महंगाई से प्रॉपर्टी मार्केट बेहाल, कच्चे माल के दाम बढ़ने से प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक, बिल्डर्स की सरकार से गुहार

रियल एस्टेट सेक्टर में निर्माण लागत में तेजी से हो रही वृद्धि से आने वाले वक्त में फ्लैटों और घरों की कीमतों पर असर दिखाई दे सकता है. इस बीच कई संगठनों ने केंद्र सरकार से राहत उपायों की मांग की है.
महंगाई से प्रॉपर्टी मार्केट बेहाल, कच्चे माल के दाम बढ़ने से प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक, बिल्डर्स की सरकार से गुहार

महंगे कच्चे माल से प्रॉपर्टी मार्केट परेशान (प्रतीकात्मक इमेज/AI/Gemini)

देश के रियल एस्टेट सेक्टर के सामने इन दिनों निर्माण लागत में तेजी से हो रही बढ़ोतरी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है. डेवलपर्स का कहना है कि स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम, ग्लास और अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि कई जरूरी उत्पादों की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में घरों और फ्लैटों की कीमतों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है. इसी बीच सेक्टर से जुड़े कई संगठनों ने केंद्र सरकार से राहत उपायों की मांग की है.

महंगाई ने बढ़ाई निर्माण की लागत

डेवलपर्स के अनुसार वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, सप्लाई नेटवर्क पर बढ़ते दबाव और कच्चे माल की महंगाई ने निर्माण क्षेत्र की लागत को काफी बढ़ा दिया है. कई परियोजनाओं में बजट अनुमान प्रभावित हुए हैं, जबकि कुछ प्रोजेक्ट्स की प्रगति भी धीमी पड़ी है.

कई महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध नहीं

  • उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि केवल कीमतों में बढ़ोतरी ही समस्या नहीं है, बल्कि कई महत्वपूर्ण निर्माण सामग्रियां समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं. इससे परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित हो रही है और डेवलपर्स पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ रहा है.
  • रियल एस्टेट सेक्टर का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में नियामकीय स्तर पर कुछ राहत की जरूरत है. इसी को देखते हुए विभिन्न संगठनों ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के समक्ष रेरा के तहत परियोजनाओं को समयसीमा में राहत देने का प्रस्ताव रखा है.
  • क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के प्रेसिडेंट दिनेश गुप्ता ने बताया कि पिछले कुछ समय में स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम, ग्लास और अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमतों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है. इसके साथ ही कई जरूरी उत्पादों की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है, जिससे परियोजनाओं की लागत और टाइमलाइन दोनों पर दबाव बढ़ा है.
  • दिनेश गुप्ता के मुताबिक यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है। इसी को देखते हुए सेक्टर ने सरकार से रेरा के तहत परियोजनाओं को समयसीमा में आवश्यक राहत देने की मांग की है, ताकि डेवलपर्स और घर खरीदारों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें.

श्रमिकों की कमी से निर्माण गतिविधि प्रभावित

उद्योग जगत का कहना है कि श्रमिकों की कमी भी निर्माण गतिविधियों को प्रभावित कर रही है. कई क्षेत्रों में पर्याप्त मजदूर उपलब्ध नहीं होने से काम की गति प्रभावित हुई है. इस स्थिति से निपटने के लिए डेवलपर्स आधुनिक निर्माण तकनीकों और ऑटोमेशन आधारित प्रणालियों की ओर रुख कर रहे हैं.

निवेश, रोजगार पर भी पड़ेगा असर

  • कंस्ट्रक्शन केमिकल्स और तकनीकी उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने भी डेवलपर्स की चिंता बढ़ाई है. वाटरप्रूफिंग सामग्री, सीलेंट, एडमिक्सचर और अन्य उत्पाद महंगे होने के साथ-साथ कई बार सीमित मात्रा में उपलब्ध हो रहे हैं. इससे परियोजनाओं की लागत और गुणवत्ता प्रबंधन दोनों पर असर पड़ रहा है.
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ महीनों तक यही स्थिति बनी रहती है तो इसका असर केवल निर्माण उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा. हाउसिंग सेक्टर की लागत बढ़ने से निवेश, रोजगार और संबंधित उद्योगों पर भी प्रभाव पड़ सकता है.
  • इसी बीच हाल ही में जारी नाइट फ्रैंक-नारेडको रियल एस्टेट सेंटिमेंट इंडेक्स में भी सेक्टर की कारोबारी भावना में नरमी दर्ज की गई है, जो उद्योग जगत की बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है.

रियल एस्टेट सेंटिमेंट इंडेक्स स्कोर (जनवरी-मार्च 2026)

सेंटिमेंट का प्रकारस्कोर (Q1 2026)स्थितिमुख्य कारण
मौजूदा सेंटिमेंट49निराशाजनकभू-राजनीतिक अनिश्चितता, महंगाई और निर्माण लागत के जोखिमों के कारण सप्लाई और डिमांड पर भारी दबाव
भविष्य का सेंटिमेंट50न्यूट्रलकंस्ट्रक्शन कॉस्ट में वृद्धि, सप्लाई चेन में बाधा.

सोर्स: नाइट फ्रैंक, NAREDCO सेंटिमेंट इंडेक्स

निर्माण लागत बढ़ने के पीछे प्रमुख वजहें:

निर्माण सामग्रियों की कीमतों में लगातार तेजी

रियल एस्टेट परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम, ग्लास, ईंट, रेत और अन्य जरूरी सामग्रियों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. इनमें से कई उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों और आयात पर निर्भर हैं, इसलिए वैश्विक घटनाक्रम का असर सीधे इनकी कीमतों पर पड़ रहा है.

आपूर्ति व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

दुनिया के कई हिस्सों में जारी संघर्षों, परिवहन संबंधी समस्याओं और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण निर्माण सामग्री की सप्लाई प्रभावित हुई है. समय पर मटेरियल नहीं मिलने से परियोजनाओं की गति धीमी पड़ रही है और लागत बढ़ रही है.

श्रमिकों की उपलब्धता में कमी

निर्माण क्षेत्र में कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों की कमी महसूस की जा रही है. श्रमिकों की उपलब्धता घटने के कारण मजदूरी दरों में वृद्धि हुई है. इससे डेवलपर्स का परिचालन खर्च बढ़ा है और परियोजनाओं की कुल लागत पर असर पड़ा है.

विशेष निर्माण उत्पादों की बढ़ती लागत

वाटरप्रूफिंग कंपाउंड, सीलेंट, एडहेसिव, एडमिक्सचर और अन्य तकनीकी निर्माण उत्पादों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. कई उत्पाद पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं, जिससे निर्माण कार्य की लागत और परियोजनाओं के बजट पर अतिरिक्त दबाव बना है.

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मटेरियल की उपलब्धता बड़ी समस्या

एक्सॉटिका हाउसिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश जैन के मुताबिक, “सिर्फ लागत बढ़ना ही चिंता का विषय नहीं है, बल्कि जरूरी मटेरियल की उपलब्धता भी बड़ी समस्या बन चुकी है. ऐसे हालात में नई परियोजनाओं की कीमतों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है.”

रेजिडेंशियल और फ्लैट की कीमतों पर असर

  • आरजी ग्रुप के निदेशक हिमांशु गर्ग के मुताबिक“निर्माण लागत में लगातार बढ़ोतरी डेवलपर्स के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. अब तक अधिकांश कंपनियां अतिरिक्त लागत का बड़ा हिस्सा स्वयं वहन कर रही थीं, लेकिन यदि कच्चे माल और श्रम की कीमतों में वृद्धि लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका असर अंततः फ्लैटों और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है.”
  • केबी ग्रुप के फाउंडर राकेश सिंघल के मुताबिक, " रियल एस्टेट सेक्टर आज ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां डेवलपर्स को टेक्नोलॉजी, बेहतर प्लानिंग और वैकल्पिक संसाधनों का सहारा लेना पड़ रहा है. हालांकि संगठित कंपनियां इस चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं, लेकिन यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में घर ख़रीदार को अधिक कीमत का सामने करना पढ़ सकता है.
  • विजन बिजनेस पार्क के फाउंडर अतुल विक्रम सिंह के मुताबिक, “रियल एस्टेट मार्केट में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन यदि सप्लाई चेन की चुनौतियां और श्रमिकों की कमी बनी रहती है तो डेवलपर्स के लिए मौजूदा कीमतों पर प्रोजेक्ट पूरा करना मुश्किल होगा, जिससे संपत्ति के दाम बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.”
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