दिल्ली के ट्रैफिक का झंझट खत्म! नोएडा सेक्टर 62 बना ऑफिस स्पेस का नया हॉटस्पॉट, घर के पास खुल रहे कॉर्पोरेट हब

नोएडा में सेक्टर 62 और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे का इलाका ऑफिस स्पेस का बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभर रहा है. गुरुग्राम के मुकाबले यहां किराये प्रतिस्पर्धी बने हुए है. जानिए क्या कहती है ताजा रिपोर्ट.
दिल्ली के ट्रैफिक का झंझट खत्म! नोएडा सेक्टर 62 बना ऑफिस स्पेस का नया हॉटस्पॉट, घर के पास खुल रहे कॉर्पोरेट हब

नोएडा में यदि आप रहते हैं और काम के लिए घंटों दिल्ली के ट्रैफिक में फंसते हैं, तो यह आपके लिए अच्छी खबर है. अब बड़ी कंपनियां दिल्ली की भीड़भाड़, ट्रैफिक और प्रदूषण को छोड़कर नोएडा का रुख कर रही हैं. ब्रोकरेज फर्म एम्बिट कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा अब सिर्फ एक रिहायशी शहर नहीं, बल्कि कॉरपोरेट जगत का नया पसंदीदा ठिकाना बनया गया खासकर नोएडा का सेक्टर 62 और एक्सप्रेसवे ऑफिस स्पेस के नए हॉटस्पॉट बन गए हैं.

सेक्टर 62, नोएडा- ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे में शिफ्ट

Ambit Capital की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां अब अपने ऑफिस नोएडा के सेक्टर 62 और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे जैसे इलाकों में शिफ्ट कर रही हैं.

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20% तक की लागत में बचत

  • शिफ्ट करने का सबसे बड़ा कारण बेहतर कनेक्टिविटी और फ्लेक्स वर्कस्पेस यानी लग्जरी मैनेज्ड ऑफिस की बढ़ती उपलब्धता है.
  • रिपोर्ट के मुताबिक पारंपरिक ऑफिस लीज की तुलना में फ्लेक्स स्पेस लेने से कंपनियों को लगभग 20% तक की लागत बचत होती है.
  • नोएडा में रेंटल अभी भी दिल्ली और गुरुग्राम के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं. यहां कंपनियों को कम दाम में ग्रेड ए यानी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मिल रही है.

ऑफिस लीजिंग मॉडल (खर्च का अंतर)

खर्च का प्रकारपारंपरिक ऑफिस (Traditional)फ्लेक्स/मैनेज्ड ऑफिस (Flex)फायदा
फिट-आउट कॉस्ट (Capex)किराएदार का खर्च (₹2,200/sqft)जीरो / ऑपरेटर का खर्चभारी बचत
किराया व मेंटेनेंसअलग-अलग बिलएक ही बिल (All-inclusive)आसान प्रबंधन
लॉक-इन अवधिलंबी (3-5 साल)लचीली (1-3 साल)कम जोखिम
कुल लागतज्यादा20% कममुनाफा

सोर्स: Ambit Capital

बने बनाए ऑफिस पर दांव

नोएडा के बदलात हुए मार्केट में फ्लेक्स वर्कस्पेस की मांग जबरदस्त बनी हुई है. जहां पहले कंपनियों को ऑफिस बनाने के लिए भारी निवेश करना पड़ता था, अब वे बने बनाए ऑफिस यानी प्लग एंड प्ले ले रही है.

बाजार में 11% हिस्सेदारी

  • ऑफिस स्पेस सॉल्यूशन्स में स्मार्टवर्क्स जैसे बड़े खिलाड़ी यहां एक्टिव हैं. रिपोर्ट के अनुसार नोएडा के फ्लेक्स मार्केट में उनकी 11% हिस्सेदारी है.
  • स्मार्टवर्क्स के अलावा इंडिक्यूब और अवफिस जैसे दूसरे ऑपरेटर्स भी एनसीआर में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं. इससे कस्टमर्स को बेहतर ऑप्शन मिल रहे हैं.

नोएडा फ्लेक्स मार्केट स्नैपशॉट

डीटेल्सआंकड़ा
कुल फ्लेक्स स्टॉक

64-74 लाख वर्ग फीट

प्रमुख लोकेशन

सेक्टर 62, नोएडा एक्सप्रेसवे

स्मार्टवर्क्स मार्केट शेयर11%
अवफिस (Awfis) की उपस्थिति

10 सेंटर्स (7,000+ सीट्स)

स्पोक मॉडल पर फोकस

ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी कंपनियां अब हब एंड स्पोक मॉडल मॉडल अपना रही है. यानी एक मुख्य ऑफिस (हब) के साथ-साथ कर्मचारियों के घर के पास छोटे ऑफिस यानी स्पोक पर फोकस कर रहे हैं. नोएडा सेक्टर 62 और एक्सप्रेसवे इस मॉडल में सबसे अहम स्पोक बनकर उभर रहे हैं, क्योंकि यहां पर गाजियाबाद और पूर्वी दिल्ली का बड़ा वर्कफोर्स आसानी से पहुंच सकता है. इसके अलावा कर्मचारियों को घंटों सफर करके गुड़गांव या दक्षिण दिल्ली नहीं जाना पड़ता है. साथ ही स्पोक से वर्क लाइफ बैलेंस भी बेहतर होती है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल: 'स्पोक' ऑफिस का क्या मतलब है?

जवाब: मुख्य ऑफिस (Hub) से दूर, कर्मचारियों के घर के नजदीक खोला गया छोटा सैटेलाइट ऑफिस 'स्पोक' कहलाता है.

सवाल: नोएडा सेक्टर 62 और एक्सप्रेसवे ही क्यों चुने जा रहे हैं?

जवाब: मेट्रो और रोड कनेक्टिविटी शानदार है, जिससे दिल्ली और गाजियाबाद से आने वाले कर्मचारियों का सफर आसान हो जाता है.

सवाल: फ्लेक्स ऑफिस से कंपनियों को कितना पैसा बचता है?

जवाब: पारंपरिक ऑफिस की तुलना में फ्लेक्स स्पेस लेने पर कंपनियों को लगभग 20% लागत की बचत होती है.

सवाल: नोएडा में कौन से बड़े फ्लेक्स ऑपरेटर्स मौजूद हैं?

जवाब: स्मार्टवर्क्स (11% शेयर), अवफिस (10 सेंटर्स), इंडिक्यूब और वीवर्क यहाँ प्रमुख खिलाड़ी हैं ।

सवाल: क्या बड़ी कंपनियां भी नोएडा आ रही हैं?

जवाब: अब सिर्फ स्टार्टअप ही नहीं, बल्कि बड़ी MNCs और ग्लोबल कंपनियां (GCCs) भी यहां 'मैनेज्ड ऑफिस' ले रही हैं.

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