अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) प्रक्रिया के तहत समाधान प्रक्रिया के माध्यम से अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड की तीन रुके हुए प्रोजेक्ट्स का अधिग्रहण कर लिया है. लंबे समय से रुके हुए इन रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने की दिशा में एक अहम कदम है और इससे एनसीआर के 3,000 से अधिक प्रभावित होमबायर्स और कमर्शियल स्पेस खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी. इन प्रोजेक्ट्स में ग्रेटर नोएडा के दो कमर्शियल प्रोजेक्ट अर्थ टेकवन और अर्थ सैफायर कोर्ट और गुरुग्राम का एक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट अर्थ कोपिया शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट ने रिवाइवल प्लान को दी मंजूरी
यह टेकओवर सुप्रीम कोर्ट के 5 मई 2026 के एक अहम फैसले के बाद मुमकिन हो पाया है. सुप्रीम कोर्ट ने अल्फा कॉर्प के इस रिवाइवल प्लान (प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने की योजना) को अपनी मंजूरी दे दी है.
NCLAT ने मामला किया था खारिज
- इससे पहले NCLAT ने 31 जनवरी 2023 को इस प्लान को खारिज कर दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है.
- सुप्रीम कोर्ट ने IBC के तहत रिवाइवल फ्रेमवर्क को सही ठहराते हुए रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का रास्ता साफ कर दिया.
- अदालत ने कहा कि अब और देरी होने पर इसका सीधा नुकसान उन घर खरीदारों और कमर्शियल स्पेस खरीदारों को होगा, जिन्होंने इन प्रोजेक्ट्स में अपनी मेहनत की कमाई लगाई है.
- कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) केवल अपने मूल बकाया की ही वसूली कर सकेगा.
सभी जुर्मानों को पूरी तरह किया माफ
सुप्रीम कोर्ट ने GNIDA की लंबे समय तक रही निष्क्रियता को देखते हुए अदालत ने पेनल इंटरेस्ट, पेनल चार्ज और टाइम एक्सटेंशन से जुड़े सभी जुर्माने पूरी तरह माफ कर दिए हैं.
24 महीने के अंदर करेगी भुगतान
- कोर्ट ने साफ किया कि अल्फा कॉर्प इन बकाया राशियों का भुगतान 24 महीनों के भीतर करेगी और इसका कोई भी अतिरिक्त बोझ घर खरीदारों पर नहीं डाला जाएगा.
- यह अधिग्रहण इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया में रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी मिलने और बहाल होने के बाद संभव हुआ है.
- अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट, सफल रेजोल्यूशन एप्लिकेंट (SRA) के रूप में, इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने, दोबारा शुरू करने और खरीदारों को समय पर हैंडओवर करने की जिम्मेदारी निभाएगी.
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अब आगे क्या है अल्फा कॉर्प का प्लान
अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स की खराब माली हालत की वजह से ये प्रोजेक्ट सालों से धूल फांक रहे थे। अब आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी मिलने के बाद, अल्फा कॉर्प ये काम करेगी:
- निर्माण पूरा करना, प्रोजेक्ट का मैनेजमेंट, सरकारी मंजूरियां लेना और लोगों को तय समय पर प्रॉपर्टी का कब्जा (पजेशन) सौंपना.
- कंपनी इन प्रोजेक्ट्स को आज के मार्केट के हिसाब से अपग्रेड करेगी. इसमें बुनियादी सुविधाओं (इंफ्रास्ट्रक्चर) को बेहतर बनाना और डिजाइन को आधुनिक बनाना शामिल है.
- अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने, उनके पुनर्विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और पोजेशन देने के लिए करीब 750 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. साथ ही, इन प्रोजेक्ट्स से लगभग 1,200 करोड़ रुपये की संभावित इनकम का अनुमान है.
ग्राहकों के साथ शेयर करेगी पजेशन की तारीख
सरकारी और कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद, कंपनी काम का पूरा टाइमटेबल और पजेशन की तारीखें ग्राहकों के साथ शेयर करेगी. दिवालिया कानून (IBC) के जरिए अटके हुए प्रोजेक्ट्स को सुलझाने और एनसीआर (NCR) के प्रॉपर्टी मार्केट में लोगों का भरोसा वापस लाने के लिए इसे एक बहुत बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है.