फिलिप कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर मिलने वाली रेंटल यील्ड महज 2.4 फीसदी है, जो देश के प्रमुख शहरों में सबसे कम है. इससे साफ जारी है कि यह देश में एफडी से मिलने वाली ब्याज दरों से भी कम है.
4/8मुंबई में किराये से कम यील्ड होने के सबसे बड़ी वजह प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ साल में जिस तेजी से प्रॉपर्टी के दाम बढ़े हैं, उस अनुपात में किराया नहीं बढ़ा है.
5/8रिपोर्ट के मुताबिक पहले निवेशक कम किराये की भरपाई प्रॉपर्टी की कीमत में होने वाली बढ़ोतरी से कर लेते थे. लेकिन अब वह निश्चित नहीं है.
6/8रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में मुंबई नवी मुंबई में घरों की कीमतों में 3 फीसदी की गिरावट आई है. ऐसी स्थिति निवेशकों के लिए दोहरा झटका है. एक तरफ किराये से कम इनकम और दूसरी तरफ प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने की कोई गारंटी नहीं है.
7/8फिलिप कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की तुलना में कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश ज्यादा फायदेमंद है. कमर्शियल संपत्तियां औसतन 8-11 फीसदी का रिटर्न देती है. साथ ही कैपिटल एप्रिपसिएशन की क्षमता भी काफी ज्यादा है.
8/8मुंबई के मुकाबले कोलकाता में रेंटल यील्ड 4 फीसदी, बेंगलुरु में 3.5 फीसदी और दिल्ली एनसीआर में 2.8 फीसदी है. आमतौर पर देश में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज से 1.5% से 3.5% के बीच ही रेंटल यील्ड मिल पाता है.