Property Capitalization Formula: प्रॉपर्टी में पैसा लगाते वक्त सबसे पहले मन में ख्याल आता है कि इससे कितना रिटर्न मिल सकता है. यदि आप एक फॉर्मूला जान लेंगे तो आपको बेहतरीन रिटर्न मिल सकता है.
1/6प्रॉपर्टी में निवेश करते हुए पहला सवाल मन में आता है कि इससे कितना किराया आएगा. हालांकि, प्रोफेशनल और बड़े निवेशक केवल किराये ही नहीं बल्कि एक खास फॉर्मूले को ध्यान देकर निवेश करते हैं, जो ये बताता है कि प्रॉपर्टी से कितना मुनाफा आएगा.
2/6प्रॉपर्टी के इस फॉर्मूले का नाम कैपिटलाइजेशन रेट या कैप रेट भी है. यह एक फीसदी का आंकड़ा है, जो बताता है कि प्रॉपर्टी अपने मार्केट मूल्य पर एक साल में कितना रिटर्न देगी. इसमें सभी जरूरी खर्चे भी शामिल होते हैं.
3/6कैप रेट (%) = (नेट ऑपरेटिंग इनकम / प्रॉपर्टी का मौजूदा बाजार मूल्य) x 100. यहां पर नेट ऑपरेटिंग इनकम सबसे अहम है. इसे निकालने के लिए अपको प्रॉपर्टी से मिलने वाले कुल सालाना किरये में से उस पर होने वाले सभी जरूरी खर्चों को घटाना होता है.
4/6जिन खर्चों को घटाना होता है उसमें: प्रॉपर्टी टैक्स, मेंटेनेंस और रिपेयर का खर्चा, बिल्डिंग की इंश्योरेंस, सोसाइटी फीस, प्रॉपर्टी के कुछ महीने खाली रहने का अनुमानित नुकसान शामिल.
5/6कैप रेट, रेंटल यील्ड से अलग होता है. रेंटल यील्ड में अक्सर प्रॉपर्टी पर होने वाले खर्चों को नजरअंदाज किया जाता है. मान लें कि प्रॉपर्टी को प्रॉपर्टी से सालाना 5 लाख रुपए किराया मिलता है. उसकी कीमत ₹1 करोड़ है. रेंटल यील्ड के हिसाब से 5% रिटर्न हुआ.
6/6आप प्रॉपर्टी पर यदि साल में 1 लाख रुपए टैक्स, मेंटेनेंस और दूसरी फीस पर खर्च करते हैं, तो आपकी नेट इनकम केवल 4 लाख रुपए हो गई है. कैप रेट के फॉर्मूले के हिसाब से ये 4% है. यही 1% का अंतर लंबी अवधि में एक बड़े मुनाफे या नुकसान का कारण बन सकता है.