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रेल सफर होगा सुपर सेफ!
भारतीय रेलवे अब अपनी पटरियों को सिर्फ रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि 'जीरो एक्सीडेंट' के लक्ष्य के लिए तैयार कर रही है. सोमवार को रेल मंत्रालय की ओर से एक बड़ी घोषणा की गई है. रेलवे ने अपने पूरे नेटवर्क में सुरक्षा, सिग्नलिंग और संचार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹1,364.45 करोड़ के कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है.
यह कोई मामूली मरम्मत का काम नहीं है. यह भारतीय रेलवे का डिजिटल कायाकल्प है. इसमें स्वदेशी तकनीक 'कवच' का विस्तार, पुराने पड़ चुके पैनल इंटरलॉकिंग को हटाकर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाना और पूरे देश में ऑप्टिकल फाइबर केबल का जाल बिछाना शामिल है. आइए समझते हैं कि रेलवे के इस नए प्लान से आपके सफर की तस्वीर कैसे बदलने वाली है.
रेलवे की सबसे बड़ी प्राथमिकता 'कवच' सिस्टम है. यह एक ऐसी स्वदेशी तकनीक है जो दो ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकती है. अगर कोई लोको पायलट गलती से रेड सिग्नल पार कर देता है या ट्रेन की रफ्तार जरूरत से ज्यादा होती है, तो कवच खुद-ब-खुद ब्रेक लगा देता है.
इंजनों पर लगेगा कवच: ताजा मंजूरी में दक्षिणी रेलवे (Southern Railway) के 232 इंजनों पर कवच उपकरण लगाने के लिए ₹208.81 करोड़ दिए गए हैं.
बड़ा मिशन: यह पूरा काम रेलवे के उस बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसका बजट ₹27,695 करोड़ है. इसका मकसद देश के बचे हुए तमाम रेल रूट पर कवच और हाई-स्पीड इंटरनेट (LTE) पहुंचाना है.
वर्जन 4.0 की एंट्री: दक्षिणी रेलवे के लिए कुल ₹2,950 करोड़ का अलग से फंड रखा गया है. इसके तहत अब इंजनों पर कवच का सबसे लेटेस्ट 'वर्जन 4.0' लगाया जाएगा.
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ट्रेनें सही समय पर चलें और सिग्नलिंग में कोई फेलियर न हो, इसके लिए मजबूत संचार नेटवर्क बहुत जरूरी है. उत्तर रेलवे (Northern Railway) में इसके लिए ₹400.86 करोड़ के तीन विशेष काम मंजूर किए गए हैं.
| रेलवे डिवीजन | काम का विवरण | कवरेज (किमी) |
| अंबाला डिवीजन | फाइबर केबल बिछाना | 926.05 रूट किमी |
| दिल्ली डिवीजन | फाइबर केबल और OFC रूम | 1,204 रूट किमी |
| लखनऊ डिवीजन | फाइबर केबल का विस्तार | 1,074 रूट किमी |
बेहतर कनेक्टिविटी: उत्तर रेलवे के लिए इस पूरे काम का कुल बजट ₹871 करोड़ रखा गया है.
भविष्य की तैयारी: यह नया केबल नेटवर्क भविष्य में कवच के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम को चलाने के लिए रीढ़ की हड्डी का काम करेगा.
उत्तर मध्य रेलवे: इसी कड़ी में उत्तर मध्य रेलवे (North Central Railway) को भी ₹176.76 करोड़ मिले हैं ताकि हाई-डेंसिटी रूट यानी जहां बहुत ज्यादा ट्रेनें चलती हैं, वहां संचार व्यवस्था को सुधारा जा सके.
रेलवे अब पुराने पड़ चुके पैनल इंटरलॉकिंग सिस्टम को बदल रहा है. इसकी जगह अब 'इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग' ली जा रही है. दक्षिण मध्य रेलवे (South Central Railway) में इसके लिए ₹578.02 करोड़ के दो बड़े प्रोजेक्ट मंजूर हुए हैं.
इंसानी गलती की गुंजाइश खत्म: इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम आने से सिग्नल देने में इंसानी दखल कम हो जाएगा, जिससे गलती होने का खतरा न के बराबर होगा.
सुरक्षा में इजाफा: इसके लिए दक्षिण मध्य रेलवे को कुल ₹1,857 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है.
ट्रेनों की बढ़ी रफ्तार: नया सिग्नलिंग सिस्टम न केवल सुरक्षा बढ़ाता है, बल्कि यह ट्रेनों के संचालन को भी आसान बनाता है, जिससे देरी कम होती है.
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ये सभी प्रोजेक्ट्स रेलवे को आधुनिक बनाने के एक बड़े विजन का हिस्सा हैं. रेलवे का फोकस अब सिर्फ नई ट्रेनें चलाने पर नहीं, बल्कि मौजूदा नेटवर्क को इतना सुरक्षित बनाने पर है कि दुर्घटनाओं की कोई जगह न रहे.
सेफ्टी लेयर: कवच के जरिए एक एडिशनल सेफ्टी लेयर तैयार की जा रही है जो हाई-स्पीड नेटवर्क के लिए बहुत जरूरी है.
ऑपरेशनल एफिशिएंसी: नए सिग्नल और फाइबर नेटवर्क से ट्रेनों के आने-जाने की जानकारी और कंट्रोल पहले से कहीं ज्यादा सटीक हो जाएगा.
क्षमता में सुधार: जब सिग्नलिंग और संचार बेहतर होता है, तो एक ही ट्रैक पर ज्यादा ट्रेनें सुरक्षित तरीके से चलाई जा सकती हैं.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 कवच सिस्टम आखिर काम कैसे करता है?
कवच एक स्वदेशी तकनीक है जो ट्रेन को रेड सिग्नल पार करने से रोकती है. अगर एक ही पटरी पर दो ट्रेनें आ जाती हैं, तो यह सिस्टम अपने आप ब्रेक लगा देता है ताकि टक्कर न हो.
Q2 रेलवे ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) पर इतना पैसा क्यों खर्च कर रही है?
आधुनिक सिग्नलिंग और कवच को चलाने के लिए बहुत तेज और बिना रुकावट वाले डेटा नेटवर्क की जरूरत होती है. फाइबर केबल इसी डिजिटल नेटवर्क को मजबूती देता है.
Q3 क्या इन बदलावों से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी?
हां, जब सिग्नलिंग सिस्टम आधुनिक (इलेक्ट्रॉनिक) होता है और संचार तेज होता है, तो ट्रेनों का ऑपरेशन सुचारू हो जाता है. इससे ट्रेनों की एवरेज स्पीड बढ़ाने में मदद मिलती है.
Q4 इस ₹1,364 करोड़ के फंड से किन रेलवे जोन को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
इस राउंड में दक्षिणी रेलवे, उत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे को सबसे ज्यादा फायदा होगा. यहां कवच और सिग्नलिंग के बड़े काम होने हैं.
Q5 पैनल इंटरलॉकिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में क्या अंतर है?
पैनल इंटरलॉकिंग थोड़ा पुराना सिस्टम है जिसमें कई काम मैनुअल होते हैं. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग पूरी तरह कंप्यूटर आधारित है, जो ज्यादा सुरक्षित और तेज है.