रियल एस्टेट मार्केट में फिट आउट एक नया बिजनेस मॉडल बनकर उभर रहा है. फ्लेक्स स्पेस ऑपरेटर अब किराये पर ऑफिस स्पेस देकर ही मुनाफा नहीं कमा रहे हैं. जानिए क्या है ये नया बिजनेस मॉडल.
1/6कमर्शियल रियल एस्टेट खासकर ऑफिस स्पेस से कमाई के तरीके लगातार बदल रहे हैं. ब्रोकरेज हाउस एंबिट कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अब फ्लेक्स स्पेस ऑपरेटर्स केवल अब किराया देकर मुनाफा नहीं कमा रहे हैं.
2/6ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक अब फिट आउट्स कमाई का एक बड़ा जरिया बन गया है. इससे अब रियल एस्टेट तेजी से सर्विस ओरिएंटेड मॉडल में तब्दील हो रहा है.
3/6रियल एस्टेट में अभी तक कंपनियां ऑफिस लीज पर लेती थीं. उसमें फर्नीचर और इंटीरियर पर खुद खर्च करती थी. नए बिजनेस मॉडल के तहत फ्लेक्स स्पेस ऑपरेटर्स कंपनियां कस्टमाइज्ड और पूरी तरह से फर्निश्ड ऑफिस बना रहे हैं.
4/6इस बिजनेस मॉडल के तहत फ्लेक्स ऑफिस ऑपरेटर ऑफिस डिजाइन या बिल्डिंग का खर्च एक बार में वसूलने के बजाय उसे लीज की अवधि के दौरान किराये में जोड़कर वसूला जाता है. किरायेदार को भी डिजाइन के लिए भारी-भरकम पूंजी लगानी नहीं पड़ती.
5/6ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक मैनेज्ड ऑफिस की बढ़ती मांग ने इस ट्रेड को ज्यादा हवा दी है. ऐसे में कंपनियां केवल जगह नहीं बल्कि सॉल्यूशन भी खरीद रहे हैं.
6/6एंबिट कैपिटल के मुताबिक मार्केट केवल आर्बिट्रेज यानी सस्ते में लीज लेकर महंगे में बेचने पर नहीं चल रहा है. ब्रोकरेज के मुताबिक डिजाइन और बिल्ड का मार्केट साइज कैलेंडर वर्ष 2029 तक 190 अरब रुपए तक पहुंचने का अनुमान है.