Property Rights: भारत में पिता और बेटे के बीच संपत्ति के कई विवाद सामने आए हैं. ऐसे में यदि पिता ने बेटे को प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया तो क्या उसका पैतृक संपत्ति पर अधिकार होगा. जानिए क्या कहता है कानून.
1/6भारत में अक्सर जमीन-जायदाद के झगड़ों के कारण परिवारों में दरार आती है. कई ऐसे मामले आए है जब पिता ने अपने बेटे या बेटी को किसी कारण से अपनी जायदाद से बदखल कर दिया है.
2/6बाप द्वारा प्रॉपर्टी से बेदखली पर क्या बेटा और बेटी अपने पूर्वजों यानी दादा-परदादा की पैतृक संपत्ति में दावा कर सकता है. ऐसे मामले भारतीय हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (2005 संशोधन) के तहत आते हैं.
3/6हिंदू उत्तराधिकार कानून के मुताबिक पैतृक संपत्ति में बेटे का जन्म से अधिकार होता है. इसे सहदायिक अधिकार (Coparcenary Right) कहते हैं.
4/6बेटा पैतृक संपत्ति के बंटवारे के लिए बंटवारे का मुकदमा दायर कर अपना हिस्सा मांग सकता है. इसे Partition Suit कहा जाता है.
5/6पिता जब अपनी संतान को अपनी प्रॉपर्टी से पूरी तरह से बेदखल करता है तो वह केवल अपनी खुद की कमाई से अर्जित प्रॉपर्टी से ही बेदखली होगी. स्व अर्जित संपत्ति पर पिता का पूरा अधिकार होता है.
6/6पिता वसीयत में बेटे का नाम न लिखकर, सार्वजनिक नोटिस के जरिए बेटे को बेदखल कर सकता है. ऐस संपत्ति पर बेटा कोई दावा नहीं कर सकता है.