&format=webp&quality=medium)
Delhi NCR Real Estate: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहर रियल एस्टेट हॉटस्पॉट बनकर उभर रहा है. खासकर कोविड महामारी के बाद घरों की डिमांड में अभूतपूर्व उछाल आया है. वहीं, बिक्री मूल्य के हिसाब से देश का दूसरा सबसे बड़ा रेजिडेंशियल मार्केट बन गया है. हालांकि, जहां एक तरफ मांग में बढ़ोतरी हुई है तो दूसरी तरफ घरों की भारी किल्लत भी हो रही है. इससे प्रॉपर्टी की कीमतों में सालाना 23% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है. ब्रोकरेज हाउस एक्सिस कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में ये इशारा किया है.
Trump Tariffs News: 7 और देशों लगा टैक्स! वीडियो में जानें ट्रंप की 8 बड़ी बातें
एक्सिस कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दिल्ली एनसीआर में हर साल बसने वाले 10 नए परिवारों के लिए बिल्डर्स केवल दो नए घर या यूनिट बना रहे हैं. भारत के टॉप 7 शहरों में ये आंकड़ा सबसे खराब है, जो डिमांड और सप्लाई के बीच बड़े फासले को दर्शाता है. यह संकट ऐसे समय में गहरा रहा है जब एनसीआर में घरों की मांग चरम पर है. लोग पहले से बड़े और बेहतर घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इससे औसत अपार्टमेंट का साइज 1600 वर्ग फुट से बढ़कर 2200 वर्ग फुट हो गया है.
VIDEO- Amazon Prime Day Sale 2025: 12 से 14 जुलाई तक 5 स्मार्टफोन पर बंपर डिस्काउंट
घरों की मजबूत डिमांड के कारण, एनसीआर में बिना बिके घरों की इन्वेंटरी अपनी चरम से 75 फीसदी तक घट गई है. रिपोर्ट के मुताबिक एनसीआर में सिर्फ 9 महीने का इन्वेंटरी ओवरहैंग बचा है, जो देश के टॉप सात शहरों में सबसे कम है. एक्सिस कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक एनसीआर एक सप्लाई बाधित बाजार बन गया है जिसका कारण नोएडा में सख्त नियंत्रण है. सरकार द्वारा जमीन की नीलामी पर कड़े नियम लागू करने से नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग काफी ज्यादा सीमित हो गई है.
लाखों ट्रेडर्स ने छोड़ा Zerodha, Groww, Upstox, वजह है SEBI का नया रूल!
रिपोर्ट के मुताबिक घर की मांग और सप्लाई के बीच फासले का कारण है कि दिल्ली एक लैंड लॉक्ड शहर है, यहां पर नए विकास के लिए जमीन की भारी कमी है. शहर को लैंड पूलिंग पॉलिसी से काफी उम्मीद है, जिसके लागू होने में हो रही देरी से सप्लाई में काफी देरी हो रही है. इसके अलावा फिलहाल एनसीआर की ज्यादातर घरों की डिमांड का बोझ अकेले गुरुग्राम उठा रहा है. जमीन की अच्छी उपलब्धता के कारण यहां पर रिकवरी तेज हो रही है. हालांकि, यह पूरे एनसीआर की मांग को पूरा करने के लिए काफी नहीं है.
VIDEO-AI For Jobs: लाखों लोग नौकरी के लिए कर रहे इस AI का इस्तेमाल, वीडियो में जानें सब कुछ!