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दिल्ली एनसीआर के रियल एस्टेट मार्केट में इन दिनों एक दिलचस्प खेल सामने आया है. आमतौर पर जब भी किसी चीज की सेल्स घटती है तो उसके दाम में कमी हो जाती है. हालांकि, एनसीआर के प्रॉपर्टी मार्केट में यह उल्टा हो रहा है. मकानों की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की गई है फिर भी कीमतें आसमान छू रही है. नाइट फ्रैंक इंडिया की ताजा रिपोर्ट इंडियन रियल एस्टेट:H2 2025 ने इस राज से पर्दा उठाने की कोशिश की है. रिपोर्ट के मुताबिक डेवलपर्स अब सोची समझी रणनीति मतलब कैलिबेरेटेड सप्लाई अप्रोच अपना ली है. आसान शब्दों में कहें तो अब बिल्डर्स सोच समझकर नए प्रोजेक्ट उतार रहे हैं. इससे सप्लाई कम रहे और कीमतें ऊंची बनी रहे.
नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में दिल्ली एनसीआर में घरों की बिक्री में 9 फीसदी की गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद घरों की कीमतें 19% बढ़ गई है.

नाइट फ्रैंक इंडिया के मुताबिक बिल्डर्स ने जानबूझकर सप्लाई को कंट्रोल किया है ताकि इन्वेंट्री यानी बिना बिके घरों का बोझ न बढ़े. साथ ही उन्हें दाम घटाने पर मजबूर न होना पड़े.
घरों की औसत कीमत 6,028 प्रति वर्ग फुट
| कैटेगरी | 2025 के आंकड़े | सालाना बदलाव (YoY Change) |
| नए लॉन्च | 50,769 | -16% (गिरावट) |
| बिक्री | 52,452 | -9% (गिरावट) |
| H2 2025 लॉन्च | 25,536 | -15% |
| औसत घर की कीमत | ₹6,028 | 19% (बढ़ोत्तरी) |
सोर्स: नाइट फ्रैंक इंडिया
नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट क मुताबिक दिल्ली एनसीआर में गुरुग्राम बिल्डर्स की सोची समझी रणनीति का केंद्र बना हुआ है. कुल लॉन्च का 53 फीसदी हिस्सा और बिक्री का 48 फीसदी हिस्सा अकेले गुरुग्राम से ही आया है. वहां भी बिल्डर्स 2 से 5 करोड़ रुपए वाले सेगमेंट पर ही अपना दांव लगा रहे हैं. गुरुग्राम के अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इसी ट्रेंड को देखा जा रहा है, जहां पर जेवर एयरपोर्ट के नाम पर कीमतें बढ़ाई जा रही है, लेकिन सप्लाई को कंट्रोल में रखा गया है.
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सवाल: बिल्डर्स की नई रणनीति क्या है?
जवाब: बिल्डर्स ने सप्लाई कंट्रोल की है. इससे बाजार में नए घरों बाढ़ न आए. साथ ही उन्हें दाम को कम न करना पड़े.
सवाल: आने वाले वक्त में प्रॉपर्टी के दाम गिरेंगे?
जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक सप्लाई कम होने और प्रीमियम घरों की डिमांड के कारण कीमतें बढ़ती रहेंगी.
सवाल: अभी सबसे ज्यादा किस तरह के घर बिक रहे हैं?
जवाब: 2 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत वाले घरों की बिक्री कुल मार्केट का 57 फीसदी है.
सवाल: सस्ते घरों का हाल क्या है?
जवाब: सस्ते घरों की सप्लाई और डिमांड दोनों कम हुई है. बिल्डर्स को इससे कम मुनाफा मिलता है.
सवाल: घर खरीदने का सही वक्त आ गया है?
जवाब: एंड यूजर्स के लिए ठीक है, लेकिन निवेश के तौर पर एंट्री कॉस्ट काफी महंगी हो गई है.