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प्रॉपर्टी टैक्स का ये नया कैलकुलेशन दिल्लीवालों का प्रॉपर्टी टैक्स घटा सकता है.
Unit Area Method Tax Calculation: अगर आप दिल्ली में रहते हैं या आपकी कोई दुकान या घर है, तो आपके लिए एक बहुत जरूरी खबर आई है. सरकार एक नया कानून लाने जा रही है, जिससे आपके प्रॉपर्टी टैक्स का बोझ आधा हो सकता है. यानी आपके लिए एक बड़ी राहत आने वाली है.
अक्सर हमें लगता है कि टैक्स तो हमेशा बढ़ता ही है, लेकिन इस बार NDMC कह रही है कि नया सिस्टम यानी 'यूनिट एरिया मेथड' (UAM) आने से टैक्स 30% से 50% तक कम हो जाएगा. अब सवाल ये है कि आखिर ये 'यूनिट एरिया मेथड' होता क्या है, जो एक झटके में प्रॉपर्टी टैक्स को 30-50 फीसदी तक घटा देता है.
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हाल ही में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में 'जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया है. इस बिल में दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 में कई बदलावों का प्रस्ताव है. इसका मकसद है टैक्स सिस्टम को आसान बनाना और लोगों पर से टैक्स का बोझ कम करना. इसके तहत अब पुराने 'रेटवेबल वैल्यू' (Rateable Value) सिस्टम को हटाकर 'यूनिट एरिया मेथड' (UAM) को अपनाने की तैयारी है.
अभी तक टैक्स इस बात पर लगता था कि आपकी प्रॉपर्टी का किराया कितना मिल सकता है (Rateable Value), जिसका कैलकुलेशन अक्सर बहुत ही जटिल होता था. वहीं UAM में टैक्स आपकी प्रॉपर्टी के 'क्षेत्रफल' (Area) और कुछ तय 'फैक्टर्स' पर आधारित होता है. इसमें 4 मुख्य बातें देखी जाती हैं:
1- कवर एरिया: आपकी प्रॉपर्टी कितनी बड़ी है (वर्ग फुट या वर्ग मीटर में).
2- लोकेशन (Unit Area Value): दिल्ली को अलग-अलग कैटेगरी (A से H) में बांटा गया है. पॉश इलाकों का रेट ज्यादा और साधारण इलाकों का कम.
3- प्रॉपर्टी की उम्र (Age Factor): यही सबसे बड़ा गेमचेंजर है. पुरानी प्रॉपर्टी पर टैक्स कम लगेगा.
4- इस्तेमाल (Usage Factor): क्या आप वहां खुद रहते हैं (Self-occupied) या उसे किराए पर दिया है? या फिर वहां कोई दुकान है?
प्रॉपर्टी टैक्स = Rateable Value × टैक्स की दर
Rateable Value = Annual Rent (सालाना किराया)
यानी वह अनुमानित किराया जो आपकी प्रॉपर्टी से एक साल में मिल सकता है (चाहे आप किराए पर दें या नहीं)
एक उदाहरण से समझें
मान लेते हैं:
मंथली संभावित किराया = ₹20,000
तो सालाना किराया (RV) = ₹20,000 × 12 = ₹2,40,000
टैक्स रेट = 15% (0.15)
कैलकुलेशन:
प्रॉपर्टी टैक्स = 2,40,000 × 0.15 = ₹36,000
प्रॉपर्टी टैक्स = कवर एरिया × यूनिट एरिया वैल्यू × उम्र फैक्टर × इस्तेमाल फैक्टर × टैक्स की दर
वही प्रॉपर्टी मान लेते हैं, जिसका RV हमने ₹20,000 प्रति महीना लिया था.
कवर एरिया = 100 वर्ग मीटर
UAV (Unit Area Value) = ₹1,500 प्रति वर्ग मीटर
उम्र फैक्टर = 0.9 (मान लेते हैं कि प्रॉपर्टी कम से कम 25-30 साल पुरानी होगी, तो इसकी वैल्यू 0.9 ली है.)
इस्तेमाल फैक्टर = 1 (Residential. अगर प्रॉपर्टी कमर्शियल है या रेंटल है तो उसका फैक्टर अलग होगा, जो 1.5 या 1.2 हो सकता है.)
टैक्स रेट = 15% (0.15)
Note: यह मानक सिर्फ आसान कैलकुलेशन के लिए तय किए गए हैं, यह काल्पनिक हैं.
Area × UAV: 100 × 1500 = ₹1,50,000
उम्र फैक्टर: ₹1,50,000 × 0.9 = ₹1,35,000
इस्तेमाल फैक्टर: ₹1,35,000 × 1 = ₹1,35,000
टैक्स रेट: ₹1,35,000 × 0.15 = ₹20,250
तो UAV Method से प्रॉपर्टी टैक्स = ₹20,250 प्रति वर्ष
| Method | Tax |
|---|---|
| RV Method | ₹36,000 |
| UAV Method | ₹20,250 |
इस तरह साफ देखा जा सकता है कि एक ही प्रॉपर्टी पर दो अलग-अलग मेथड से अलग-अलग प्रॉपर्टी टैक्स लग रहा है.
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NDMC के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने साफ कहा है कि इस नए तरीके से उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो सालों से अपने पुराने घरों में रह रहे हैं.
उम्र का फायदा (Age Factor): जैसे-जैसे प्रॉपर्टी पुरानी होती है, उसकी मेंटेनेंस बढ़ती है. UAM इसे समझता है और पुराने निर्माण पर टैक्स घटा देता है.
बाइफरकेशन (Bifurcation): अब आप अपनी प्रॉपर्टी के अलग-अलग हिस्सों का अलग-अलग आकलन करवा सकते हैं. जैसे- अगर नीचे दुकान है और ऊपर गोदाम, तो गोदाम का टैक्स दुकान के मुकाबले कम लगेगा. पहले पूरी प्रॉपर्टी को कमर्शियल मानकर भारी टैक्स लिया जाता था.
जहां एक तरफ घर मालिकों के लिए खुशी है, वहीं व्यापारियों (Traders) के मन में कुछ शंकाएं हैं:
स्पष्टता की कमी: व्यापारियों को डर है कि कहीं बेस रेट (Unit Area Value) इतना ज्यादा न रख दिया जाए कि कुल टैक्स कम होने के बजाय बढ़ जाए.
कमर्शियल रेट: दुकानों के लिए 'यूसेज फैक्टर' क्या होगा, इसे लेकर व्यापारी संगठन सरकार से और स्पष्टता मांग रहे हैं.
सर्वे: व्यापारियों का कहना है कि पुराने इलाकों में दुकानों का साइज और स्ट्रक्चर बहुत अलग है, वहां UAM लागू करना पेचीदा हो सकता है.
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NDMC का यह कदम दिल्ली के प्रॉपर्टी मालिकों के लिए एक 'बड़ी जीत' साबित हो सकता है. सालों पुराने पेचीदा सिस्टम की जगह एक पारदर्शी और क्षेत्रफल आधारित सिस्टम (UAM) आने से न केवल भ्रष्टाचार कम होगा, बल्कि आम आदमी की जेब में भी पैसा बचेगा. हालांकि, व्यापारियों की चिंताओं को दूर करना सरकार के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी.
1- क्या मुझे अपना पुराना बकाया भी नए रेट से देना होगा?
नहीं, नया नियम इसके लागू होने की तारीख से प्रभावी होगा. पुराना बकाया पुराने नियमों के हिसाब से ही रहेगा.
2- क्या किराए पर दी गई प्रॉपर्टी पर भी 50% छूट मिलेगी?
नहीं, खुद रहने वाली (Self-occupied) प्रॉपर्टी पर ज्यादा छूट मिलती है. किराए वाली प्रॉपर्टी पर 'कमर्शियल' या 'रेंटेड' फैक्टर लागू होगा.
3- क्या पूरी दिल्ली में यह नियम लागू होगा?
अभी यह NDMC (नई दिल्ली नगर परिषद) के लिए प्रस्तावित है, लेकिन दिल्ली नगर निगम (MCD) में पहले से ही UAM के कुछ हिस्से लागू हैं. इस बिल से पूरे सिस्टम में और सुधार आएगा.
4- एज फैक्टर (Age Factor) क्या है?
यह एक गुणांक (Coefficient) है. जैसे 20 साल से पुरानी प्रॉपर्टी के लिए यह 0.8 हो सकता है, जिससे टैक्स सीधे 20% कम हो जाता है.
5- क्या मुझे खुद जाकर अपना टैक्स दोबारा कैलकुलेट करवाना होगा?
हां, नया सिस्टम लागू होने पर आपको पोर्टल पर जाकर अपनी प्रॉपर्टी की डिटेल्स अपडेट करनी होंगी, ताकि आप नई दरों का फायदा उठा सकें.
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