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महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) ने मुंबई शहर की 96 सबसे पुरानी इमारतों और खतरनाक इमारतों को खाली करने का आदेश दिया है. दरअसल इस कदम का मकसद बरसात से पहले किसी भी तरह के हादसे को रोकना है. इन इमारतों में रह रहे 2400 परिवार को अपना घर ढूंढने के लिए अथॉरिटी हर महीने 20 हजार रुपए मदद करेगी. MHADA ने अपनी वेबसाइट पर सभी 96 बिल्डिंगों की लिस्ट भी जारी कर दी है.
MHADA की वेबसाइट के मुताबिक इन बिल्डिंग में रह रहे 184 निवासियों को घर खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है. इनमें से 3 निवासी ट्रांजिट कैंप में चले गए हैं. हालांकि, नोटिस मिलने के बावजूद 176 घर खाली नहीं किए गए हैं. किसी भी निवासी ने रहने के लिए खुद से दूसरी व्यवस्था नहीं की है. बारी बची इमारतों में रहने वाले लोगों को भी घर खाली करने के निर्देश दे दिए हैं. अथॉरिटी के मुताबि 96 बिल्डिंग में कुल 3162 किरायेदार और निवासी हैं, जिनमें 2577 रहने वाले लोग और 585 दुकानें और ऑफिस शामिल हैं.
MHADA ने घोषआ की है कि जो भी परिवार इन इमारतों में रहते हैं, उन्हें दूसरी जगह पर किराये का घर लेने के लिए 20 हजार रुपए प्रति माह दिया जाएंगे. ये फैसला इस कारण लेना पड़ा क्योंकि अथॉरिटी के अपने ट्रांजिट कैंप में केवल 786 घर ही उपलब्ध है, जो जरूरत से काफी कम है. इस कारण लोगों को आर्थिक मदद देने का फैसला किया गया है. इसके अलावा संस्था ने 400 नए अस्थाई घर तीन साल की लीज में देने का भी निर्देश दिया है. ये घर 180 से 250 वर्ग फुट के होंगे.
MHADA की यूनिट, मुंबई बिल्डिंग रिपेयर्स एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड (MBRRB) ने मॉनसून से पहले एक सर्वे किया था. इस सर्वे में 96 इमारतों को रहने के लिए सबसे असुरक्षित पाया था. लोगों की जान को खतरा देखते हुए, अथॉरिटी के सीईओ और उपाध्यक्ष संजीव जायसवाल ने तुरंत इन इमारतों को खाली कराने का फैसला किया था. उन्होंने घोषणा की थी कि जो भी फैमिली इन इमारतों में रहते हैं उन्हें दूसरी जगह पर किराए का घर लेने के लिए 20 हजार रुपए प्रति महीने की मदद की जाएगी.