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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल ऑफिस ने गोवा में एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया. ईडी ने कार्रवाई करते हुए 5 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैली 19 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. ये संपत्तियां अंजुना, असगांव, उकासिम जैसे गोवा के प्रीमियम इलाकों में स्थित हैं और इनकी कुल अनुमानित कीमत 1,268.63 करोड़ रुपए है. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है.
ईडी के मुताबिक, शिवशंकर मायेकर के नेतृत्व वाले एक समूह द्वारा अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की गई थी, जिसमें कई प्रकार के जाली भूमि स्वामित्व दस्तावेजों का उपयोग किया गया था.
FIR से शुरू हुई थी जांच
ईडी ने कहा कि आरोपियों ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का उपयोग करके अपने नाम पर भूमि का फर्जी दाखिल-खारिज करवा लिया। इसके कुछ हिस्से को तीसरे पक्ष को बेचकर अपराध से धन अर्जित किया.
मायेकर को बताया मुख्य साजिशकर्ता
अवैध भूमि अधिग्रहण से जुड़ी FIR
ईडी द्वारा संपत्तियों से संबंधित जानकारी पीएमएलए के अंतर-एजेंसी समन्वय तंत्र के तहत संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा की जा रही है. जांच में मायेकर के नेतृत्व वाले समूह द्वारा कथित रूप से अपनाई गई एक व्यवस्थित कार्यप्रणाली का खुलासा हुआ है, जिसमें असुरक्षित या कम मूल्यांकित भूमि के टुकड़ों की पहचान करना, जाली कागजात तैयार करके इन जमीनों को खुद से संबंधित लोगों के नाम पर परिवर्तित करके अपराध से अतिरिक्त आय अर्जित करके तीसरे पक्ष को बेचने का खुलासा हुआ है.
सवाल: ईडी ने गोवा में हाल ही में क्या बड़ी कार्रवाई की है?
जवाब: ईडी ने गोवा में एक मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 1,268.63 करोड़ रुपये की 19 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (जब्त) किया है.
सवाल: जब्त की गई संपत्तियां गोवा में कहां स्थित हैं?
जवाब: ये संपत्तियां गोवा के प्रीमियम इलाकों जैसे अंजुना, असगांव और उकासिम में स्थित हैं और 5 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैली हैं.
सवाल: इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता किसे बताया गया है?
जवाब: ईडी की जांच में शिवशंकर मायेकर को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है, जिसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
सवाल: आरोपियों ने जमीनों पर अवैध कब्जा कैसे किया?
जवाब: आरोपियों ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके जमीन अपने और रिश्तेदारों के नाम करवाई और फिर उसे तीसरे पक्ष को बेचकर अवैध कमाई की.
सवाल: ईडी की यह कार्रवाई किस कानून के तहत की गई है?
जवाब: यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है.