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भारतीय रेलवे करने वाला है बड़े सुधार
भारतीय रेलवे ने 14 फरवरी 2026 को अपने दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों- पैसेंजर सर्विस और माल ढुलाई में बड़े बदलावों का बिगुल फूंक दिया है. सरकार का यह नया रिफॉर्म पैकेज सिर्फ कागजी बदलाव नहीं है, बल्कि यह आपके ट्रेन के डिब्बे से लेकर देश के बड़े माल गोदामों तक की तस्वीर बदलने वाला मिशन है.
इस नई नीति का सीधा मकसद है कि जब आप ट्रेन में सफर करें तो आपको घर जैसी सफाई और सुविधा मिले, और जब देश का व्यापार चले तो रेलवे उसके लिए सबसे मजबूत कड़ी साबित हो. आइए समझते हैं कि रेल मंत्रालय के इस पिटारे में आपके लिए क्या खास है.
अक्सर रेल यात्रा के दौरान यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत सफाई और फटे-पुराने लिनन (चादर-तकिए) को लेकर होती है. सरकार ने इसी जड़ पर प्रहार किया है. अब रेलवे एक 'इंटीग्रेटेड क्लीनिंग, लिनन और पेटी रिपेयर्स मॉडल' लेकर आया है.
इसका मतलब यह है कि अब कोच की सफाई, चादरों का रखरखाव और छोटी-मोटी मरम्मत (जैसे नल खराब होना या सीट का ढीला होना) के लिए अलग-अलग लोग नहीं बल्कि एक ही हाई-टेक टीम जिम्मेदार होगी. यह टीम मल्टी-टास्किंग होगी और सीधे यात्रियों के संपर्क में रहेगी.
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इस सुधार की सबसे बड़ी बात यह है कि अब काम केवल भरोसे पर नहीं बल्कि डेटा पर चलेगा. रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए सफाई और सेवाओं की निगरानी की जाएगी. पेशेवर और अनुशासित सर्विस प्रोवाइडर्स को मैदान में उतारा जाएगा जो ग्राहक की उम्मीदों से आगे बढ़कर काम करेंगे. लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए खास तौर पर रूट-आधारित टीमें तैनात की जाएंगी. यह पूरा मॉडल अगले दो सालों में चरणों में लागू किया जाएगा.
खास बात यह है कि इसमें जनरल कोच को भी शामिल किया गया है. टॉयलेट, बेसिन और कूड़ा कलेक्शन अब और भी बेहतर होगा. स्टाफ न केवल सफाई करेगा बल्कि सुरक्षा उपकरणों की भी जांच करेगा और जरूरत पड़ने पर पानी भरने का समन्वय भी करेगा.
रेलवे का दूसरा बड़ा फोकस माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स पर है. सरकार चाहती है कि सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का खर्च कम हो और रेलवे की कमाई बढ़े. इसके लिए 'गति शक्ति कार्गो टर्मिनल' (GCT) नीति को और भी ज्यादा लचीला और ताकतवर बनाया गया है.
अब रेलवे की खाली जमीन पर सिर्फ ट्रैक नहीं बल्कि गोदाम, ग्राइंडिंग यूनिट्स और सामान के प्रोसेसिंग सेंटर भी बनाए जा सकेंगे. जो पुराने माल गोदाम कम इस्तेमाल हो रहे हैं, उन्हें अब आधुनिक GCT में बदल दिया जाएगा.

व्यापार जगत को लुभाने के लिए रेलवे ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. अब कार्गो टर्मिनल और संबंधित सुविधाओं के लिए 50 साल के लंबे कॉन्ट्रैक्ट दिए जाएंगे. इससे कंपनियों को निवेश करने में स्थिरता और भरोसा मिलेगा. इसके अलावा, अप्रूवल की प्रक्रिया को बहुत आसान बना दिया गया है. अब डिविजनल रेलवे मैनेजर्स (DRMs) के पास विवादों को सुलझाने के ज्यादा अधिकार होंगे.
सरकार का लक्ष्य अगले तीन सालों में 124 मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल तैयार करने का है. इनसे हर साल करीब 20 करोड़ टन ट्रैफिक मिलने की उम्मीद है, जिससे रेलवे के खजाने में करीब 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व आएगा.
इन सुधारों का असल मकसद सड़कों पर बोझ कम करना और रेल को पोर्ट्स (बंदरगाहों) और औद्योगिक गलियारों से जोड़ना है. जब रेलवे सीधे कारखानों और बंदरगाहों से जुड़ेगा, तो सामान ढुलाई की लागत कम होगी. इसमें सीमेंट जैसे भारी सामान की ढुलाई पर विशेष ध्यान दिया गया है. 'गारंटीड रेलवे फ्रेट' (GRF) जैसे कॉन्सेप्ट से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि व्यापारियों का माल समय पर और सुरक्षित पहुंचे.