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भारत का ऑफिस स्पेस मार्केट इस साल तेजी से बढ़ रहा है. साल 2025 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में ऑफिस स्पेस लीजिंग यानी किराए पर लेने का आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 35 प्रतिशत ज्यादा होकर 16.3 मिलियन स्क्वायर फीट पहुंच गया. यह साफ इशारा करता है कि कॉर्पोरेट जगत में ऑफिस की डिमांड लगातार बढ़ रही है.
रियल एस्टेट सर्विस फर्म कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल के पहले नौ महीनों (जनवरी-सितंबर 2025) में ऑफिस स्पेस की नेट लीजिंग 44.3 मिलियन स्क्वायर फीट रही. यह आंकड़ा 2024 में हुई कुल लीजिंग का 87 प्रतिशत है. यानी इस साल अभी एक तिमाही बाकी है और बाजार पिछले साल के रिकॉर्ड को पार करने की राह पर है.
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो इस साल ऑफिस स्पेस लीजिंग पिछले साल के 50.7 मिलियन स्क्वायर फीट के रिकॉर्ड को तोड़ देगी. इसका मतलब है कि 2025 ऑफिस स्पेस मार्केट के लिए रिकॉर्ड तोड़ साल साबित हो सकता है.
देश के बड़े शहरों में ऑफिस स्पेस लीजिंग के मामले में दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु टॉप पर हैं. दिल्ली-एनसीआर में कुल 3.8 मिलियन स्क्वायर फीट. बेंगलुरु में 3.5 मिलियन स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीजिंग दर्ज हुई. इससे साफ है कि बड़ी कंपनियां और स्टार्टअप्स इन शहरों में अपने ऑफिस विस्तार पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिस स्पेस लीजिंग में कई सेक्टर्स की अहम भूमिका रही-
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) - 32%
आईटी-बीपीएम सेक्टर - 31%
इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग - 18%
बीएफएसआई (बैंकिंग, फाइनेंस, सर्विस और इंश्योरेंस) - 14%
फ्लेक्सिबल वर्क स्पेस ऑपरेटर्स - 11%
इन आंकड़ों से यह साफ है कि सबसे ज्यादा डिमांड आईटी और ग्लोबल कंपनियों से आ रही है, जबकि बैंकिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी पीछे नहीं हैं.
कुशमैन एंड वेकफील्ड के सीईओ अंशुल जैन का कहना है कि अब बाजार विस्तार के फेज में प्रवेश कर चुका है. तीसरी तिमाही में हुई लीजिंग का 80 प्रतिशत हिस्सा नए अधिग्रहणों से जुड़ा है. उन्होंने बताया कि इस दौरान जो नई संपत्तियां लीज पर दी गईं, उनमें से लगभग 80 प्रतिशत ग्रेड-ए+ कैटेगरी की थीं. इसका मतलब है कि कंपनियां अब प्रीमियम और भविष्य के लिए तैयार ऑफिस चुन रही हैं. यह रुझान दिखाता है कि बड़ी कंपनियां कर्मचारियों को बेहतर और आधुनिक कार्यस्थल उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रही हैं.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फ्रेश लीजिंग (नई डील्स) में तिमाही आधार पर 21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई है. हालांकि सालाना आधार पर इसमें मामूली ही सुधार हुआ है. इसका संकेत है कि कंपनियां धीरे-धीरे अपने ऑफिस स्पेस को बढ़ा रही हैं और इस ट्रेंड का असर आने वाले महीनों में और साफ नजर आएगा.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग की कई वजहें हैं. जैसे- कंपनियों का बिजनेस एक्सपेंशन, ग्लोबल कंपनियों का भारत में निवेश, हाइब्रिड वर्क कल्चर के साथ-साथ बड़े ऑफिस की जरूरत और प्रीमियम लोकेशन और मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर झुकाव. ये सभी फैक्टर मिलकर ऑफिस स्पेस मार्केट को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं.
ऑफिस स्पेस की इस तेजी का फायदा रियल एस्टेट डेवलपर्स और निवेशकों दोनों को मिलेगा. प्रीमियम ऑफिस की डिमांड बढ़ने से डेवलपर्स को नई प्रोजेक्ट्स शुरू करने का मौका मिलेगा. वहीं निवेशकों को भी इस सेगमेंट में बेहतर रिटर्न की उम्मीद है.
कुल मिलाकर, भारतीय ऑफिस स्पेस मार्केट जबरदस्त ग्रोथ कर रहा है. तीसरी तिमाही में 35% की तेजी और नौ महीनों में ही पिछले साल के मुकाबले 87% आंकड़े तक पहुंच जाना, यह बताता है कि आने वाला समय इस सेक्टर के लिए बहुत मजबूत रहने वाला है. अगर यही रफ्तार बनी रही तो 2025 में ऑफिस स्पेस लीजिंग एक नया रिकॉर्ड बना देगी.
Q1. 2025 की तीसरी तिमाही में ऑफिस स्पेस लीजिंग कितनी रही?
A1. 16.3 मिलियन स्क्वायर फीट, जो सालाना आधार पर 35% ज्यादा है.
Q2. ऑफिस स्पेस लीजिंग में कौन से शहर सबसे आगे रहे?
A2. दिल्ली-एनसीआर (3.8 मिलियन स्क्वायर फीट) और बेंगलुरु (3.5 मिलियन स्क्वायर फीट).
Q3. किन सेक्टर्स से सबसे ज्यादा डिमांड आई?
A3. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC), आईटी-बीपीएम, इंजीनियरिंग-मैन्युफैक्चरिंग और BFSI.
Q4. इस रिपोर्ट को किसने जारी किया?
A4. रियल एस्टेट सर्विस फर्म कुशमैन एंड वेकफील्ड ने.
Q5. क्या 2025 में नया रिकॉर्ड बनेगा?
A5. हां, एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2025 लीजिंग पिछले साल के 50.7 मिलियन स्क्वायर फीट के रिकॉर्ड को पार कर देगा.