ऑफिस हो तो ऐसा! भारत में मची 'ग्रीन बिल्डिंग' बनाने की होड़, 65% की छलांग देख सभी हैरान

देश के टॉप 7 शहरों में ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस में 6 वर्षों में 65% की बढ़ोतरी हुई है. कॉर्पोरेट सेक्टर में पर्यावरण-अनुकूल इमारतों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे भारत में सस्टेनेबल रियल एस्टेट को बढ़ावा मिला है.
ऑफिस हो तो ऐसा! भारत में मची 'ग्रीन बिल्डिंग' बनाने की होड़, 65% की छलांग देख सभी हैरान

भारत में पर्यावरणीय स्थिरता को लेकर कॉर्पोरेट जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण देश के 7 प्रमुख शहरों में ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस में बीते छह वर्षों (2019 से 2025 की पहली छमाही तक) के दौरान करीब 65 प्रतिशत की ग्रोथ है. यह जानकारी रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है. यह इजाफा विशेष रूप से वैश्विक कंपनियों की ग्रीन बिल्डिंग्स की मांग और सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता देने का नतीजा है.

बेंगलुरु बना ग्रीन ऑफिस स्पेस का हब

इस रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली छमाही तक भारत के टॉप 7 शहरों में कुल 865 मिलियन वर्ग फुट ग्रेड A ऑफिस स्टॉक में से 530 मिलियन वर्ग फुट ग्रीन सर्टिफाइड होगा, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 322 मिलियन वर्ग फुट था.

किन शहरों में बेंगलुरु आगे

इन 7 शहरों में सबसे आगे है बेंगलुरु, जिसकी कुल ग्रीन सर्टिफाइड इन्वेंट्री 163 मिलियन वर्ग फुट (31%) है. इसके बाद एनसीआर (दिल्ली-एनसीआर) है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 97 मिलियन वर्ग फुट (18%) है. हैदराबाद 16% के साथ तीसरे स्थान पर है। वहीं कोलकाता सबसे पीछे है, जहां ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस की हिस्सेदारी मात्र 3% है.

ग्रीन सर्टिफिकेशन की मांग क्यों बढ़ी?

एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी के मुताबिक, “ग्रीन बिल्डिंग्स की मांग बढ़ने के पीछे दो मुख्य कारण हैं – पहला, सरकार की ओर से सस्टेनेबिलिटी को लेकर किए गए प्रयास और दूसरा, कंपनियों की अपनी नीति में बदलाव.”

पुरी ने यह भी बताया कि रेसिडेंशियल रियल एस्टेट की तुलना में .कॉमर्शियल रियल एस्टेट में सस्टेनेबिलिटी की मांग कहीं अधिक है. खासतौर पर बहुराष्ट्रीय कंपनियां और ग्लोबल कैप्टिव सेंटर (GCCs) अब केवल LEED, IGBC या GRIHA सर्टिफाइड ग्रेड A ऑफिस स्पेस को प्राथमिकता दे रही हैं.

भारत में हाउसिंग सेक्टर पीछे क्यों?

जहां कॉर्पोरेट सेक्टर में ग्रीन बिल्डिंग्स तेजी से अपनाई जा रही हैं, वहीं हाउसिंग सेक्टर अब भी पीछे है. इसकी वजह यह है कि आवासीय क्षेत्र में अब तक ऐसी कोई अनिवार्य नीति या प्रोत्साहन नहीं आया है, जिससे ग्रीन हाउसिंग को बढ़ावा मिल सके.

क्या है निष्कर्ष?

रिपोर्ट इस बात को स्पष्ट करती है कि भारत में वाणिज्यिक अचल संपत्ति (commercial real estate) सस्टेनेबिलिटी को लेकर अग्रणी भूमिका निभा रही है.यानी कि आने वाले समय में ग्रीन ऑफिस स्पेस की मांग और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा, बल्कि कंपनियों को भी बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा.

FAQ

Q1. भारत में ग्रीन ऑफिस स्पेस की ग्रोथ कितनी हुई है?
A1. एनारॉक की रिपोर्ट के अनुसार, देश के टॉप 7 शहरों में ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस में 2019 से 2025 तक 65% की वृद्धि दर्ज की गई है.

Q2. सबसे अधिक ग्रीन ऑफिस स्पेस किस शहर में है?
A2. बेंगलुरु में सबसे ज्यादा 163 मिलियन वर्ग फुट (31%) ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस है, जो टॉप 7 शहरों में सबसे अधिक है.

Q3. ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस का क्या मतलब है?
A3. ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस वे भवन हैं जो LEED, IGBC या GRIHA जैसी संस्थाओं द्वारा पर्यावरण अनुकूल निर्माण के लिए प्रमाणित होते हैं.

Q4. किस सेक्टर में ग्रीन बिल्डिंग्स की मांग अधिक है?
A4. भारत में कॉमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रीन बिल्डिंग्स की मांग सबसे अधिक है, खासकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों और GCCs में.

Q5. ग्रीन हाउसिंग की तुलना में ग्रीन ऑफिस स्पेस क्यों तेजी से बढ़ रहा है?
A5. क्योंकि कॉर्पोरेट्स सस्टेनेबिलिटी पर फोकस कर रहे हैं और सरकार की नीतियों ने भी ग्रीन ऑफिस स्पेस को बढ़ावा दिया है, जबकि हाउसिंग सेक्टर में ऐसी मजबूरी या जागरूकता अभी कम है.

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