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रियल एस्टेट सेक्टर पर आई मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट. (Image Source- AI)
भारतीय रियल एस्टेट मार्केट (india real estate Market) में एक ऐसी लहर आ रही है जो आने वाले कुछ सालों में पूरी तस्वीर बदल देगी. ये लहर है 'डेटा सेंटर्स' की. मॉर्गन स्टेनली की एक ताजा रिपोर्ट ने इस सेक्टर को लेकर जो आंकड़े पेश किए हैं, वो किसी को भी हैरान कर सकते हैं. दरअसल, पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर जो दीवानगी है, उसका सीधा फायदा अब भारत के बड़े डेवलपर्स को मिलने वाला है.
कहा जा रहा है कि ग्लोबल लेवल पर AI केपेक्स (Capex) में जो धमाका हुआ है, उसकी वजह से भारत की डेटा सेंटर क्षमता वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 10.5 गीगावाट (GW) हो सकती है. ये सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट कंपनियों के लिए कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया है.
आज के दौर में हर चीज डिजिटल हो रही है और AI के आने के बाद डेटा को स्टोर करने और प्रोसेस करने के लिए भारी भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है. मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि ग्लोबल लेवल पर जो निवेश हो रहा है, उसका एक बड़ा हिस्सा भारत की तरफ मुड़ेगा.
डेवलपर्स के लिए इसमें सबसे बड़ी ताकत उनका अनुभव है. उनके पास पहले से जमीन मौजूद है, उन्हें सरकारी अप्रूवल लेने की प्रक्रिया अच्छे से पता है और उनके पास मजबूत स्ट्रक्चर बनाने का हुनर भी है. इसके अलावा, रेजिडेंशियल या कमर्शियल रेंटल एसेट्स को मैनेज करने का जो अनुभव इन कंपनियों के पास है, वो डेटा सेंटर के बिजनेस में उनके बहुत काम आने वाला है.
इस पूरी रिपोर्ट में कुछ नाम सबसे ऊपर चमक रहे हैं. लोढ़ा (Macrotech Developers) और माइंडस्पेस (Mindspace Business Parks REIT) इस लिस्ट में सबसे आगे हैं क्योंकि इनका एक्सपोजर डेटा सेंटर सेक्टर में सबसे ज्यादा है. एक्सपर्ट्स का तो यहां तक कहना है कि सिर्फ डेटा सेंटर विस्तार के दम पर ही इन दोनों कंपनियों की मौजूदा वैल्युएशन में 20 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिल सकती है.
| लोढ़ा (Macrotech Developers) | 868.35 | 869.05 | 865.00 |
| माइंडस्पेस (Mindspace REIT) | 450.99 | 451.98 | 449.89 |
| DLF Limited | 545.70 | 558.10 | 557.25 |
| प्रेस्टीज (Prestige Estates) | 1,250.20 | 1,252.70 | 1,250.00 |
सिर्फ यही नहीं, DLF और प्रेस्टीज (Prestige Group) जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस रेस में पीछे नहीं हैं. उनके पास भी इस सेक्टर में अच्छा खासा एक्सपोजर है और आने वाले समय में ये कंपनियां भी इस डिमांड का फायदा उठाने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रही हैं.
जब हम रिटर्न की बात करते हैं, तो डेटा सेंटर्स से मिलने वाला मुनाफा कमर्शियल एसेट्स (जैसे ऑफिस स्पेस) के बराबर ही हो सकता है. लेकिन फिर भी इसे ज्यादा आकर्षक माना जा रहा है. इसके पीछे तीन मुख्य वजहें हैं-
कुल मिलाकर, रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए डेटा सेंटर सिर्फ एक साइड बिजनेस नहीं, बल्कि भविष्य का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है.
भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब पारंपरिक ईंट और गारे से आगे बढ़कर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ मुड़ रहा है. मॉर्गन स्टेनली के आंकड़े साफ बताते हैं कि AI के दौर में डेटा सेंटर क्षमता का 10.5GW तक पहुंचना महज एक शुरुआत है.
लोढ़ा और माइंडस्पेस जैसे बड़े खिलाड़ी जिस तरह से इस मौके का फायदा उठा रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले समय में निवेशकों की नजर इन शेयरों पर बनी रहेगी. जमीन और मैनेजमेंट का अनुभव रखने वाले डेवलपर्स के लिए यह एक सुनहरा मौका है.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)