&format=webp&quality=medium)
भारत में अभी तक कॉर्पोरेट ऑफिस का मतलब केवल बेंगलुरु, मुंबई या दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े मेट्रो शहर होते थे, लेकिन अब यह नक्शा तेजी से बदल रहा है. कोलियर्स की ताजा रिपोर्ट फ्लेक्स इंडिया के मुताबिक, देश की बड़ी कंपनियां और फ्लेक्स स्पेस ऑपरेटर्स अब टियर-2 शहरों की तरफ तेजी से रुख कर रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण भारी-भरकम किराये से बचत है. इसके अलावा हाइब्रिड वर्क कल्चर और हब एंड स्पोक मॉडल के चलते अब ऑफिस कर्मचारियों के घर के नजदीक आ रहे हैं.
कोलियर्स की रिपोर्ट फ्लेक्स इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रो सिटीज के मुकाबले जयपुर, इंदौर और कोच्चि जैसे टियर-2 शहरों में ऑफिस का किराया 30 फीसदी से 35% तक सस्ता है.
किराए में बड़ा अंतर
| शहर की श्रेणी | औसत किराया (प्रति सीट/महीना) | बचत का मौका |
| टियर 1 शहर (बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली आदि) | INR 13,500 - 15,000 | - |
| टियर II शहर (जयपुर, इंदौर, कोच्चि आदि) | INR 9,000 - 11,000 | 30-35% सस्ता |
कोलियर्स की रिपोर्ट के मुताबिक फ्लेक्स ऑपरेटर्स अब केवल मेट्रो सिटीज तक सीमित नहीं है. रीजनल ऑफिस, डिसेंट्रलाइज्ड वर्क मॉडल और स्टार्टअप्स की बढ़ती मांग के कारण ये शहर नए बिजनेस हब बनकर उभर रहे हैं.
फ्लेक्स स्पेस का विस्तार
Colliers की रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य में हर 10 में से 1 ऑफिस फ्लेक्स स्पेस होगा. रियल एस्टेट के नियम के मुताबिक, जहां ऑफिस और रोजगार बढ़ता है, वहां घरों की मांग भी बढ़ती है. यदि आप निवेशक या घर खरीदार हैं, तो इन टियर 2 शहरों के कमर्शियल हब के आसपास प्रॉपर्टी लेना फायदेमंद हो सकताहै. ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग से इन इलाकों में रेंटल इनकम और प्रॉपर्टी के दाम आने वाले वक्त में बढ़ सकते हैं.
सवाल: कंपनियां छोटे शहरों में क्यों जा रही हैं?
जवाब: किराया मेट्रो शहरों के मुकाबले 30-35% कम है, जिससे कंपनियों की भारी बचत होती है.
सवाल: कौन से शहर सबसे ज्यादा पॉपुलर हो रहे हैं?
जवाब: जयपुर, इंदौर, चंडीगढ़, कोच्चि, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे शहर कंपनियों की पहली पसंद बन रहे हैं.
सवाल: फ्लेक्स स्पेस (Flex Space) क्या होता है?
जवाब: ये पूरी तरह से फर्निश्ड और सुविधाओं से लैस ऑफिस होते हैं, जिन्हें कंपनियां बिना सेटअप किए तुरंत किराए पर ले सकती हैं.
सवाल: क्या इससे छोटे शहरों में प्रॉपर्टी के दाम बढ़ेंगे?
जवाब: ऑफिस और रोजगार बढ़ने से आसपास के इलाकों में घरों की मांग और कीमतें दोनों बढ़ने की संभावना है.
सवाल: हब एंड स्पोक (Hub and Spoke) मॉडल क्या है?
जवाब: इसमें मुख्य ऑफिस (Hub) के साथ कर्मचारियों की सुविधा के लिए उनके घर के पास छोटे ऑफिस (Spoke) खोले जाते हैं.