लोढ़ा डेवलपर्स केस में ईडी का बड़ा एक्शन! 271 करोड़ की संपत्तियां जब्त, सलाखों के पीछे पहुंचे मास्टरमाइंड

ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस ने राजेंद्र नरपत मल लोढ़ा और उनके सहयोगियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 271.48 करोड़ रुपये की जमीनें जब्त की हैं. यह मामला लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड के साथ धोखाधड़ी और फंड की हेराफेरी से जुड़ा है.
लोढ़ा डेवलपर्स केस में ईडी का बड़ा एक्शन! 271 करोड़ की संपत्तियां जब्त, सलाखों के पीछे पहुंचे मास्टरमाइंड

लोढ़ा डेवलपर्स केस में ईडी का बड़ा एक्शन!

मुंबई की चकाचौंध के बीच प्रॉपर्टी बाजार से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया है. प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 271.48 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है. यह पूरा मामला लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड (Lodha Developers Ltd) के साथ हुई करोड़ों की धोखाधड़ी से जुड़ा है.

इस कहानी के केंद्र में हैं राजेंद्र नरपत मल लोढ़ा, जो कभी इस प्रतिष्ठित कंपनी का हिस्सा हुआ करते थे. लेकिन जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं. पद का दुरुपयोग, फर्जी कागजात और कंपनी के फंड की हेराफेरी जैसे गंभीर आरोपों ने राजेंद्र लोढ़ा को अब मुश्किलों के घेरे में डाल दिया है. चलिए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है और ईडी ने किन संपत्तियों पर अपना शिकंजा कसा है.

पनवेल और शाहापुर की जमीनों पर चला सरकारी डंडा

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26 मार्च 2026 को ईडी ने जो संपत्तियां जब्त की हैं, उनमें महाराष्ट्र के पनवेल और शाहापुर तालुका में स्थित बड़े जमीन के टुकड़े शामिल हैं. प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई का मकसद उन संपत्तियों को फ्रीज करना है जो धोखाधड़ी के पैसों से बनाई गई हैं. ईडी की जांच में यह साफ हुआ कि आरोपी राजेंद्र लोढ़ा और उनके सहयोगियों ने मिलकर कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया और खुद की संपत्ति खड़ी कर ली.

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फर्जी दस्तावेजों और सस्ते सौदों का खेल

इस पूरे घोटाले की शुरुआत मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी. जांच में खुलासा हुआ कि राजेंद्र लोढ़ा ने कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की जानकारी के बिना कई जमीनों और संपत्तियों को बहुत ही कम दाम पर अपने करीबी लोगों और डमी कंपनियों को ट्रांसफर कर दिया.

इतना ही नहीं, जांच में यह भी पता चला कि जमीन खरीदने के नाम पर फर्जी 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' यानी एमओयू तैयार किए गए. इसमें जमीन की कीमतों को बहुत ज्यादा बढ़ाकर दिखाया जाता था. इसके बाद, बढ़े हुए दाम का हिस्सा नकद के रूप में वापस ले लिया जाता था, जिसे बाद में राजेंद्र लोढ़ा और उनके साथियों ने आपस में बांट लिया. यह सब कुछ फर्जी दस्तावेजों के सहारे किया गया ताकि कंपनी के खाते में सब कुछ सही दिखे.

अब तक करीब 360 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त

यह पहली बार नहीं है जब इस केस में ईडी ने एक्शन लिया है. इससे पहले 12 नवंबर 2025 को मुंबई और आसपास के 14 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें करीब 88 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी. अगर आज की कार्रवाई को जोड़ लिया जाए, तो इस पूरे मामले में अब तक कुल 359.48 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच या जब्त की जा चुकी है.

आरोपी राजेंद्र लोढ़ा को ईडी ने 12 फरवरी 2026 को ही गिरफ्तार कर लिया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत यानी जेल में हैं. पुलिस और ईडी की टीमें अब उन कड़ियों को जोड़ रही हैं जिनसे यह पता चल सके कि क्या इसमें और भी बड़े नाम शामिल हैं.

FAQs

1. ईडी ने हाल ही में कितने रुपये की संपत्ति जब्त की है?

ईडी ने 26 मार्च 2026 को करीब 271.48 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है.

2. इस मामले में मुख्य आरोपी कौन है और उन पर क्या आरोप हैं?

मुख्य आरोपी राजेंद्र नरपत मल लोढ़ा हैं. उन पर लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड के साथ धोखाधड़ी, पद का दुरुपयोग, फर्जी कागजात तैयार करने और कंपनी की संपत्तियों को गलत तरीके से बेचने के आरोप हैं.

3. जब्त की गई संपत्तियां कहां स्थित हैं?

ईडी द्वारा जब्त की गई जमीनें महाराष्ट्र के पनवेल और शाहापुर तालुका में स्थित हैं.

4. इस पूरे केस में अब तक कुल कितनी संपत्ति जब्त की जा चुकी है?

अब तक इस मामले में अलग-अलग कार्रवाइयों के जरिए कुल 359.48 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या अटैच की गई है.

5. आरोपी राजेंद्र लोढ़ा की वर्तमान स्थिति क्या है?

राजेंद्र लोढ़ा को 12 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं. मामले की आगे की जांच चल रही है.

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