मेट्रो में अब फंसा कोई दुपट्टा, साड़ी या बैग तो ट्रेन खुद लगा देगी ब्रेक! क्या है DMRC का नया स्मार्ट सेफ्टी फीचर

DMRC की ओर से शुरू किए गए इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि मेट्रो ट्रेन के दरवाजे बंद होते समय अगर कोई वस्तु—जैसे कि बैग, दुपट्टा, साड़ी, बेल्ट या कपड़ा—दरवाजे के बीच फंसी हो, तो यह सिस्टम उसे तुरंत पहचान लेगा.
मेट्रो में अब फंसा कोई दुपट्टा, साड़ी या बैग तो ट्रेन खुद लगा देगी ब्रेक! क्या है DMRC का नया स्मार्ट सेफ्टी फीचर

Delhi Metro anti drag system: दिल्ली मेट्रो में सफर करने वालों के लिए राहत की खबर है. अक्सर देखा गया है कि भीड़भाड़ में चढ़ते-उतरते वक्त महिलाओं के दुपट्टे, साड़ियों, बैग की स्ट्रैप या यात्रियों के दूसरे सामान मेट्रो के दरवाजों में फंस जाते हैं. कई बार ये मामूली घटनाएं गंभीर हादसों में तब्दील हो जाती हैं. इन्हीं खतरों को टालने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) अब एक नया और आधुनिक सुरक्षा फीचर लेकर आया है — एंटी-ड्रैग सिस्टम.

क्या है एंटी-ड्रैग सिस्टम?

DMRC की ओर से शुरू किए गए इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि मेट्रो ट्रेन के दरवाजे बंद होते समय अगर कोई वस्तु—जैसे कि बैग, दुपट्टा, साड़ी, बेल्ट या कपड़ा—दरवाजे के बीच फंसी हो, तो यह सिस्टम उसे तुरंत पहचान लेगा. जैसे ही सिस्टम को दरवाजों के बीच फंसी हुई किसी चीज का दबाव महसूस होगा, यह इमरजेंसी ब्रेक एक्टिवेट कर देगा. यानी ट्रेन तब तक आगे नहीं बढ़ेगी जब तक वो चीज दरवाजे से हट नहीं जाती.

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कहां हो रहा है परीक्षण?

DMRC ने फिलहाल एक ट्रेन में इस सुविधा का ट्रायल शुरू किया है. आने वाले समय में चार और ट्रेनों में यह सिस्टम लगाया जाएगा. इन ट्रेनों के प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण और फीडबैक लिया जाएगा. यदि यह सफल रहता है तो अन्य मेट्रो रूट्स और ट्रेनों में भी इसे लागू किया जाएगा.

कैसे बढ़ेगी सुरक्षा?

DMRC के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास कुमार के मुताबिक, यह तकनीक खासतौर पर पुरानी मेट्रो लाइनों के लिए जरूरी है, जहां अभी प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (PSD) की सुविधा हर स्टेशन पर उपलब्ध नहीं है. जबकि नई पिंक और मैजेंटा लाइनों और चौथे चरण के विस्तार वाले रूट्स पर PSD लगे हुए हैं, जिससे दरवाजों में सामान फंसने की घटनाएं स्वाभाविक रूप से टल जाती हैं.

कितनी संवेदनशील होगी ये तकनीक?

अब तक मेट्रो के दरवाजे 15 मिमी तक की रुकावट को ही पहचान पाते थे. यानी अगर दरवाजे के बीच कोई वस्तु 15 मिमी से पतली होती थी, तो दरवाजे उसे नहीं पकड़ पाते थे और ट्रेन चल पड़ती थी. लेकिन अब यह संवेदनशीलता 7 मिमी तक की जा रही है, जिससे कपड़ों की पतली परतें, दुपट्टा, साड़ी की पल्लू, बैग की स्ट्रैप जैसी चीजें भी आसानी से पकड़ में आ जाएंगी और दरवाजा या ट्रेन रुक जाएगी.

यात्रियों को मिल रहा है सीधा लाभ

इस सुविधा से खासतौर पर महिला यात्रियों को बड़ा फायदा मिलने वाला है. कई बार देखा गया है कि महिलाओं के कपड़े या दुपट्टे दरवाजे में फंसते हैं और ट्रेन के चलने से घिसटने जैसी घटनाएं हो जाती हैं. अब ऐसी घटनाओं की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी. DMRC पहले से ही मेट्रो के अंदर अनाउंसमेंट के जरिए यात्रियों को सजग करता है कि वे चढ़ते-उतरते समय अपने कपड़ों और सामान का विशेष ध्यान रखें.

कब तक सभी ट्रेनों में लगेगा यह सिस्टम?

DMRC के मुताबिक, अगले एक से दो साल तक इन ट्रेनों पर ट्रायल किया जाएगा. यदि तकनीक सभी मानकों पर खरी उतरती है, तो इसे पुरानी सभी मेट्रो लाइनों पर लागू किया जाएगा. हालांकि, नई लाइनों में प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर होने के कारण ऐसी तकनीक की आवश्यकता नहीं होगी.

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