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Bairabi Sairang Railway Line: प्रकृति के गोद में बसे नॉर्थ ईस्ट के बेहद खूबसूरत राज्य मिजोरम के लोगों के लिए ये एक ऐतिहासिक क्षण है, जब 26 साल के इंतजार के बाद पहली बार यहां के लोग ट्रेन की सीटी सुनेंगे. आजादी के सात दशक बाद भी मिजोरम जो अभी तक भारतीय रेलवे नेटवर्क से अछूता था, अब सीधी रेल कनेक्टिविटी से जुड़ने जा रहा है. मिजोरम की राजधानी आइजोल तक पहली बार ट्रेन पहुंच चुकी है और जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन करेंगे.
इस प्रोजेक्ट की नींव साल 1999 में रखी गई थी. जब पहली बार इसका सर्वे करना भी मुमकिन नहीं था क्योंकि घने जंगलों, खराब विजिबिलिटी और दुर्गम इलाकों के कारण प्रारंभिक इंजीनियरिंग सर्वे (PET Survey) मुमकिन नहीं हो सका. बाद में इसे Reconnaissance Survey के रूप में बदलकर 2003 में हरी झंडी मिली.

2006 में पूर्वोत्तर फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने इस रूट का RET सर्वे किया और फिर 2008 में RITES ने Geo-Technical सर्वे किया. इस प्रोजेक्ट को 2008–09 में "नेशनल प्रोजेक्ट" घोषित किया गया और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 नवंबर 2014 को इसका शिलान्यास किया. 11 साल की मेहनत के बाद, 2025 में यह सपना साकार हुआ.
यहां देखें Video: आजादी के 78 साल बाद मिजोरम में दौड़ेगी पहली ट्रेन! Bairabi–Sairang रेल लाइन की पूरी जानकारी
CPRO के.के. शर्मा ने बताया कि बैराबी से आइजोल की जो दूरी पहले 5–6 घंटे में तय होती थी, अब रेल से 1 से 1.5 घंटे में पूरी होगी. यह न सिर्फ सफर को सस्ता और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि किसानों, व्यापारियों और छात्रों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने में क्रांति लाएगा.
दिल्ली, कोलकाता और अगरतला से सीधी ट्रेनें चलाने की मंजूरी भी मिल चुकी है. मिजोरम सरकार और रेलवे मंत्रालय मिलकर सैरांग स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस कर रहे हैं.

चीफ इंजीनियर विनोद कुमार बताते हैं कि यह इलाका भूस्खलन, भरी बारिश और मानसून के कारण साल में केवल 4–5 महीने ही कार्य योग्य रहता है. चूंकि सड़कें संकरी और ढलानयुक्त थीं, भारी मशीनें और क्रेन लाना लगभग असंभव था. उन्हें टुकड़ों में लाकर साइट पर जोड़ा गया. स्थानीय मजदूरों की कमी के कारण अन्य राज्यों से मजदूर लाए गए. निर्माण सामग्री जैसे रेत और गिट्टी तक असम, पश्चिम बंगाल और मेघालय से मंगाई गई.
रेलवे की योजना है कि इस रूट पर विस्टाडोम ट्रेन चलाई जाए, जिससे मिजोरम के प्रमुख पर्यटन स्थल जैसे रेइक हिल्स, तामदिल झील, वंतावंग झरना, फावंगपुई नेशनल पार्क, डम्पा टाइगर रिजर्व जैसी जगहों को 360 डिग्री व्यू के साथ दिखाया जा सकेगा. यह क्षेत्र पर्यटन में बड़ा बूम ला सकता है.

सरकार अब इस रेलवे लाइन को म्यांमार बॉर्डर तक बढ़ाने की योजना बना रही है. आइजोल से म्यांमार बॉर्डर 232 किमी दूर है और इस एक्सटेंशन से यह प्रोजेक्ट न सिर्फ कनेक्टिविटी बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अहम साबित होगा.
इस रेलवे परियोजना के पूरा होते ही, पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में से 4 की राजधानियां – त्रिपुरा (अगरतला), अरुणाचल (ईटानगर), असम (दिसपुर) और मिजोरम (आइजोल) अब सीधे भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ गई हैं.
मिजोरम के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि "हमने सोचा नहीं था कि हमारे यहां कभी ट्रेन आएगी…" आज यह सपना साकार हुआ है. मिजोरम, जो कभी सिर्फ हवाई या सड़क मार्ग से जुड़ा था, अब रेल से जुड़कर 'हेवेन ऑफ नॉर्थईस्ट' की उपाधि को और गौरवान्वित कर रहा है.