प्रॉपर्टी के सौदों में सबसे बड़ा डर फर्जीवाड़े का होता है. खरीदार के मन में अक्सर यह शक रहता है कि क्या वह जिस प्रॉपर्टी को खरीद रहा है, उसे कोई और तो नहीं खरीद चुका. अब ब्लॉकचेन तकनीक ने इस समस्या का हाल निकाला है.
1/6घर, जमीन खरीदने के लिए लोग अपने जीवन भर की जमा-पूंजी लगा देते हैं, लेकिन होम बायर्स को सबसे बड़ा डर यही सताता है कि बिल्डर ने एक ही फ्लैट दो लोगों को तो नहीं बेच दिया है. हालांकि, ब्लॉकचेन तकनीक ने इस फर्जीवाड़े पर लगाम लगाई है.
2/6KPMG और FICCI की नई रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लॉकचेन प्रॉपर्टी रजिस्ट्री और टाइटल रिकॉर्ड को इतना ट्रांसपेरेंट और सुरक्षित बना रहा है कि कोई धोखेबाज अब दस्तावेजों के साथ हेरफेर नहीं कर सकता है.
3/6ब्लॉकचेन तकनीक प्रॉपर्टी रिकॉर्ड का ऐसा डिजिटल लेजर बनाती है, जिसे न तो मिटाया जा सकता है और न ही उसमें बदलाव किया जा सकता है. इससे एक ही प्रॉपर्टी दो अलग-अलग लोगों को बेचने और फर्जी ट्रांसफर को रजिस्ट्री होने से पहले ही पकड़ लिया जाता है.
4/6रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 तक इस सिस्टम के जरिए 34 करोड़ से ज्यादा प्रॉपर्टी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन हो चुका है. खरीदार आसानी से प्रॉपर्टी का मालिकाना हक जांच सकते हैं, जिससे कोर्ट-कचहरी के मुकदमों और विवादों में कमी आई है.
5/6पहले प्रॉपर्टी के कागजात अलग-अलग डिपार्टमेंट में बंटे होते थे, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश रहती थी. ब्लॉकचेन एक सिंगल सोर्स ऑफ ट्रूथ तैयार करता है. इससे रजिस्ट्री ऑफिस, बैंकों, कोर्ट और खरीदार के पास प्रॉपर्टी की एक जैसी और 100% सटीक जानकारी होती है.
6/6ब्लॉकचेन तकनीक के स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए पेमेंट प्रक्रिया को ऑटोमेट किया जा रहा है. यानी जब तक मालिकाना हक ट्रांसफर की शर्तें पूरी नहीं होंगी, तब तक बिल्डर का पेमेंट सेटल नहीं होगा. इससे विवादों में कमी आएगी और इंसानी दखलंदाजी कम होगी.