ब्रिटिश फाइनेंस कंपनियों ने भारत में डाला डेरा, मोटी सैलरी वाले किरायेदारों की होगी भरमार, बंपर रेंट मिलना तय

भारत और यूके के बीच FTA के बाद कई बड़ी कंपनियां भारत में ग्लोबल कैपिसिटी सेंटर्स शुरू कर सकती हैं. खासकर बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर BFSI की कंपनियों का लीजिंग में 29 फीसदी योगदान है.
ब्रिटिश फाइनेंस कंपनियों ने भारत में डाला डेरा, मोटी सैलरी वाले किरायेदारों की होगी भरमार, बंपर रेंट मिलना तय

GCCs in India (Representative Image: AI Generated)

भारत और इंग्लैंड के बीच साल 2025 में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन हुआ था. यह FTA अप्रैल 2026 को लागू हो जाएगा. इस FTA का असर भारत के रियल एस्टेट खासकर ऑफिस स्पेस मार्केट को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है. रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म Colliers की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की कंपनियों ने बड़े पैमाने पर भारत में काम करना शुरू कर दिया है. खासकर बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर (BFSI) में सबसे ज्यादा ऑफिस स्पेस को किराए पर लिया जा रहा है.

BFSI सेक्टर की हिस्सेदारी 29%

Collies की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन की कुल ग्लोबल कैपिसिटी सेंटर्स (GCC) ऑफिस लीजिंग में अकेले BFSI सेक्टर की हिस्सेदारी 29 फीसदी है.

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इनोवेशन, रिसर्च पर फोकस

  • रिपोर्ट के मुताबिक ये विदेशी कंपनियां न केवल सस्ते बैक-ऑफिस काम के लिए भारत नहीं आ रही हैं. इनका फोकस इनोवेशन, रिसर्च और हाई वैल्यू डोमेन-इंटेंसिव ऑपरेशन्स पर है.
  • हाई वैल्यू काम के लिए कंपनियों को अच्छे और स्किल्ड टैलेंट की काफी ज्यादा जरूरत होती है. इसी कारण कंपनियां मोटी सैलरी वाले प्रोफेशनल्स को नौकरी देती हैं.
  • हाई सैलेरी वाले प्रोफेशनल्स प्रीमियम रेजिडेंशियल इलाकों में ज्यादा किराया देने में कम संकोच नहीं करते हैं. इससे स्थानीय मकान मालिकों के पास कमाई का अच्छा मौका है.

GCCs

प्रोफेशनल्स, लीगल को मिल रहा बढ़ावा

भारत और यूके के बीच चल रही ट्रेड डील्स से BFSI के अलावा प्रोफेशनल्स, लीगल और पर्यावरण सर्विसेज के बिजनेस को भी बढ़ावा मिल रहा है.

टेक्नोलॉजी का 39% हिस्सा

  • रिपोर्ट के मुताबिक यूके की फाइनेंस और कंसल्टिंग क्षेत्र की कंपनियों का भारत में आना बेहद आसान हो गया है.
  • साल 2026 तक अकेले BFSI और इंजीनियरिंग और मैन्यूफैक्चरिंग फर्में मिलकर 40 से 50 फीसदी स्पेस लीजिंग का योगदान दे रहे हैं.
  • कुल GCCs में कंसल्टिंग का हिस्सा 6 फीसदी, टेक्नोलॉजी का 39 फीसदी, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग का 17 फीसदी योगदान है.

यूके और दूसरे GCCs की सेक्टर-वार लीजिंग हिस्सेदारी

(2020–2025)

सेक्टरयूके का शेयरकुल GCCs का शेयर
BFSI29%20%
कंसल्टिंग23%6%
टेक्नोलॉजी18%39%
इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग3%17%
हेल्थकेयर6%7%

50% हिस्सा अकेले GCCs से

Colliers की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले कुछ साल में भारत के टॉप 7 शहरों में कुल ऑफिस स्पेस डिमांड का 50 फीसदी हिस्सा अकेले GCCs से आएगा. हर साल करीब 35 से 40 मिलियन वर्ग फुट (msf) ग्रेड ए ऑफिस स्पेस की लीजिंग होने की उम्मीद है. हालांकि, अभी तक 70 फीसदी लीजिंग अमेरिकी कंपनियों ने ही की है लेकिन, FTA को बाद अब इंग्लैंड और यूरोपियन यूनियन की हिस्सेदारी 8 से 10 फीसदी के साथ तेजी से बढ़ रही है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल: भारत और ब्रिटेन के बीच FTA से रियल एस्टेट पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

जवाब: भारत और ब्रिटेन के बीच FTA के बाद कई बड़ी कंपनियां ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स (GCCs) बना रही है.

सवाल: भारत में ऑफिस स्पेस की सालाना कितनी मांग होने जा रही है?

जवाब: आने वाले कुछ वक्त में सालाना 35 से 40 मिलियन वर्ग फुट ग्रेड ए ऑफिस स्पेस की मांग होने की उम्मीद जताई जा रही है.

सवाल: यूके की कंपनियां किस सेक्टर में सबसे ज्यादा ऑफिस स्पेस ले रही हैं?

जवाब: ब्रिटेन बैंकिंग एंड फाइनेंस (BFSI) सेक्टर और कंसल्टिंग सेक्टर की कंपनियां भारत में ऑफिस स्पेस खोल रही है.

सवाल: देश की कुल ऑफिस लीजिंग में GCCs का हिस्सा कितने फीसदी है?

जवाब: 2020 से अब तक कुल 310 मिलियन वर्ग फुट लीजिंग में से करीब 38 फीसदी हिस्सा GCCs का है.

सवाल: कौन से सेक्टर्स ऑफिस लीजिंग में सबसे आगे है?

जवाब: टेक्नोलॉजी के अलावा BFSI और इंजीनियरिंग/मैन्युफैक्चरिंग फर्म 2026 में 40 से 50 फीसदी स्पेस लीजिंग कर सकती हैं.

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