देश भर में बिना बिके लग्जरी घरों के अंबार ने डेवलपर्स को परेशानी में डाल दिया है. अब ब्रोकरेज हाउस नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा है कि यदि डेवलपर्स का फोकस मिडिल क्लास पर नहीं होगा तो घरों की बिक्री और गिरेगी.
1/7कोरोना महामारी के बाद रियल एस्टेट मार्केट में लग्जरी घरों की सुनामी आई थी. अच्छे मार्जिन के कारण डेवलपर्स ने मिडिल क्लास से फोकस हटाकर केवल महंगे और लग्जरी घरों को ही लॉन्च किया था. हालांकि, अब ये बुलबुला फूट रहा है.
2/7ब्रोकरेज हाउस नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक लग्जरी घर अब डेवलपर्स के लिए सिरदर्द बन रहे हैं. नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च होने और बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ने से बिना बिके घरों का आंकड़ा बढ़ने लगा है.
3/7ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक घरों की बिक्री की रफ्तार धीमी के कारण पूरे देश में अनसोल्ड इन्वेंट्री का स्तर मार्च 2026 में बढ़कर 20 महीने के स्तर पर पहुंच गया है. फरवरी 2026 में यह 19 महीने पर था.
4/7नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक टॉप 7 शहरों में घरों की बिक्री वॉल्यूम के हिसाब से सालाना आधार पर 11 फीसदी तक गिर गई है. हैदराबाद में सबसे ज्यादा 28 महीने की अनसोल्ड इन्वेंट्री और दूसरे बाजारों में 19 से 24 महीने की इन्वेंट्री पड़ी है.
5/7रिपोर्ट के मुताबिक मजबूरी में ही सही लेकिन, अब बिल्डर्स को मजबूरी में ही सही, लेकिन मिडिल क्लास खरीदारों की तरफ एक बार फिर वापस लौटना होगा. डेवलपर्स ऐसा नहीं करते तो घरों की बिक्री गिरने से कोई नहीं रोक सकता.
6/7ब्रोकरेज का अनुमान है कि डेवलपर्स लग्जरी सेगमेंट से अपना फोकस कम कर वापस मिड इनकम सेगमेंट की ओर नहीं लाते तो आने वाले वक्त में घरों की बिक्री की रफ्तार धीमी रहेगी. इस कारण बिना बिके घरों का और ज्यादा अंबार लगेगा.
7/7नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक डेवलपर्स को प्रॉपर्टी की कीमतों और टिकट साइज को लिमिटेड रखकर अफोर्डेबिलीटी सुधारने पर खास ध्यान देना होगा.