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रेलगाड़ियों के बेहतर परिचालन के लिए रेलवे बारिश पर ड्रोन से रखेगा नजर (फाइल फोटो)
मानसून के दौरान ट्रैक पर पानी जमा होने की स्थिति से निपटने के लिए पश्चिम रेलवे ने बारिश के दौरान स्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद लेने की योजना बनाई है. दरअसल पश्चिमी उपनगर के निचले इलाकों में रेलवे ट्रैक पर बारिश के दौरान बड़े पैमाने पर पानी जमा हो जाता है जिससे रेलवे को गाड़ियों को परिचालन करना मुश्किल हो जाता है.
पिछली बारिश में पानी भरने से रुक गईं थीं ट्रेनें
पिछले बारिश के मौसम में नालासोपारा और विरार के बीच ट्रैक पर पानी भर जाने के चलते लोकल ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से बाधित हो गया था. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे इस बार बारिश के पहले ही इस तरह की तैयारी कर रहा है. ताकि यदि कहीं ट्रैक पर पानी भरना शुरू हो तो तुरंत कदम उठाए जाएं.
जल्द शुरू होगा ट्रैक पर ड्रोन से नजर रखने का काम
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ड्रोन से निगरानी के लिए सुरक्षा कारणों के चलते पुलिस से अनुमति लेने के बाद निजी ठेकेदारों की मदद से ड्रोन कैमरों को तैनात किया जाएगा. ड्रोन से निगरानी का काम 15 मई के बाद शुरू किया जा सकता है.
इन इलाकों पर रखी जाएगी नजर
रेलवे की ओर से हर साल ट्रैक पर पानी भरने की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रमुख रूप से ग्रांट रोड, प्रभादेवी, माटुंगा, माहिम, बांद्रा, खार, अंधेरी, जोगेश्वरी, वसई, विरार आदि इलाकों में ड्रोन के जरिए पटरियों पर नजर रखी जाएगी. ये ड्रोन रेलवे के कंट्रोल रूम को लाइव पिक्चर भेजेंगे ताकी समय रहते कदम उठाए जा सकें. वहीं रेलवे की ओर से वसई - विरार सहित अन्य लो लाइन एरिया में लगभग 200 मिलीमीटर तक ट्रैक उठाने का भी काम किया जा रहा है.
बारिश पर नजर रखने के लिए लगाया खास उपकरण
भारतीय रेलवे की ओर से मुम्बई में भारी बारिश के चलते होने वाली मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए इस साल विशेष मौसम विभाग (IMD) के साथ मिल कर मीरा रोड रेलवे स्टेशन पर Automatic Rain-Gauge system लगाया है. इसी तरह का एक सिस्टम भायंदर रेलवे स्टेशन पर भी लगाया गया है. इस सिस्टम के जरिए रेलवे लगातार होने वाली बारिश पर नजर रख सकेगा. Automatic Rain-Gauge system के जरिए रेलवे के अधिकारियों को realtime जानकारी मिल सकेगी कि कितनी बारिश हो चुकी है. ऐसे में यदि कोई आपात स्थित दिखती है तो रेलवे की ओर से गाड़ियों के परिचालन को रोकने या मार्ग परिवर्तित करने जैसे निर्णय लेने में आसानी होगी. इस सिस्टम के डेटा को कई स्तरों पर मॉनीटर करने की योजना बनाई गई है.