बिल्डर्स घर खरीदते वक्त कई बार जटिल शब्दावली से फंसाते हैं. इन शब्दावली में फंसकर कई बार घर खरीदारों का लाखों का नुकसान होता है. ऐसे ही दो शब्द हैं डेवलपेबल एरिया और सेलेबल एरिया.
1/7घर खरीदाने हर किसी का सबसे बड़े वित्तीय फैसले में से एक होता है. लेकिन, कई बार बिल्डर्स और डेवलर्स जटिल शब्दावली में फंसाकर भ्रमित करते हैं. रियल एस्टेट में ऐसे ही दो जटिल शब्द है डेवलपेबल एरिया और सेलेबल एरिया.
2/7सेलेबल एरिया. इसे सुपर बिल्ट अप एरिया भी कहते हैं. यह कुल क्षेत्रफल होता जिसके लिए बिल्डर आपसे पैसा लेता है. इसमें घर के कारपेट एरिया के अलावा कॉमन एरिया का एक हिस्सा भी शामिल है.
3/7कॉमन एरिया में लिफ्ट, लॉबी, सीढ़ियां, कॉरिडोर आदि आते हैं. सरल शब्दों में कहें तो यह वह एरिया होता है जो आपके नाम पर रजिस्टर होता है लेकिन इसका पूरा हिस्सा आपके प्राइवेट उपयोग में नहीं आता.
4/7अब आते हैं डेवलपेबल एरिया पर. इसमें पूरे प्रोजेक्ट के सभी फ्लैट्स का सेलेबल एरिया तो होता है, साथ ही प्रोजेक्ट की दूसरी सुविधाएं जैसे क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, पार्क, सर्विस एरिया, कार पार्किंग शामिल होता है.
5/7बिल्डर सेलेबल एरिया किसी एक खरीदार को नहीं बेच सकता. हालांकि, इसे बनाने में आई लागत वह सभी फ्लैट्स के सेलेबल एरिया की कीमत में जोड़कर वसूलता है.
6/7बिल्डर आपको 25 एकड़ के बड़े डेवलपेबल एरिया दिखाते हैं और बेचते 1500 वर्ग फुट का सेलेबल एरिया हैं. हालांकि, 25 एकड़ का खर्च भी खरीदारों पर डाला जाता है.
7/7बिल्डर की चालाकी से बचने के लिए आप हमेशा कारपेट एरिया के बारे में सही जानकारी रखें. इसके अलावा सेलेबल एरिया और कारपेट एरिया के बीच के अंतर को लोडिंग फैक्टर भी कहते हैं इसकी जानकारी रखें. साथ ही इलाके के दूसरे प्रोजेक्ट की तुलना करें.