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Indian Real Estate Sector: भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहा संघर्ष सीजफायर के बाद फिलहाल रुक गया है.यदि ये संघर्ष लंबा खिंचता तो भारत में घरों की बिक्री थोड़े वक्त के लिए प्रभावित हो सकती है. रियल एस्टेट सलाहकार एनारॉक के मुताबिक युद्ध होने की स्थिति में आवास की बिक्री में पांच-10 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है. सलाहकार फर्म ने कहा कि ऑफिस और खुदरा स्थानों की मांग पर भी अल्पावधि के लिए कुछ प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन ये गिरावट बहुत बड़ी नहीं होगी.
एनारॉक समूह के क्षेत्रीय निदेशक और शोध प्रमुख प्रशांत ठाकुर ने एक बयान में कहा, ''यदि मौजूदा संघर्ष बढ़ता है, तो हमें उसके कुछ परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिए.'' उन्होंने कहा, ''युद्ध की वजह से निर्माण भी प्रभावित होता है, और अंतिम उपयोगकर्ता और निवेशकों का भरोसा भी कम होता है. इच्छुक घर खरीदार निर्णय को रोक देते हैं. खुदरा विक्रेता अपनी विस्तार योजनाओं पर रोक लगाते हैं और पर्यटक अपनी यात्रा योजनाओं को स्थगित कर देते हैं. ऐसे में रियल एस्टेट बाजार प्रभावित होता है, लेकिन फिर वापस भी आता है.''
प्रशांत ठाकुर ने कहा कि आवास खंड में दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में थोड़े समय के लिए बिक्री पांच-10 प्रतिशत घट सकती है. लक्जरी घर खरीदने वाले अनिश्चितता के दौर में अपना फैसला टाल कर सकते हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1971 में 13 तक दिन युद्ध चला था. इस युद्ध ने भारत की अर्थव्यवस्था को लगभग रोक दिया था. मुंबई में राज्य सरकार ने सीमेंट और स्टील पर कड़ा नियंत्रण लगा दिया, जिससे घरों के प्रोजेक्ट की मंजूरी में 12% की कमी आई थी. शहर में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन भी 1971 में लगभग 10% कम हो गया था.
साल 1999 में तीन महीने तक चले कारगिल संघर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था काफी मजबूत थी. हालांकि, रियल एस्टेट सेक्टर एशियाई वित्तीय संकट से जूझ रहा है. इस बार घरों के किराए पर सीधा असर पड़ा. दिल्ली और मुंबई में इन तीन महीनों में किराया 3 से 8 फीसदी तक गिर गया था और 1999 के अंत तक सबसे निचले स्तर पर आ गया. संघर्ष और उसके असर के बावजूद, मुंबई के कफ परेड में लक्जरी अपार्टमेंट उस समय भी 20,000-23200 रुपए प्रति वर्ग के अच्छे दाम पर बिक रहे थे.
(भाषा के इनपुट के साथ)