अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है. घर छोटा हो या बड़ा हर कोई अपनी जरूरत और आर्थिक स्थिति के हिसाब से प्रॉपर्टी खरीदता है. वैसे जब भी हम घर खरीदते हैं तो रजिस्ट्री करवाते हैं और हमको लगता है कि अब हम उस प्रॉपर्टी के मालिक हो गए हैं. लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि घर की रजिस्ट्री के साथ एक और जरूरी काम करना पड़ता है जिसके बाद आप किसी प्रॉपर्टी के असली मालिक बनते हैं, तो जानेंगे कि रजिस्ट्री के अलावा क्या जरूरी काम करना होता है?
1/6किसी भी प्रॉपर्टी को हमारे देश में खरीदने के बाद रजिस्ट्री करानी होती है, जिसके बाद साफ होता है कि आप उसके मालिक बन गए हैं.असल में हमारे देश में किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए आपको भारतीय रजिस्ट्रेशन एक्ट को ही फॉलो करना होता है. इस एक्ट की मानें तो ₹100 से ऊपर की आप कोई भी संपत्ति किसी दूसरे के नाम पर ट्रांसफर करते हैं तो नजदीकी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड करना होता है.लेकिन अब सवाल ये उठता है कि प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए रजिस्ट्री करवा लेने से क्या आप उस संपत्ति के मालिक हो जाते हैं?
2/6हर किसी को ऐसा लगता है कि किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदकर रजिस्ट्री करवा लेने से आप उसके मालिक बन जाते हैं, ये आपकी गलतफहमी हो सकती है.जी हां केवल संपत्ति की रजिस्ट्री करवा लेने से उसका मालिकाना हक हासिल नहीं कर सकते हैं.असल में रजिस्ट्री के अलावा प्रॉपर्टी का नामांतरण यानी म्यूटेशन भी अपने नाम कराना चाहिए. रजिस्ट्री कराते हुए म्यूटेशन का आधार आपके अपने नाम पर रखेंगे तभी आप असली मालिक बन पाएंगे.
3/6अगर कोई संपत्ति खरीद रहे हैं या खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो पहले आपको रजिस्ट्री और म्यूटेशन के बीच का अंतर पता होना चाहिए.वैसे तो ये दोनों ही एक दूसरे से जुड़े होते हैं लेकिन इनका उद्देश्य अलग होता है. किसी भी प्रॉपर्टी की बिक्री या ट्रांसफर के लिए रजिस्ट्रेशन कराने और इसकी वैलेडिटी की गारंटी देने वाली कानूनी प्रक्रिया को रजिस्ट्री के नाम से जानते हैं.जबकि म्यूटेशन का मतलब यह होता कि आपने प्रॉपर्टी का मालिकाना हक हासिल कर लिया है, यह एक जरूरी प्रक्रिया है. प्रॉपर्टी खरीदने से पहले, बिजली, गैस, पानी जैसे यूटिलिटी कनेक्शन के बकायों की जांच करें,उन्हें निपटाना जरूरी है ताकि बाद में कोई विवाद न हो सके.
4/6प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री और म्यूटेशन में एक खास अंतर होता है जो हर किसी को जानना चाहिए.जी हां किसी भी प्रॉपर्टी को खदीदते टाइम रजिस्ट्री कराने के साथ म्यूटेशन भी करवाएं.रजिस्ट्री करवाकर प्रॉपर्टी का कानूनी स्वामित्व मिलता है और म्यूटेशन करवाने से आप संपत्ति पर अधिकार पाकर सरकारी कनेक्शन और सेवाओं तक पहुंच बनाते हैं. म्यूटेशन नहीं होने से फ्यूचर में टैक्स विवाद, स्वामित्व विवाद या बिक्री में कानूनी अड़चनों आदि से बच सकते हैं.
5/6किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदते समय इसलिए हमेशा कुछ सावधानियां वर्तनी चाहिए ताकि फ्यूचर की परेशानियों से बच सकें. अगर आप प्रापर्टी ले रहे हैं तो रजिस्ट्री से जुड़ी सारी जानकारी लेने के लिए किसी जानकार से संपत्ति को लेकर वेरिफिकेशन करवाने की मदद लें.रजिस्ट्री और म्यूटेशन से जुड़े हर कंफ्यूजन को पहले ही दूर कर लेना चाहिए. रजिस्ट्री से पहले सभी डाक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन जरूर करवा लें.रजिस्ट्रेशन के बाद म्यूटेशन जरूर करवाएंगे जिससे टैक्स या अन्य कानूनी परेशानी बाद में ना हो.
6/6नामांतरण प्रॉपर्टी के लिए जरूरी माना जाता है, वैसे आम भाषा में कहें तो संपत्ति के नामांतरण को ही दाखिल-खारिज कहा जाता है.अगर आप किसी संपत्ति को अपने खुद के नाम पर रिजस्ट्रड करवाते हैं तो फिर इसको दाखिल खारिज कराना भी जरूरी माना जाता है. वैसे आपको बता दें कि प्रॉपर्टी रजिस्ट्री करवा लेने से केवल आपको ओनरशिप ट्रांसफर होगी लेकिन इसके बाद स्वामित्व लेने के लिए दाखिल-खारिज करना भी आपके लिए जरूरी होता है.(नोट:खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, प्रॉपर्टी खरीदते समय सारी जानकारी खुद से हासिल करें)