कहां से सबसे ज्यादा भरती है रेलवे की तिजोरी, कहां लुटाती है Railway अपना पैसा? CAG ने खोल दिया पूरा 'सीक्रेट'

Indian Railways Earnings: रेलवे ने की बंपर कमाई! CAG रिपोर्ट में हुआ खुलासा, 2022-23 में कमाए ₹2.40 लाख करोड़. जानें कैसे मालगाड़ी उठा रही है पैसेंजर ट्रेनों का घाटा और कहां हुआ फिजूलखर्च.
कहां से सबसे ज्यादा भरती है रेलवे की तिजोरी, कहां लुटाती है Railway अपना पैसा? CAG ने खोल दिया पूरा 'सीक्रेट'

Indian Railways Earnings: भारतीय रेलवे सिर्फ देश की लाइफलाइन ही नहीं, बल्कि एक विशाल आर्थिक इंजन भी है और इस इंजन ने वित्त वर्ष 2022-23 में ऐसी रफ्तार पकड़ी है कि कमाई के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. देश की सबसे बड़ी ऑडिटर संस्था, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की संसद में पेश की गई ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने यात्री और माल ढुलाई से एक साल में ₹2,39,982.56 करोड़ (लगभग ₹2.40 लाख करोड़) की बंपर कमाई की है. यह आंकड़ा पिछले साल (2021-22) की तुलना में 25.51% ज्यादा है. यह दिखाता है कि कोरोना महामारी के झटके से उबरने के बाद रेलवे की गाड़ी एक बार फिर तेज रफ्तार से पटरी पर दौड़ पड़ी है.

कहां से आया इतना पैसा? कमाई का पूरा हिसाब-किताब

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे की कमाई में यह जबरदस्त उछाल मुख्य रूप से तीन जगहों से आया है. यात्री कमाई (Passenger Earnings): कोरोना के बाद लोग फिर से ट्रेनों में जमकर सफर करने लगे, जिससे यात्री किराए से होने वाली कमाई में भारी बढ़ोतरी हुई. माल ढुलाई (Freight Earnings) रेलवे की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है. रिपोर्ट में एक बहुत ही दिलचस्प बात सामने आई है कि माल ढुलाई से हुई कुल कमाई का 50.42% हिस्सा सिर्फ कोयले की ढुलाई से आया है. यानी, देश के पावर प्लांट तक कोयला पहुंचाकर रेलवे अपनी आधी से ज्यादा कमाई कर रहा है.

घाटे से मुनाफे में आई रेलवे, सुधर गया 'ऑपरेटिंग रेशियो'

किसी भी बिजनेस की सेहत को नापने का एक बड़ा पैमाना होता है 'ऑपरेटिंग रेशियो' (OR). इसका मतलब है कि ₹100 कमाने के लिए कंपनी कितना पैसा खर्च कर रही है. अगर OR 98 है, तो इसका मतलब है कि ₹100 कमाने के लिए ₹98 खर्च हो रहे हैं और ₹2 का मुनाफा हो रहा है. 2021-22 में रेलवे का OR 107.39% था, यानी ₹100 कमाने के लिए उसे ₹107.39 खर्च करने पड़ रहे थे (₹7.39 का घाटा). लेकिन 2022-23 में रेलवे ने जबरदस्त सुधार करते हुए अपने OR को 98.1% पर ला दिया. इसी का नतीजा है कि जहां पिछले साल रेलवे को ₹15,024.58 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था, वहीं इस साल (2022-23) में रेलवे ₹2,517.38 करोड़ के शुद्ध मुनाफे में आ गया है.

फिर भी घाटे में है रेलवे!

यह जानकर आपको हैरानी होगी कि आप अपनी ट्रेन टिकट के लिए जो किराया देते हैं, वह आपकी यात्रा की असली लागत का सिर्फ एक हिस्सा है. CAG ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि पैसेंजर ट्रेनों को चलाने में रेलवे को आज भी भारी घाटा होता है. 2022-23 में यह घाटा ₹5,257.07 करोड़ का था. इस घाटे की भरपाई मालगाड़ियों से होने वाले मुनाफे से की जाती है. यानी, माल ढुलाई से जो पैसा रेलवे कमाता है, उसका एक बड़ा हिस्सा आपको सस्ती टिकट देने में क्रॉस-सब्सिडाइज कर दिया जाता है.

कहां हुआ खर्च और कहां हुई 'फिजूलखर्ची'?

कमाई के साथ-साथ CAG ने रेलवे के खर्चों का भी पूरा ब्योरा दिया है. 2022-23 में रेलवे का कुल खर्च ₹4,41,642.66 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 11.34% ज्यादा है. कुल खर्च का लगभग 72.22% हिस्सा सिर्फ तीन चीजों पर गया - स्टाफ की सैलरी, रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन और डिब्बों-इंजनों का किराया.

CAG की पकड़ में आई गड़बड़ी

ऑडिट के दौरान CAG ने कुछ गंभीर वित्तीय अनियमितताएं भी पकड़ी हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रालय ने 1,932 मामलों में ₹6,483.71 करोड़ का खर्च बिना मंजूरी (Unsanctioned) के ही कर दिया. एक चौंकाने वाले मामले में, उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) ने रतलाम-डूंगरपुर नई लाइन प्रोजेक्ट के लिए ₹5 करोड़ की मांग की और उसे मंजूरी भी मिल गई, जबकि यह प्रोजेक्ट सितंबर 2019 में ही बंद (Frozen) किया जा चुका था!

रेलवे की सरकारी कंपनियों का प्रदर्शन

रेलवे के तहत काम करने वाली सरकारी कंपनियां (जैसे IRCTC, RVNL) शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. इन कंपनियों का शुद्ध मुनाफा 2018-19 में ₹6,146.29 करोड़ था, जो 2022-23 में बढ़कर ₹12,056.61 करोड़ हो गया. कुल 45 में से 33 कंपनियां 2022-23 में मुनाफे में रहीं.

निष्कर्ष (Conclusion)

CAG की यह रिपोर्ट भारतीय रेलवे की वित्तीय सेहत की एक मिली-जुली तस्वीर पेश करती है. एक तरफ, कमाई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और घाटे से मुनाफे में आना एक बहुत बड़ा सकारात्मक संकेत है, जो दिखाता है कि रेलवे सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. माल ढुलाई, विशेषकर कोयले की ढुलाई, रेलवे के लिए 'सोने का अंडा' देने वाली मुर्गी साबित हो रही है. वहीं दूसरी तरफ, पैसेंजर ट्रेनों का लगातार घाटे में चलना और बिना मंजूरी के खर्च जैसी वित्तीय अनियमितताएं चिंता का विषय हैं. यह रिपोर्ट रेलवे के लिए एक आईना है, जो उसे अपनी ताकत को और मजबूत करने और अपनी कमजोरियों को दूर करने का रास्ता दिखाती है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल 1: रेलवे की कमाई का सबसे बड़ा जरिया क्या है?
जवाब: रेलवे की कमाई का सबसे बड़ा जरिया माल ढुलाई (Freight Operations) है. कुल माल ढुलाई की कमाई का 50% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ कोयले की ढुलाई से आता है.
सवाल 2: ऑपरेटिंग रेशियो (OR) क्या होता है और 98.1% का क्या मतलब है?
जवाब: ऑपरेटिंग रेशियो यह बताता है कि ₹100 कमाने के लिए कितना खर्च करना पड़ रहा है. 98.1% का मतलब है कि रेलवे ने ₹100 कमाने के लिए ₹98.10 खर्च किए, जिससे उसे ₹1.90 का ऑपरेटिंग प्रॉफिट हुआ.
सवाल 3: क्या रेलवे हर यात्री टिकट पर घाटा उठाता है?
जवाब: जी हाँ, CAG की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे को पैसेंजर सेवाओं को चलाने में घाटा होता है, जिसकी भरपाई वह मालगाड़ियों से होने वाले मुनाफे से करता है.
सवाल 4: CAG क्या है और इसकी रिपोर्ट इतनी महत्वपूर्ण क्यों होती है?
जवाब: CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) भारत की सर्वोच्च ऑडिट संस्था है, जो सरकार के सभी खर्चों और खातों की जांच करती है. इसकी रिपोर्ट सीधे संसद में पेश की जाती है और यह सरकार के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है.
सवाल 5: रेलवे ने बिना मंजूरी के कितना पैसा खर्च किया?
जवाब: CAG की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में रेलवे ने 1,932 मामलों में ₹6,483.71 करोड़ का खर्च बिना मंजूरी के किया.

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