&format=webp&quality=medium)
महंगे कच्चे माल से प्रॉपर्टी मार्केट परेशान (प्रतीकात्मक इमेज/AI/Gemini)
देश के रियल एस्टेट सेक्टर के सामने इन दिनों निर्माण लागत में तेजी से हो रही बढ़ोतरी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है. डेवलपर्स का कहना है कि स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम, ग्लास और अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि कई जरूरी उत्पादों की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में घरों और फ्लैटों की कीमतों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है. इसी बीच सेक्टर से जुड़े कई संगठनों ने केंद्र सरकार से राहत उपायों की मांग की है.
डेवलपर्स के अनुसार वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, सप्लाई नेटवर्क पर बढ़ते दबाव और कच्चे माल की महंगाई ने निर्माण क्षेत्र की लागत को काफी बढ़ा दिया है. कई परियोजनाओं में बजट अनुमान प्रभावित हुए हैं, जबकि कुछ प्रोजेक्ट्स की प्रगति भी धीमी पड़ी है.
कई महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध नहीं
उद्योग जगत का कहना है कि श्रमिकों की कमी भी निर्माण गतिविधियों को प्रभावित कर रही है. कई क्षेत्रों में पर्याप्त मजदूर उपलब्ध नहीं होने से काम की गति प्रभावित हुई है. इस स्थिति से निपटने के लिए डेवलपर्स आधुनिक निर्माण तकनीकों और ऑटोमेशन आधारित प्रणालियों की ओर रुख कर रहे हैं.
निवेश, रोजगार पर भी पड़ेगा असर
रियल एस्टेट सेंटिमेंट इंडेक्स स्कोर (जनवरी-मार्च 2026)
| सेंटिमेंट का प्रकार | स्कोर (Q1 2026) | स्थिति | मुख्य कारण |
| मौजूदा सेंटिमेंट | 49 | निराशाजनक | भू-राजनीतिक अनिश्चितता, महंगाई और निर्माण लागत के जोखिमों के कारण सप्लाई और डिमांड पर भारी दबाव |
| भविष्य का सेंटिमेंट | 50 | न्यूट्रल | कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में वृद्धि, सप्लाई चेन में बाधा. |
सोर्स: नाइट फ्रैंक, NAREDCO सेंटिमेंट इंडेक्स
निर्माण सामग्रियों की कीमतों में लगातार तेजी
रियल एस्टेट परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम, ग्लास, ईंट, रेत और अन्य जरूरी सामग्रियों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. इनमें से कई उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों और आयात पर निर्भर हैं, इसलिए वैश्विक घटनाक्रम का असर सीधे इनकी कीमतों पर पड़ रहा है.
आपूर्ति व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
दुनिया के कई हिस्सों में जारी संघर्षों, परिवहन संबंधी समस्याओं और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण निर्माण सामग्री की सप्लाई प्रभावित हुई है. समय पर मटेरियल नहीं मिलने से परियोजनाओं की गति धीमी पड़ रही है और लागत बढ़ रही है.
श्रमिकों की उपलब्धता में कमी
निर्माण क्षेत्र में कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों की कमी महसूस की जा रही है. श्रमिकों की उपलब्धता घटने के कारण मजदूरी दरों में वृद्धि हुई है. इससे डेवलपर्स का परिचालन खर्च बढ़ा है और परियोजनाओं की कुल लागत पर असर पड़ा है.
विशेष निर्माण उत्पादों की बढ़ती लागत
वाटरप्रूफिंग कंपाउंड, सीलेंट, एडहेसिव, एडमिक्सचर और अन्य तकनीकी निर्माण उत्पादों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. कई उत्पाद पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं, जिससे निर्माण कार्य की लागत और परियोजनाओं के बजट पर अतिरिक्त दबाव बना है.
एक्सॉटिका हाउसिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश जैन के मुताबिक, “सिर्फ लागत बढ़ना ही चिंता का विषय नहीं है, बल्कि जरूरी मटेरियल की उपलब्धता भी बड़ी समस्या बन चुकी है. ऐसे हालात में नई परियोजनाओं की कीमतों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है.”
रेजिडेंशियल और फ्लैट की कीमतों पर असर