घर उसी जगह खरीदें जहां पास हो मॉल और ऑफिस? जानिए प्रॉपर्टी से मोटा मुनाफा कमाने का ये नया फॉर्मूला

घर खरीदते वक्त लोकेशन के अलावा आस-पास की सुविधाएं भी काफी महत्वपूर्ण होती है. जानिए क्या मॉल के पास होने से प्रॉपर्टी की कीमतों में हो सकती है बढ़ोतरी.
घर उसी जगह खरीदें जहां पास हो मॉल और ऑफिस? जानिए प्रॉपर्टी से मोटा मुनाफा कमाने का ये नया फॉर्मूला

घर खरीदते वक्त जिन पहलुओं पर सोचा जाता है उनमें लोकेशन सबसे महत्वपूर्ण है. लेकिन, अब घर खरीदार केवल लोकेशन या कनेक्टिविटी ही नहीं, बल्कि आसपास में मौजूद सुविधाओं पर भी ध्यान दे रहे हैं. मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों में इस ट्रेड ने जोर पकड़ा है जहां पर घर खरीदार ऐसे प्रॉपर्टी को पसंद कर रहे हैं, जिनके पास ऑफिस कॉम्प्लेक्स, शॉपिंग मॉल और एंटरटेनमेंट के सभी साधन मौजूद हो. ऐसे में सवाल उठता है कि मॉल के पास प्रॉपर्टी लेने से लाइफस्टाइल तो बेहतर होती है साथ ही इससे प्रॉपर्टी कीमत भी बढ़ती है?

बदल रहा है शॉपिंग मॉल का स्वरूप

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनॉरॉक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में शॉपिंग मॉल का स्वरूप बदल रहा है. अब केवल छोटे, बिखरे हुए मॉल्स की जगह बड़े, संगठित और बेहतर अनुभव देने वाले इंस्टीट्यूशनल ग्रेड मॉल्स ला रहे हैं.

35% इंस्टीट्यूशनल मॉल्स

  • देश के करीब 650 मॉल्स में से 30 से 35 फीसदी अब इसी कैटगरी में आते हैं. मॉल सिर्फ शॉपिंग डेस्टिनेशन नहीं हैं, बल्कि फूड कोर्ट, सिनेमा, गेमिंग जोन और दूसरे एंटरटेनमेंट हब बन गए हैं.
  • बड़े मॉल्स के पास रहने का मतलब है कि शॉपिंग, डाइनिंग और एंटरटेनमेंट के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. मुंबई के बोरीवाली में स्काई सिटी मॉल जैसे बड़े रिटेल डेस्टिनेशन के खुलने के आस-पास के रेजिडेंशियल एरिया के निवासियों को सुविधा हुई.

क्या बढ़ती है प्रॉपर्टी की कीमत

रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को लेकर एक ट्रेंड आया है कि जिसके पास अच्छी कमर्शियल सुविधाएं होती हैं, उनकी मांग में इजाफा होता है. इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है.

प्रोजेक्ट्स की अच्छी डिमांड

  • ओबरॉय रियल्टीज की हालिया इनवेस्टर प्रेजेंटेशन को देखें तो बोरीवली के स्काई सिटी प्रोजेक्ट, जिसके पास मॉल है, यहां रेजिडेंशियल यूनिट्स की औसत बिक्री दर 50,000 रुपए प्रति वर्ग फुट से ज्यादा दर्ज की गई है.
  • इसी तरह गोरेगांव में कॉमरज ऑफिस टावर्स और ओबरॉय मॉल के पास स्थित रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की भी अच्छी डिमांड देखी गई है.
प्रमुख कमर्शियल प्रॉपर्टीज

ऑक्यूपेंसी रेट Q2FY26

ओबेरॉय मॉल (गोरेगांव)99%
स्काई सिटी मॉल (बोरीवली)53%
कॉमरज़ III (ऑफिस, गोरेगांव)87%

5 से 8% सालाना किराया

एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेड ए मॉल्स में किराया लगातार सालाना 5 से 8 फीसदी सालाना बढ़ रहा है, जबकि ग्रेड बी और सी मॉल्स में यह स्थिर है या घट रहा है. इससे साफ जाहिर है कि क्वालिटी कमर्शियल स्पेस की मांग बढ़ रही है, जिसका पॉजीटिव असर पास की रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज पर भी पड़ सकता है. हालांकि, इस बात को ध्यान देना जरूरी है कि प्रॉपर्टी की कीमतें कई कारणों से भी बढ़ती और घटती है. लेकिन, मॉल और ऑफिस कॉम्प्लेक्स पास होना जरूर एक प्लस प्वाइंट है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल: क्या मॉल या ऑफिस के पास घर खरीदना महंगा होता है?

जवाब: आमतौर पर ऐसी लोकेशन पर प्रीमियम प्रोजेक्ट्स होते हैं जिनकी कीमत औसत से ज्यादा हो सकती. लेकिन प्रोजेक्ट और बिल्डर पर भी निर्भर करता है.

सवाल: मॉल के पास रहने के मुख्य फायदे क्या हैं?

जवाब: शॉपिंग, मनोरंजन, रेस्टोरेंट आदि की आसान पहुंच, समय की बचत और बेहतर सामाजिक जीवन कुछ मुख्य फायदे हैं.

सवाल: भारत में मॉल का ट्रेंड कैसे बदल रहा है?

जवाब:एनारॉक के अनुसार, अब बड़े, संगठित और बेहतर अनुभव वाले 'इंस्टीट्यूशनल ग्रेड' मॉल्स का चलन बढ़ रहा है.

सवाल: क्या ऑफिस के पास घर लेने से प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ती है?

जवाब: अच्छे ऑफिस कॉम्प्लेक्स के पास होने से कनेक्टिविटी और किराये की मांग बढ़ सकती है, जिससे प्रॉपर्टी की वैल्यू पर सकारात्मक असर पड़ सकता है.

सवाल: 'इंस्टीट्यूशनल ग्रेड' मॉल क्या होते हैं?

जवाब: ये बड़े, पेशेवर रूप से प्रबंधित मॉल होते हैं जिन्हें बड़े निवेश समूह (जैसे ब्लैकस्टोन, फीनिक्स मिल्स आदि) चलाते हैं.

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