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महाराष्ट्र के घर खरीदारों को महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीलिय ट्रिब्यूनल (MREAT) ने बड़ी राहत दी है. खरीदारों के पक्ष में एक अहम फैसला सुनाते हुए ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि यदि बायर और बिल्डर के बीच फ्लैट के सेल का कोई एग्रीमेंट (सेल एग्रीमेंट) नहीं भी हुआ तो डेवलपर इसे आधार बनाकर रिफंड देने से इंकार नहीं कर सकते हैं. MREAT ने महाराष्ट्र रेरा के फैसल को पलटते हुए बिल्डर को यूएई में रहने वाले एक एनआरआई को 26 लाख रुपए ब्याज समेत लौटाने के आदेश दिए हैं. खरीदार पोजेशन में हो रही देरी के बाद प्रोजेक्ट से बाहर निकलने का फैसला किया था.
साल 2013 में यूएई में रहने वाले NRI ने मुंबई के पनवेल में एक अपार्टमेंट 84 लाख रुपए में बुक किया था. इसके लिए शुरुआत में 1 लाख रुपए की बुकिंग अमाउंट का भुगतान किया था. इस दौरान दोनों ही पार्टी के बीच कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ, लेकिन बिल्डर ने एक बुकिंग फॉर्म को जारी किया था. इस फॉर्म में लिखा था कि ऑक्यूपेशन का सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही पजेशन दिया जाएगा. हालांकि, इसकी कोई समय-सीमा नहीं बताई गई थी. कुछ वक्त बाद घर खरीदार ने 26 लाख रुपए का कई किश्तों में भुगतान किया.
पजेशन में हो रही देरी के कारण प्रोजेक्ट के दूसरे टावर में अपनी बुकिंग शिफ्ट क दी है. पांच साल से ज्यादा इंतजार के बावजूद, घर खरीदार को अपार्टमेंट का कब्जा नहीं मिला है. लगातार देरी के कारण मई 2019 में रेरा अधिनियम,2016 की धारा 18 के तहत रिफंड की मांग की थी. मार्च 2020 में, दोनों पार्टी को सुनने के बाद MahaRERA ने यह आदेश पारित किया कि सेल के लिए कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ था, इसलिए रेरा अधिनियम 2016, की धारा 18 के प्रावधन इस मामले में लागू नहीं होते हैं.
MahaRERA ने कहा कि खरीदार और डेवलपर दोनों को आदेश के एक महीने के अंदर सेल के लिए एग्रीमेंट करने और रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश देते हुए शिकायत का निपटारा किया. इस फैसले के खिलाफ घर खरीदार ने रिफंड और मुआवजे की मांग को करते हुए MREAT में अपील की थी. MREAT ने महारेरा के आदेश को कैंसिल कर दिया. 7 मई 2025 को दिए अपने फैसले में कहा कि रेरा अधिनियम की धारा 18 के लागू होने के लिए फॉर्मल सेल्स एग्रीमेंट जरूरी नहीं है. बुकिंग फॉर्म की सामग्री सेल एग्रीमेंट के समान पार्टियों के बीच आपसी समझ दर्शाती है.
MREAT ने साफ किया है कि डेवलपर को एक महीने के अंदर घर खरीदार द्वारा भुगतान की गई राशि वापस करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही हर भुगतान की तारीख से SBI की सबसे ज्यादा MCLR से 2% अधिक की दर से ब्याज भी देना होगा.