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रेलवे का दावा प्रीमियम चार्ज के बावजूद यात्रियों की संख्या बढ़ रही है. (फोटो: PTI)
ट्रेनों में हवाई जहाज की तरह किरायों पर प्रीमियम वसूलने से रेलवे को 2426 करोड़ रुपए की कमाई हुई है. ये आंकड़े 9 सितंबर 2016 से लेकर, जून 2019 तक हैं. फ्लेक्सी फेयर के तहत ग्राहकों से बुकिंग पर मूल किराये के ऊपर प्रीमियम लिया जाता है. रेलवे ने ये भी साफ कर दिया है कि फ्लेक्सी फेयर को खत्म करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है. रेलवे का दावा है कि किरायों पर प्रीमियम चार्ज करने के बावजूद राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ रही है. जैसे सितंबर 2016 से मार्च 2017 तक के आंकड़ों के मुताबिक, औसत ऑक्यूपेंसी 81 फीसदी के करीब थी. हालांकि, ये पूरे साल का आंकड़ा नहीं था. क्योंकि, सुविधा सितंबर से शुरू हुई थी.
2017-18 में औसत ऑक्यूपेंसी करीब 83 फीसदी थी. 2018-19 में आंकड़ा 86 फीसदी से ज्यादा रहा. जबकि मौजूदा कारोबारी साल के तीन महीनों में जून तक 97 फीसदी के करीब ऑक्यूपेंसी रही है. रेलवे देश की कुल 13452 ट्रेनों में से 141 ट्रेनों में टिकट बुकिंग पर प्रीमियम चार्ज वसूलती है. इसमें से भी 32 ट्रेनों में 9 महीने के लिए ही प्रीमियम चार्ज वसूला जाता है. रेलवे का दावा है कि ट्रेन छूटने के 4 दिन पहले कम ऑक्यूपेंसी पर किरायों में डिस्काउंट देने से यात्रियों की संख्या और कमाई दोनों बढ़ी है.
रेलवे ने 9 सितंबर 2016 से एसी 2 टायर, एसी 3 टायर, एसी चेयरकार, जनरल स्लीपर और सेकेंड क्लास रिजर्व्ड सीटिंग पर लागू है. ये जवाब रेल मंत्री पीयूष गोयल की ओर से लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में दिया गया है. रेल मंत्री से पूछा गया कि किरायों पर प्रीमियम लगने से क्या रेलवे के यात्री एयरलाइंस का रुख तो नहीं कर रहे हैं, इससे रेलवे को घाटा तो नहीं हो रहा है?
क्या है फ्लेक्सी फेयर स्कीम