मौत को मात देगा रेलवे! ट्रेन हादसों में 'गोल्डन आवर' से बचेगी हर जान, जानिए नया मास्टरप्लान

Railway Disaster Response: RPF, NDRF और IRIDM ने मिलकर रेलवे में Golden Hour रेस्क्यू सिस्टम शुरू किया है. अब रेल हादसों में एकीकृत टीम तुरंत एक्शन लेगी. साझा SOP और रेडियो सिस्टम से अब राहत कार्य और भी तेज़ और सटीक होंगे.
मौत को मात देगा रेलवे! ट्रेन हादसों में 'गोल्डन आवर' से बचेगी हर जान, जानिए नया मास्टरप्लान

Railway Disaster Response: अब अगर कोई रेल हादसा होता है, तो राहत टीमों को पहुंचने में देर नहीं होगी. रेलवे ने बड़ा कदम उठाते हुए RPF (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स), NDRF (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) और IRIDM (इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट) के साथ मिलकर एक नया रेस्क्यू सिस्टम बनाया है. तीनों एजेंसियों के बीच दिल्ली के रेल भवन में एक समझौता (MoU) साइन हुआ है. इस समझौते का मकसद है रेल हादसों के दौरान “Golden Hour” यानी पहले 60 मिनट के भीतर जितनी ज़्यादा जानें बचाई जा सकें, उस पर फोकस करना.

एक टीम, एक कमांड, एक मिशन

पहले रेल हादसों में RPF, NDRF, GRP और लोकल पुलिस अलग-अलग तरीके से काम करती थीं. इससे राहत कार्यों में देरी होती थी. अब ऐसा नहीं होगा. इस MoU के तहत तीनों एजेंसियां अब “One Integrated Team” के तौर पर काम करेंगी. यानि रेस्क्यू टीमों के पास अब साझा ट्रेनिंग, साझा चेकलिस्ट और साझा रेडियो सिस्टम होगा. हर टीम अब एक ही भाषा में बात करेगी और एक ही प्रोटोकॉल फॉलो करेगी, ताकि हर सेकंड की कीमत समझी जा सके.

क्या है ‘Golden Hour’?

‘गोल्डन ऑवर’ का मतलब है — किसी भी हादसे के बाद का पहला घंटा. अगर इस एक घंटे में घायलों को इलाज या राहत मिल जाए, तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. रेलवे अब इसी Golden Hour को ध्यान में रखकर रेस्क्यू सिस्टम को “फास्ट, फोकस्ड और कोऑर्डिनेटेड” बना रहा है.

साझेदारी के तीन बड़े मकसद

  • तेज़ और सटीक एक्शन: हादसे के तुरंत बाद रेस्क्यू टीम बिना किसी देरी के मौके पर पहुंच सके.
  • साझा SOP (Standard Operating Procedure): तीनों एजेंसियों के लिए एक ही रेस्क्यू प्लान — कौन पहले जाएगा, कौन घायल निकालेगा, और किसे मेडिकल टीम को सौंपना है.
  • ट्रेनिंग और टेक्नॉलजी: फील्ड ड्रिल्स, सिमुलेशन और टेक्निकल कोर्स के ज़रिए हर टीम को एक जैसी क्षमता दी जाएगी.

तीन लेवल पर होगी ट्रेनिंग

इस MoU के तहत देशभर में तीन-स्तरीय ट्रेनिंग शुरू की जाएगी-

  • Level 1 – JRRPFA (जगजीवन राम RPF अकादमी): बेसिक ट्रेनिंग और फील्ड प्रोटोकॉल.
  • Level 2 – NDRF Battalions: फील्ड ड्रिल्स और रेस्क्यू सेंसिटाइजेशन.
  • Level 3 – IRIDM Bengaluru: एडवांस्ड सिमुलेशन और प्रैक्टिकल मॉक ऑपरेशंस.

रेलवे का लक्ष्य - “One Nation, One Rescue System”

यह समझौता सिर्फ एक कागजी पहल नहीं है. यह एक ऐसा “स्केलेबल और रिपीटेबल मॉडल” है, जिसे आने वाले वक्त में देशभर की सभी रेलवे ज़ोन में लागू किया जाएगा. हर साल इसकी समीक्षा और सुधार भी होंगे. इससे रेलवे अब देशभर में एक “One Nation, One Rescue System” की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. जहां कोई भी रेल हादसा हो, राहत का तरीका एक ही होगा: तेज़, प्रशिक्षित और तालमेल से भरा.

FAQs

1. RPF–NDRF–IRIDM का MoU क्यों हुआ है?

ताकि रेल हादसों में तेजी से और समन्वित राहत दी जा सके, खासकर Golden Hour में.

2. ‘Golden Hour’ क्या होता है?

हादसे के बाद का पहला घंटा, जिसमें तुरंत मदद मिलने पर जान बचाई जा सकती है.

3. अब क्या बदलेगा?

तीनों एजेंसियां अब एक ही ट्रेनिंग, SOP और रेडियो सिस्टम से काम करेंगी.

4. ट्रेनिंग कहां होगी?

JRRPFA (गाजियाबाद), NDRF बटालियन कैंप और IRIDM (बेंगलुरु) में.

5. क्या ये व्यवस्था पूरे देश में लागू होगी?

हां, इसे सभी जोनल रेलवेज़ में स्केलेबल मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा.

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