सिर्फ 2 मिनट में समझें "लोडिंग फैक्टर" का खेल! बिल्डर की इस चालाकी से बचाएं अपने पैसे, मिलेगी ज्यादा जगह

Loading Factor: घर खरीदते वक्त कई ऐसी चीजें हैं, जिनकी जानकारी होने पर आप अपने पैसे बचा सकते हैं. ऐसी ही एक चीज है लोडिंग फैक्टर. इसकी जानकारी से न सिर्फ आप अपने पैसे बचा सकते है बल्कि ज्यादा स्पेस भी मिलेगा.
सिर्फ 2 मिनट में समझें "लोडिंग फैक्टर" का खेल! बिल्डर की इस चालाकी से बचाएं अपने पैसे, मिलेगी ज्यादा जगह

Loading Factor: सपनों का आशियाना खरीदते वक्त कई बातों को ध्यान में रखना जरूरी होता है. कई छोटी-छोटी चीजों की जानकारी से आप लाखों रुपए की बचत कर सकते हैं. इनमें से ऐसे ही एक चीज है लोडिंग फैक्टर. लोडिंग फैक्टर से सीधे तौर से इस बात पर असर पड़ता है कि आप अपनी जेब से जितना पैसा दे रहे हैं, क्या वास्तव में आपको इस्तेमाल करने लायक जगह मिल रही है या नहीं. इसके अलावा भविष्य में जब आप अपना फ्लैट बेचते हैं तो लोडिंग फैक्टर से आपको अच्छी कीमत मिल सकती है.

क्या होता है लोडिंग फैक्टर

लोडिंग फैक्टर एक ऐसा प्रतिशत होता है जो आपके फ्लैट के कारपेट एरिया और उसके सुपर बिल्ट-अप एरिया के बीच के अंतर को दर्शाता है. कारपेट एरिया वह एरिया होता है जिसे आप अपने फ्लैट के अंदर दीवार से दीवार तक इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें अंदर की दीवारें शामिल नहीं होती है. दूसरी तरफ सुपर बिल्ट-अप एरिया फ्लैट का कारपेट एरिया, फ्लैट की दीवारों का एरिया और बिल्डिंग के कमन एरिया का प्रपोशनल हिस्सा मिलाकर बनाता है. इसमें लिफ्ट, सीढ़ियां, लॉबी, जिम, क्लब हाउस आदि शामिल होते हैं.

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लोडिंग फैक्टर का फॉर्मूला

लोडिंग फैक्टर के जरिए आपको ये पता चलता है कि कारपेट एरिया के ऊपर कितनी फीसदी एक्स्ट्रा जगह जोड़ा गया है ताकि सुपर बिल्ट-अप एरिया तक पहुंचा जा सके. ऐसे में लोडिंग फैक्टर का फॉर्मुला है:

लोडिंग फैक्टर = (सुपर बिल्ट-अप एरिया - कारपेट एरिया) ÷ कारपेट एरिया ×100

आपको बता दें कि रेरा अधिनियम 2016 आने के बाद बिल्डरों के लिए कारपोट एरिया को साफ तौर से बताना जरूरी हो गया है. हालांकि, कीमत सुपर बिल्ट-अप एरिया के मुताबिक तय होती है. ऐसे में लोडिंग फैक्टर बेहद अहम हो जाता है.

कैसे मिलेगी ज्यादा जगह

आपके फ्लैट का कारपेट एरिया भले ही कम हो लेकिन, ज्यादा लोडिंग फैक्टर होने की स्थिति पर कॉमन एरिया के लिए भी ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं. मान लें किसी फ्लैट का कारपेट एरिया 600 वर्ग फुट है. लोडिंग फैक्टर 30% है, तो सुपर बिल्ट-अप एरिया 780 वर्ग फुट होगा. यदि प्रॉपर्टी की कीमत 5000 रुपए प्रति वर्ग फुट है तो आपको 600 नहीं 780 वर्ग फुट के हिसाब से पैसे देने होंगे.

लोडिंग फैक्टर जितना ज्यादा होगा, आपके फ्लैट का कारपेट एरिया उतना ही कम होगा, लेकिन पैसे ज्यादा चुकाने होंगे. ऐसे में कम लोडिंग फैक्टर में ज्यादा कारपेट एरिया मिलता है. ऐसे में लोडिंग फैक्टर के जरिए आप कई अलग-अलग प्रोजेक्ट्स की तुलना बेहतर ढंग से कर सकते हैं साथ ही अच्छे कारपेट एरिया वाले फ्लैट्स की ज्यादा स्पेस और कीमत कम पा सकते हैं.

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