&format=webp&quality=medium)
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले मिडिल क्लास परिवार के लिए अपने आशियाना का सपना दूर की कौड़ी बनता जा रहा है. एक तरफ जहां हर साल किराये में बढ़ोतरी जेब को भारी पड़ रही है. दूसरी तरफ घर खरीदने का ख्याल जैसे ही मन में आता है तो हर तीसरे महीने प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही है. रियल एस्टेट कंसल्टेंट कुशमैन एंड वेकफील्ड की 2025 की दूसरी तिमाही में दिल्ली एनसीआर के लिए मिडिल क्लास के लिए यह फैसला लेना मुश्किल हो गया है कि किराये के घर में रहें या अपना घर खरीदें.
कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में घर का किराया साल-दर-साल 4 से 6 फीसदी तक बढ़ गया है. कोई परिवार यदि आज 40,000 रुपए प्रति माह किराया दे रहा है, तो अगले साल 42400 रुपए तक देने पड़ रहे हैं. दूसरी तरफ, प्रॉपर्टी की कीमतें भी लगभग सभी इलाके में हर तिमाही 2 से 5 फीसदी तक बढ़ रही हैं. इस गणित को आप ऐसे समझ सकते हैं यदि आप आज 80 लाख रुपए का कोई फ्लैट खरीदने का मन बना रहे हैं, तीन महीने बाद उसकी कीमत 82 से 84 लाख रुपए हो सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी पूरे दिल्ली एनसीआर इलाके में देखी जा रही है. गुरुग्राम के मिड-बजट सेगमेंट इलाकों में प्रॉपर्टी की औसत कीमतों में 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. नोएडा के मिड-सेगमेंट में कीमतें 9 फीसदी तक बढ़ी है. गुरुग्राम में किराए में सालाना 5 फीसदी और नोएडा में 6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया है कि डेवलपर्स अब मिडिल क्लास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
कुशमैन एंड वेकफील्ड के मुताबिक 2025 की दूसरी तिमाही में दिल्ली एनसीआर में लगभग 9156 नए घर लॉन्च हुए हैं. इसमें 77 फीसदी यानी एक बड़ा हिस्सा मिड सेगमेंट का था. नोएडा एक्सटेंशन, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे इलाके नए लॉन्च के केंद्र बने हुए हैं. इसका कारण नोएडा इंटरनेशनल हवाई अड्डे का जल्द शुरू होना और बेहतर कनेक्टिविटी है.
साया ग्रुप के एमडी विकास भसीन के मुताबिक, "किराया और प्रॉपर्टी की कीमतें दोनों लगातार बढ़ रही हैं, जिससे खासकर पहली बार घर खरीदने वालों सहित सभी के लिए जितनी जल्दी हो सके घर खरीदने पर सोचना जरूरी हो गया है. किराए पर रहना छोटी अवधि में सुविधाजनक लग सकता है, लेकिन उस मासिक खर्च को होम लोन में बदलने से संपत्ति और वित्तीय सुरक्षा बनाने में मदद मिल सकती है. हालांकि किसी पसंदीदा या प्रमुख स्थान पर घर खरीदना हमेशा सभी के लिए आर्थिक रूप से मुमकिन नहीं हो सकता है, फिर भी शहर से थोड़ी की प्रॉपर्टी पर विचार किया जा सकता है, जहां कीमतें अभी भी बजट के भीतर हो सकती हैं.
विकास भसीन के मुताबिक, "अच्छी बात यह है कि हाल के दिनों में होम लोन की ब्याज दरों में भी गिरावट देखी गई है, जिससे लोन लेना किफायती हो गया है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ₹1 करोड़ तक की संपत्ति खरीदने वाली महिलाओं के लिए स्टाम्प शुल्क में 1% की छूट का कदम एक और अच्छी खबर है, जिससे घर खरीदने की कुल लागत को कम करने में मदद कर सकती है. खरीदारों को बेहतर और आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद प्रॉपर्टी से सम्बंधित निर्णय लेने के लिए सक्रिय रूप से ऐसे फायदों का पता लगाकर उनका लाभ उठाना चाहिए."