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1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री आगामी वित्त वर्ष का बजट भाषण पढ़ेंगी, तो हर एक सेक्टर की तरह रियल एस्टेट और घर खरीदारों की उनसे काफी उम्मीद होंगी. देश में अफोर्डेबल हाउसिंग खासकर 50 लाख रुपए या उससे कम कीमत वाले घर दम तोड़ रहे हैं. दूसरी तरफ लग्जरी घरों की बिक्री रोजाना नए रिकॉर्ड कायम कर रहे हैं. प्रॉपर्टी कंसल्टेंट कंपनी एनारॉक के मुताबिक देश का हाउसिंग सेगमेंट फिलहाल दो बाजारों में बंटने की कगार में है. इसमें अमीर आराम से बड़े घर खरीद रहे हैं. वहीं, मिडिल क्लास का घर खरीदना का सपना टूट रहा है. ऐसे में यदि टैक्स हॉलिडे को बहाल किया जाए तो उससे राहत मिल सकती है.
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी के मुताबिक बजट से रियल एस्टेट सेक्टर की बड़ी मांग है कि डेवलपर्स के लिए सेक्शन 80-IBA के तहत मिलने वाले टैक्स हॉलिडे को एक बार फिर बहाल किया जाए.

साल 2021 में सेक्शन 80-IBA से मिलने वाली छूट को खत्म करने के बाद बिल्डर्स का रुझान महंगे प्रोजेक्ट्स की तरफ गया, क्योंकि वहां मार्जिन ज्यादा है.
क्या है अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा
एनारॉक के आंकड़ों के मुताबिक 2025 की चौथी तिमाही में सेल्स वॉल्यूम में गिरावट आई है लेकिन, सेल्स वैल्यू बढ़ी है. एनारॉक के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में टॉप 7 शहरों में घरों की बिक्री में 14 फीसदी की गिरावट आई है. इस दौरान कुल 3.95 लाख यूनिट्स बिकी है. हालांकि, इस दौरान सेल्स वैल्यू सालाना आधार 6 फीसदी बढ़कर 6 लाख करोड़ रुपए हो गई है. इसका कारण प्रीमियमाइजेशन है.
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सवाल: बजट 2026 में सस्ते घरों पर क्या डिमांड है?
जवाब: बजट 2026 में सस्ते घरों के लिए सेक्शन 80-IBA को एक बार फिर लागू करना होगा.
सवाल: सेक्शन 80-IBA पर क्या प्रावधान है?
जवाब: सेक्शन 80-IBA के तहत अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के मुनाफे पर 100 फीसदी टैक्स छूट दी जाती थी.
सवाल: सेक्शन 80-IBA को कब खत्म किया गया?
जवाब: सेक्शन 80-IBA को मार्च 2021 में खत्म कर दिया गया था.
सवाल: बिल्डर सस्ते घर क्यों नहीं बना रहे हैं.
जवाब: जमीन और निर्माण की बढ़ती लगात और लो मार्जिन के कारण बिल्डर्स ने सस्ते घरों से मुंह मोड़ लिया है.
सवाल: अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा को बदलने की क्या मांग है?
जवाब: अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा बढ़ाकर 75 लाख से 80 लाख रुपए करने की मांग है.